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रीवा-यूपी बॉर्डर पर आंधी-तूफान का कहर, चाकघाट में भारी तबाही
रीवा,(म.प्र.)
तेज हवाओं से उखड़े पेड़ और बिजली खंभे, कई घरों-दुकानों को नुकसान
रीवा जिले के यूपी बॉर्डर से लगे चाकघाट नगर परिषद क्षेत्र में गुरुवार देर रात मौसम ने अचानक ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका तबाही की तस्वीर में बदल गया। तेज आंधी, धूलभरी हवाओं और बारिश के साथ आए तूफान ने मकानों, दुकानों और सड़क किनारे खड़े वाहनों को भारी नुकसान पहुंचाया। रात करीब 11 बजे के बाद अचानक मौसम बदला और तेज हवा चलने लगी। देखते ही देखते हालात इतने बिगड़ गए कि लोगों को घरों के अंदर सुरक्षित जगहों पर छिपना पड़ा।
चाकघाट थाना क्षेत्र और आसपास के इलाकों में कई घरों के टीन शेड हवा में उड़ गए। कहीं दीवारें गिर गईं तो कहीं छतों के ऊपर रखी टीन की चादरें सड़क पर जा गिरीं। कई लोग रात में ही घरों से बाहर निकल आए। तेज हवाओं की आवाज और उड़ती टीन की चादरों से लोगों में डर का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई सालों में उन्होंने इतना तेज तूफान नहीं देखा।
तूफान का असर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी दिखाई दिया। चाकघाट थाने के बाहर लगा भारी-भरकम लोहे का साइन बोर्ड तेज हवा के दबाव में उखड़कर सड़क किनारे गिर पड़ा। यह बोर्ड सड़क पर गिरता तो बड़ा हादसा हो सकता था, लेकिन देर रात ट्रैफिक कम होने की वजह से जनहानि टल गई। बोर्ड गिरने के बाद कुछ देर तक इलाके में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने किसी तरह रास्ता साफ कराया।
बाजार क्षेत्र में भी भारी नुकसान की खबर सामने आई है। कई दुकानों के सामने लगे बोर्ड टूटकर गिर गए। कुछ दुकानों की टीन की छतें पूरी तरह उड़ गईं। सड़क किनारे खड़े दोपहिया और चारपहिया वाहन पेड़ों और टीन शेड की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गए। कई जगह बिजली के खंभे झुक गए और तार टूटकर सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद पूरे इलाके की बिजली व्यवस्था ठप हो गई। देर रात से शुक्रवार सुबह तक कई मोहल्लों में अंधेरा पसरा रहा।
सुबह जब लोग घरों से बाहर निकले तो चारों तरफ तबाही का मंजर दिखाई दिया। कहीं पेड़ सड़क के बीचोंबीच गिरे पड़े थे तो कहीं बिजली के तार बिखरे हुए थे। कई गलियों में टीन शेड और टूटे पेड़ों की वजह से रास्ता बंद हो गया था। लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ इलाकों में पेड़ गिरने से पानी की पाइपलाइन भी प्रभावित हुई है। हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक तूफान इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ परिवारों ने रात पड़ोसियों के घरों में बिताई क्योंकि उनके मकानों की छतें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। कई घरों में बारिश का पानी भर गया। बाजार के दुकानदारों का कहना है कि अचानक आए तूफान से हजारों रुपए का नुकसान हुआ है। सुबह से लोग टूटे सामान और उखड़े शेड हटाने में लगे रहे।
गनीमत यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में अब तक किसी के हताहत होने की सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि कई लोग मामूली रूप से घायल बताए जा रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राहत की बात यह रही कि देर रात सड़कों पर ज्यादा आवाजाही नहीं थी, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा नुकसान चाकघाट नगर परिषद क्षेत्र और उससे लगे गांवों में हुआ है।
तूफान के बाद स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद और बिजली विभाग की टीमें सुबह से मौके पर पहुंच गईं। जेसीबी मशीनों की मदद से सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने का काम शुरू किया गया। बिजली विभाग के कर्मचारी टूटे खंभों और तारों को ठीक करने में जुटे रहे। कई इलाकों में अस्थायी रूप से बिजली बहाल करने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ स्थानों पर अभी भी आपूर्ति बाधित बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए और प्रभावित परिवारों को राहत दी जाए। लोगों का कहना है कि कई गरीब परिवारों के घरों के टीन शेड पूरी तरह उड़ गए हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल सहायता की जरूरत है। कुछ लोगों ने यह भी मांग उठाई कि बरसात से पहले कमजोर बिजली खंभों और पुराने पेड़ों की जांच की जानी चाहिए थी।
मौसम विभाग की ओर से पहले तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई थी, लेकिन लोगों को इस स्तर की तबाही की उम्मीद नहीं थी। प्रशासन हालात सामान्य करने में जुटा हुआ है। वहीं चाकघाट और आसपास के इलाकों में लोग अभी भी डरे हुए हैं। कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर रात में बाहर खुले स्थानों में बैठकर समय बिताया।
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रीवा-यूपी बॉर्डर पर आंधी-तूफान का कहर, चाकघाट में भारी तबाही
रीवा,(म.प्र.)
रीवा जिले के यूपी बॉर्डर से लगे चाकघाट नगर परिषद क्षेत्र में गुरुवार देर रात मौसम ने अचानक ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका तबाही की तस्वीर में बदल गया। तेज आंधी, धूलभरी हवाओं और बारिश के साथ आए तूफान ने मकानों, दुकानों और सड़क किनारे खड़े वाहनों को भारी नुकसान पहुंचाया। रात करीब 11 बजे के बाद अचानक मौसम बदला और तेज हवा चलने लगी। देखते ही देखते हालात इतने बिगड़ गए कि लोगों को घरों के अंदर सुरक्षित जगहों पर छिपना पड़ा।
चाकघाट थाना क्षेत्र और आसपास के इलाकों में कई घरों के टीन शेड हवा में उड़ गए। कहीं दीवारें गिर गईं तो कहीं छतों के ऊपर रखी टीन की चादरें सड़क पर जा गिरीं। कई लोग रात में ही घरों से बाहर निकल आए। तेज हवाओं की आवाज और उड़ती टीन की चादरों से लोगों में डर का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई सालों में उन्होंने इतना तेज तूफान नहीं देखा।
तूफान का असर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी दिखाई दिया। चाकघाट थाने के बाहर लगा भारी-भरकम लोहे का साइन बोर्ड तेज हवा के दबाव में उखड़कर सड़क किनारे गिर पड़ा। यह बोर्ड सड़क पर गिरता तो बड़ा हादसा हो सकता था, लेकिन देर रात ट्रैफिक कम होने की वजह से जनहानि टल गई। बोर्ड गिरने के बाद कुछ देर तक इलाके में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने किसी तरह रास्ता साफ कराया।
बाजार क्षेत्र में भी भारी नुकसान की खबर सामने आई है। कई दुकानों के सामने लगे बोर्ड टूटकर गिर गए। कुछ दुकानों की टीन की छतें पूरी तरह उड़ गईं। सड़क किनारे खड़े दोपहिया और चारपहिया वाहन पेड़ों और टीन शेड की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गए। कई जगह बिजली के खंभे झुक गए और तार टूटकर सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद पूरे इलाके की बिजली व्यवस्था ठप हो गई। देर रात से शुक्रवार सुबह तक कई मोहल्लों में अंधेरा पसरा रहा।
सुबह जब लोग घरों से बाहर निकले तो चारों तरफ तबाही का मंजर दिखाई दिया। कहीं पेड़ सड़क के बीचोंबीच गिरे पड़े थे तो कहीं बिजली के तार बिखरे हुए थे। कई गलियों में टीन शेड और टूटे पेड़ों की वजह से रास्ता बंद हो गया था। लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ इलाकों में पेड़ गिरने से पानी की पाइपलाइन भी प्रभावित हुई है। हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक तूफान इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ परिवारों ने रात पड़ोसियों के घरों में बिताई क्योंकि उनके मकानों की छतें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। कई घरों में बारिश का पानी भर गया। बाजार के दुकानदारों का कहना है कि अचानक आए तूफान से हजारों रुपए का नुकसान हुआ है। सुबह से लोग टूटे सामान और उखड़े शेड हटाने में लगे रहे।
गनीमत यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में अब तक किसी के हताहत होने की सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि कई लोग मामूली रूप से घायल बताए जा रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राहत की बात यह रही कि देर रात सड़कों पर ज्यादा आवाजाही नहीं थी, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा नुकसान चाकघाट नगर परिषद क्षेत्र और उससे लगे गांवों में हुआ है।
तूफान के बाद स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद और बिजली विभाग की टीमें सुबह से मौके पर पहुंच गईं। जेसीबी मशीनों की मदद से सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने का काम शुरू किया गया। बिजली विभाग के कर्मचारी टूटे खंभों और तारों को ठीक करने में जुटे रहे। कई इलाकों में अस्थायी रूप से बिजली बहाल करने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ स्थानों पर अभी भी आपूर्ति बाधित बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए और प्रभावित परिवारों को राहत दी जाए। लोगों का कहना है कि कई गरीब परिवारों के घरों के टीन शेड पूरी तरह उड़ गए हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल सहायता की जरूरत है। कुछ लोगों ने यह भी मांग उठाई कि बरसात से पहले कमजोर बिजली खंभों और पुराने पेड़ों की जांच की जानी चाहिए थी।
मौसम विभाग की ओर से पहले तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई थी, लेकिन लोगों को इस स्तर की तबाही की उम्मीद नहीं थी। प्रशासन हालात सामान्य करने में जुटा हुआ है। वहीं चाकघाट और आसपास के इलाकों में लोग अभी भी डरे हुए हैं। कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर रात में बाहर खुले स्थानों में बैठकर समय बिताया।
