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संभल में ईदगाह-इमामबाड़े पर बुलडोजर कार्रवाई, प्रशासन ने अवैध कब्जे का हवाला दिया
नेशनल न्यूज
गांव में चारागाह भूमि पर निर्माण का आरोप, प्रशासन का दावा—कानूनी प्रक्रिया के बाद कार्रवाई; ग्रामीणों में नाराजगी और बहस तेज
उत्तर प्रदेश के संभल जिले के बिछोली गांव में गुरुवार सुबह प्रशासन ने अवैध कब्जे के आरोप में ईदगाह और इमामबाड़े पर बुलडोजर कार्रवाई की। सुबह करीब 8 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में पहले ईदगाह को ढहा दिया गया, जबकि इमामबाड़े को चार बुलडोजरों की मदद से हटाया जा रहा है। मौके पर पांच थानों की पुलिस फोर्स और एक कंपनी पीएसी तैनात की गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
प्रशासन के अनुसार, यह निर्माण करीब 7 बीघा चारागाह भूमि और खाद गड्ढे की जमीन पर अवैध रूप से किया गया था। जिला प्रशासन का कहना है कि यह कब्जा लगभग 12 साल पहले किया गया था। तहसीलदार कोर्ट के आदेश के बाद नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा में कोई भी वैध दावेदार सामने नहीं आया।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है और इसका उद्देश्य सार्वजनिक भूमि को वापस सरकारी उपयोग में लाना है। अधिकारियों के अनुसार, पास में एक मेडिकल कॉलेज भी स्थित है, इसलिए भूमि का महत्व और बढ़ जाता है।
गुरुवार सुबह प्रशासनिक टीम एसडीएम निधि पटेल और नायब तहसीलदार दीपक कुमार जुरैल के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। कार्रवाई शुरू होने से पहले ही कुछ ग्रामीण निर्माण को हाथ से तोड़ने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटाकर नियंत्रण स्थापित किया। इसके बाद बुलडोजर से ढांचे को ध्वस्त किया जाने लगा।
मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कार्रवाई के दौरान भीड़ जुटने पर पुलिस ने लोगों को वहां से खदेड़ दिया।
स्थानीय प्रतिक्रिया और विवाद
कार्रवाई को लेकर गांव में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे प्रशासनिक कदम बताया, जबकि कुछ ग्रामीणों में नाराजगी भी दिखी। एक स्थानीय महिला ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकारी जमीन पर कब्जे के खिलाफ कार्रवाई हो रही है तो फिर अन्य धार्मिक स्थलों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए। इस टिप्पणी के बाद गांव में चर्चा और तेज हो गई।
प्रशासन का पक्ष
जिला अधिकारी ने बताया कि अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार की गई है। उन्होंने कहा कि ध्वस्तीकरण का खर्च भी संबंधित कब्जेदारों से वसूला जाएगा। प्रशासन का दावा है कि कार्रवाई का उद्देश्य किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना है।
फिलहाल मौके पर मलबा हटाने का काम जारी है और क्षेत्र में पुलिस बल तैनात है। प्रशासन ने साफ किया है कि भविष्य में भी सरकारी जमीनों पर हुए अवैध कब्जों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
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संभल में ईदगाह-इमामबाड़े पर बुलडोजर कार्रवाई, प्रशासन ने अवैध कब्जे का हवाला दिया
नेशनल न्यूज
उत्तर प्रदेश के संभल जिले के बिछोली गांव में गुरुवार सुबह प्रशासन ने अवैध कब्जे के आरोप में ईदगाह और इमामबाड़े पर बुलडोजर कार्रवाई की। सुबह करीब 8 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में पहले ईदगाह को ढहा दिया गया, जबकि इमामबाड़े को चार बुलडोजरों की मदद से हटाया जा रहा है। मौके पर पांच थानों की पुलिस फोर्स और एक कंपनी पीएसी तैनात की गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
प्रशासन के अनुसार, यह निर्माण करीब 7 बीघा चारागाह भूमि और खाद गड्ढे की जमीन पर अवैध रूप से किया गया था। जिला प्रशासन का कहना है कि यह कब्जा लगभग 12 साल पहले किया गया था। तहसीलदार कोर्ट के आदेश के बाद नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा में कोई भी वैध दावेदार सामने नहीं आया।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है और इसका उद्देश्य सार्वजनिक भूमि को वापस सरकारी उपयोग में लाना है। अधिकारियों के अनुसार, पास में एक मेडिकल कॉलेज भी स्थित है, इसलिए भूमि का महत्व और बढ़ जाता है।
गुरुवार सुबह प्रशासनिक टीम एसडीएम निधि पटेल और नायब तहसीलदार दीपक कुमार जुरैल के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। कार्रवाई शुरू होने से पहले ही कुछ ग्रामीण निर्माण को हाथ से तोड़ने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटाकर नियंत्रण स्थापित किया। इसके बाद बुलडोजर से ढांचे को ध्वस्त किया जाने लगा।
मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कार्रवाई के दौरान भीड़ जुटने पर पुलिस ने लोगों को वहां से खदेड़ दिया।
स्थानीय प्रतिक्रिया और विवाद
कार्रवाई को लेकर गांव में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे प्रशासनिक कदम बताया, जबकि कुछ ग्रामीणों में नाराजगी भी दिखी। एक स्थानीय महिला ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकारी जमीन पर कब्जे के खिलाफ कार्रवाई हो रही है तो फिर अन्य धार्मिक स्थलों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए। इस टिप्पणी के बाद गांव में चर्चा और तेज हो गई।
प्रशासन का पक्ष
जिला अधिकारी ने बताया कि अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार की गई है। उन्होंने कहा कि ध्वस्तीकरण का खर्च भी संबंधित कब्जेदारों से वसूला जाएगा। प्रशासन का दावा है कि कार्रवाई का उद्देश्य किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना है।
फिलहाल मौके पर मलबा हटाने का काम जारी है और क्षेत्र में पुलिस बल तैनात है। प्रशासन ने साफ किया है कि भविष्य में भी सरकारी जमीनों पर हुए अवैध कब्जों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
