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यूट्यूबर मनीष पटेल पर पहले से दर्ज हैं 6 मामले, सरेंडर के बाद बढ़ा विवाद
रीवा,(म.प्र.)
आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, पुलिस ने सार्वजनिक किया आपराधिक रिकॉर्ड
ब्राह्मण समाज के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में आरोपी यूट्यूबर मनीष पटेल का मामला अब लगातार चर्चा में बना हुआ है। बुधवार को मनीष पटेल ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर सरेंडर किया था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोग पुलिस कार्रवाई को सही बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। इस बीच पुलिस ने आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक कर मामले को नया मोड़ दे दिया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मनीष पटेल के खिलाफ पहले से कई गंभीर मामले अलग-अलग थानों में दर्ज हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में उसके खिलाफ तीन मामले दर्ज हैं, जबकि सिविल लाइन और समान थाने में भी प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। इसके अलावा हाल ही में आईटी एक्ट के तहत दर्ज मामला उसका छठवां केस बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि आरोपी केवल सोशल मीडिया विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके खिलाफ पहले भी चोरी, लूट और मारपीट जैसे अपराध दर्ज हो चुके हैं।
सिविल लाइन थाना प्रभारी विजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2016 में आरोपी के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज किया गया था। उसी साल विश्वविद्यालय थाने में चोरी, लूट और मारपीट के अलग-अलग प्रकरण दर्ज हुए थे। समान थाना क्षेत्र में भी चोरी का एक मामला दर्ज किया जा चुका है। पुलिस के मुताबिक आरोपी मोबाइल लूट के एक पुराने मामले में स्थायी वारंटी भी बताया जा रहा है। अब पुलिस सभी मामलों का रिकॉर्ड एक साथ खंगाल रही है।
बताया जा रहा है कि हालिया विवाद एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ। आरोप है कि मनीष पटेल ने ब्राह्मण समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पोस्ट वायरल होने के बाद कई संगठनों ने विरोध जताया और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। बढ़ते दबाव और विरोध के बीच बुधवार को आरोपी ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया।
हालांकि सरेंडर के बाद मामला शांत होने के बजाय और ज्यादा गरमा गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार पोस्ट और वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। कुछ लोग मनीष पटेल को टारगेट किए जाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग पुलिस कार्रवाई का समर्थन भी कर रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पुराने मामलों को अभी सामने लाना सवाल खड़े करता है।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस अब केवल विवादित पोस्ट ही नहीं, बल्कि उसके निर्माण और प्रसार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह देखा जा रहा है कि पोस्ट को वायरल करने में किसी नेटवर्क या अन्य व्यक्तियों की भागीदारी थी या नहीं। साइबर टीम भी सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है।
शहर में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कई सामाजिक संगठनों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ संगठनों ने आरोपी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, जबकि कुछ लोगों ने निष्पक्ष जांच की बात कही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों पर भी नजर रखी जा रही है।
मनीष पटेल के समर्थन में भी सोशल मीडिया पर अभियान चलाए जा रहे हैं। कुछ लोग पुराने वीडियो और पोस्ट शेयर कर यह दावा कर रहे हैं कि उसके खिलाफ कार्रवाई एकतरफा है। हालांकि पुलिस का कहना है कि कार्रवाई केवल उपलब्ध सबूतों और शिकायतों के आधार पर की गई है। अधिकारियों ने लोगों से सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने से बचने की अपील भी की है।
इधर शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अलर्ट मोड पर दिखाई दे रही है। विवाद बढ़ने की आशंका को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है लेकिन ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने साफ किया है कि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या टिप्पणी पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया कंटेंट, अभिव्यक्ति की सीमा और ऑनलाइन जिम्मेदारी को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर लोग धार्मिक और सामाजिक भावनाओं के सम्मान की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बढ़ते विवादित कंटेंट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
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यूट्यूबर मनीष पटेल पर पहले से दर्ज हैं 6 मामले, सरेंडर के बाद बढ़ा विवाद
रीवा,(म.प्र.)
ब्राह्मण समाज के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में आरोपी यूट्यूबर मनीष पटेल का मामला अब लगातार चर्चा में बना हुआ है। बुधवार को मनीष पटेल ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर सरेंडर किया था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोग पुलिस कार्रवाई को सही बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। इस बीच पुलिस ने आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक कर मामले को नया मोड़ दे दिया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मनीष पटेल के खिलाफ पहले से कई गंभीर मामले अलग-अलग थानों में दर्ज हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में उसके खिलाफ तीन मामले दर्ज हैं, जबकि सिविल लाइन और समान थाने में भी प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। इसके अलावा हाल ही में आईटी एक्ट के तहत दर्ज मामला उसका छठवां केस बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि आरोपी केवल सोशल मीडिया विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके खिलाफ पहले भी चोरी, लूट और मारपीट जैसे अपराध दर्ज हो चुके हैं।
सिविल लाइन थाना प्रभारी विजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2016 में आरोपी के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज किया गया था। उसी साल विश्वविद्यालय थाने में चोरी, लूट और मारपीट के अलग-अलग प्रकरण दर्ज हुए थे। समान थाना क्षेत्र में भी चोरी का एक मामला दर्ज किया जा चुका है। पुलिस के मुताबिक आरोपी मोबाइल लूट के एक पुराने मामले में स्थायी वारंटी भी बताया जा रहा है। अब पुलिस सभी मामलों का रिकॉर्ड एक साथ खंगाल रही है।
बताया जा रहा है कि हालिया विवाद एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ। आरोप है कि मनीष पटेल ने ब्राह्मण समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पोस्ट वायरल होने के बाद कई संगठनों ने विरोध जताया और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। बढ़ते दबाव और विरोध के बीच बुधवार को आरोपी ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया।
हालांकि सरेंडर के बाद मामला शांत होने के बजाय और ज्यादा गरमा गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार पोस्ट और वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। कुछ लोग मनीष पटेल को टारगेट किए जाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग पुलिस कार्रवाई का समर्थन भी कर रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पुराने मामलों को अभी सामने लाना सवाल खड़े करता है।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस अब केवल विवादित पोस्ट ही नहीं, बल्कि उसके निर्माण और प्रसार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह देखा जा रहा है कि पोस्ट को वायरल करने में किसी नेटवर्क या अन्य व्यक्तियों की भागीदारी थी या नहीं। साइबर टीम भी सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है।
शहर में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कई सामाजिक संगठनों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ संगठनों ने आरोपी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, जबकि कुछ लोगों ने निष्पक्ष जांच की बात कही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों पर भी नजर रखी जा रही है।
मनीष पटेल के समर्थन में भी सोशल मीडिया पर अभियान चलाए जा रहे हैं। कुछ लोग पुराने वीडियो और पोस्ट शेयर कर यह दावा कर रहे हैं कि उसके खिलाफ कार्रवाई एकतरफा है। हालांकि पुलिस का कहना है कि कार्रवाई केवल उपलब्ध सबूतों और शिकायतों के आधार पर की गई है। अधिकारियों ने लोगों से सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने से बचने की अपील भी की है।
इधर शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अलर्ट मोड पर दिखाई दे रही है। विवाद बढ़ने की आशंका को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है लेकिन ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने साफ किया है कि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या टिप्पणी पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया कंटेंट, अभिव्यक्ति की सीमा और ऑनलाइन जिम्मेदारी को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर लोग धार्मिक और सामाजिक भावनाओं के सम्मान की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बढ़ते विवादित कंटेंट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
