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जनविश्वास अभियान में कलेक्टरों की होगी असली परीक्षा, अब जनता तय करेगी अफसरों की रैंकिंग!
मध्य प्रदेश
7 अगस्त से शुरू होने वाले मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान में शिकायतों के समाधान, लोक सेवाओं में सुधार, आर्थिक विकास और जनसंतुष्टि के आधार पर होगा जिलों का मूल्यांकन, बेहतर प्रदर्शन करने वाले कलेक्टरों को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी।
मध्य प्रदेश सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। 7 अगस्त से शुरू होने वाला मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान केवल सरकारी योजनाओं के प्रचार या शिकायतों के निराकरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रदेश के सभी 55 जिलों के कलेक्टरों की कार्यशैली, संवेदनशीलता और प्रशासनिक क्षमता की भी व्यापक परीक्षा बनेगा। इस अभियान के दौरान सरकार जिलों के प्रदर्शन का विस्तृत मूल्यांकन करेगी और यही रिपोर्ट भविष्य में कलेक्टरों की नई पदस्थापना और बड़े जिलों की जिम्मेदारी तय करने का आधार बन सकती है।
राज्य सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि अब केवल शिकायतों की संख्या कम करना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि संबंधित जिले में आयोजित शिविरों, जनसंवाद कार्यक्रमों और अधिकारियों के फील्ड विजिट के बाद लोगों की समस्याओं में वास्तविक कमी आई या नहीं। प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ जनता के बीच विश्वास बढ़ाने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने को भी मूल्यांकन का प्रमुख आधार बनाया गया है।
मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान 7 अगस्त से शुरू होकर 8 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में लगातार शिविर, जनसंवाद, निरीक्षण और समाधान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने हाल ही में सभी कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर अभियान की रूपरेखा साझा की और स्पष्ट किया कि इस बार प्रशासनिक प्रदर्शन का आकलन पहले से कहीं अधिक व्यापक होगा।
सरकार की नई रणनीति के अनुसार केवल यह नहीं देखा जाएगा कि कितनी शिकायतों का निराकरण किया गया, बल्कि यह भी जांचा जाएगा कि अभियान के दौरान लंबित मामलों में कितनी कमी आई। यदि किसी जिले में लगातार शिकायतें बढ़ती रहती हैं या समाधान के बाद भी समस्याएं बनी रहती हैं, तो उसका असर संबंधित जिले की रैंकिंग पर पड़ेगा।
मूल्यांकन में लोक सेवाओं की गुणवत्ता को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। बिजली, पानी, राजस्व, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सरकारी सेवाओं की उपलब्धता एवं समयबद्धता का विश्लेषण किया जाएगा। विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली का गहन अध्ययन कर यह देखा जाएगा कि लोगों को सेवाएं पहले की तुलना में कितनी बेहतर मिल रही हैं।
सरकार आर्थिक विकास को भी प्रशासनिक प्रदर्शन का महत्वपूर्ण पैमाना मान रही है। जिले में निवेश, स्थानीय उद्योगों की प्रगति, एमएसएमई इकाइयों की समस्याओं के समाधान, रोजगार के अवसर और विकास परियोजनाओं की गति जैसे बिंदुओं को भी मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट है कि अब कलेक्टरों की भूमिका केवल प्रशासनिक अधिकारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें विकास की गति बढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
अभियान के दौरान प्रत्येक शुक्रवार फील्ड विजिट और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिला प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार भ्रमण कार्यक्रम तैयार करेगा और विकासखंड स्तर तक अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी और समाधान की समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी।
यदि जनसंवाद के दौरान किसी सरकारी योजना, सेवा या अन्य विषय से संबंधित नए आवेदन प्राप्त होते हैं, तो उनका पंजीकरण कर अगली बैठक से पहले समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे शिकायतों के निपटारे की पूरी प्रक्रिया की निगरानी भी आसान होगी।
सरकार ने विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को भी सक्रिय भूमिका सौंपी है। सभी विभाग अपने निरीक्षण का अलग प्रारूप तैयार करेंगे और अभियान शुरू होने से पहले जिलों को भेजेंगे। विभागीय अधिकारी नियमित रूप से जिलों का दौरा करेंगे तथा स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कार्यों की समीक्षा करेंगे।
उद्यम संवाद कार्यक्रम भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। इसके अंतर्गत स्थानीय उद्योगपतियों, कुटीर उद्योग संचालकों और एमएसएमई उद्यमियों से सीधे बातचीत की जाएगी। लाइसेंस, एनओसी, लोक सेवा गारंटी और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा ताकि जिले की आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके।
जो समस्याएं जिला स्तर पर हल नहीं हो पाएंगी, उन्हें राज्य स्तर पर संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और विभागाध्यक्षों के समन्वय से समयबद्ध तरीके से सुलझाने की व्यवस्था की गई है। इससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
संभागायुक्तों को भी विशेष जिम्मेदारी दी गई है। वे अपने संभाग के सभी जिलों का नियमित दौरा करेंगे, अभियान की प्रगति की समीक्षा करेंगे और विभागीय अधिकारियों के फील्ड विजिट की निगरानी करेंगे। वहीं मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव जिन जिलों का दौरा करेंगे, वहां पूरे जिले के प्रशासनिक कार्यों की विस्तृत समीक्षा भी की जाएगी।
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जनविश्वास अभियान में कलेक्टरों की होगी असली परीक्षा, अब जनता तय करेगी अफसरों की रैंकिंग!
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। 7 अगस्त से शुरू होने वाला मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान केवल सरकारी योजनाओं के प्रचार या शिकायतों के निराकरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रदेश के सभी 55 जिलों के कलेक्टरों की कार्यशैली, संवेदनशीलता और प्रशासनिक क्षमता की भी व्यापक परीक्षा बनेगा। इस अभियान के दौरान सरकार जिलों के प्रदर्शन का विस्तृत मूल्यांकन करेगी और यही रिपोर्ट भविष्य में कलेक्टरों की नई पदस्थापना और बड़े जिलों की जिम्मेदारी तय करने का आधार बन सकती है।
राज्य सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि अब केवल शिकायतों की संख्या कम करना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि संबंधित जिले में आयोजित शिविरों, जनसंवाद कार्यक्रमों और अधिकारियों के फील्ड विजिट के बाद लोगों की समस्याओं में वास्तविक कमी आई या नहीं। प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ जनता के बीच विश्वास बढ़ाने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने को भी मूल्यांकन का प्रमुख आधार बनाया गया है।
मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान 7 अगस्त से शुरू होकर 8 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में लगातार शिविर, जनसंवाद, निरीक्षण और समाधान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने हाल ही में सभी कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर अभियान की रूपरेखा साझा की और स्पष्ट किया कि इस बार प्रशासनिक प्रदर्शन का आकलन पहले से कहीं अधिक व्यापक होगा।
सरकार की नई रणनीति के अनुसार केवल यह नहीं देखा जाएगा कि कितनी शिकायतों का निराकरण किया गया, बल्कि यह भी जांचा जाएगा कि अभियान के दौरान लंबित मामलों में कितनी कमी आई। यदि किसी जिले में लगातार शिकायतें बढ़ती रहती हैं या समाधान के बाद भी समस्याएं बनी रहती हैं, तो उसका असर संबंधित जिले की रैंकिंग पर पड़ेगा।
मूल्यांकन में लोक सेवाओं की गुणवत्ता को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। बिजली, पानी, राजस्व, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सरकारी सेवाओं की उपलब्धता एवं समयबद्धता का विश्लेषण किया जाएगा। विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली का गहन अध्ययन कर यह देखा जाएगा कि लोगों को सेवाएं पहले की तुलना में कितनी बेहतर मिल रही हैं।
सरकार आर्थिक विकास को भी प्रशासनिक प्रदर्शन का महत्वपूर्ण पैमाना मान रही है। जिले में निवेश, स्थानीय उद्योगों की प्रगति, एमएसएमई इकाइयों की समस्याओं के समाधान, रोजगार के अवसर और विकास परियोजनाओं की गति जैसे बिंदुओं को भी मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट है कि अब कलेक्टरों की भूमिका केवल प्रशासनिक अधिकारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें विकास की गति बढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
अभियान के दौरान प्रत्येक शुक्रवार फील्ड विजिट और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिला प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार भ्रमण कार्यक्रम तैयार करेगा और विकासखंड स्तर तक अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी और समाधान की समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी।
यदि जनसंवाद के दौरान किसी सरकारी योजना, सेवा या अन्य विषय से संबंधित नए आवेदन प्राप्त होते हैं, तो उनका पंजीकरण कर अगली बैठक से पहले समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे शिकायतों के निपटारे की पूरी प्रक्रिया की निगरानी भी आसान होगी।
सरकार ने विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को भी सक्रिय भूमिका सौंपी है। सभी विभाग अपने निरीक्षण का अलग प्रारूप तैयार करेंगे और अभियान शुरू होने से पहले जिलों को भेजेंगे। विभागीय अधिकारी नियमित रूप से जिलों का दौरा करेंगे तथा स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कार्यों की समीक्षा करेंगे।
उद्यम संवाद कार्यक्रम भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। इसके अंतर्गत स्थानीय उद्योगपतियों, कुटीर उद्योग संचालकों और एमएसएमई उद्यमियों से सीधे बातचीत की जाएगी। लाइसेंस, एनओसी, लोक सेवा गारंटी और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा ताकि जिले की आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके।
जो समस्याएं जिला स्तर पर हल नहीं हो पाएंगी, उन्हें राज्य स्तर पर संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और विभागाध्यक्षों के समन्वय से समयबद्ध तरीके से सुलझाने की व्यवस्था की गई है। इससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
संभागायुक्तों को भी विशेष जिम्मेदारी दी गई है। वे अपने संभाग के सभी जिलों का नियमित दौरा करेंगे, अभियान की प्रगति की समीक्षा करेंगे और विभागीय अधिकारियों के फील्ड विजिट की निगरानी करेंगे। वहीं मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव जिन जिलों का दौरा करेंगे, वहां पूरे जिले के प्रशासनिक कार्यों की विस्तृत समीक्षा भी की जाएगी।
