धर्म नहीं, राष्ट्र सर्वोपरि: भारतीय सेना की महिला अफसरों ने आतंकवाद को दिया करारा जवाब

Jagran Desk

भारत ने हाल ही में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान के भीतर आतंकी ठिकानों पर की गई मिसाइल स्ट्राइक के ज़रिए दो टूक संदेश दिया है—देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और आतंक का कोई धर्म नहीं होता।

इस कार्रवाई की जानकारी जब भारतीय सेना की दो महिला अफसरों, कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह, ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी, तो ये स्पष्ट हो गया कि भारत अब आतंकवाद को उसी की भाषा में जवाब देने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर एक संयमित और सशक्त राष्ट्र की छवि पेश कर रहा है।

कर्नल सोफिया कुरैशी, जो सेना की वरिष्ठ मुस्लिम महिला अधिकारी हैं, और विंग कमांडर व्योमिका सिंह का यह संयुक्त संबोधन कई स्तरों पर प्रतीकात्मक था। इसने केवल भारत की सैन्य शक्ति को दर्शाया, बल्कि यह भी दिखाया कि भारत में सेना, धर्म और जाति से ऊपर, राष्ट्र के प्रति समर्पण की बुनियाद पर खड़ी है।

सटीक जवाब, लेकिन संयमित रणनीति

7 मई की रात भारतीय सेना ने PoK और पाकिस्तान के आतंकी शिविरों पर लक्षित मिसाइल स्ट्राइक की। इन हमलों में लश्कर-ए-तैयबा के वो आतंकी मारे गए जो 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में धर्म पूछकर पर्यटकों की हत्या में शामिल थे। सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन शिविरों के वीडियो दिखाए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कार्रवाई सटीक और योजनाबद्ध थी।

भारत सरकार ने इस बार कोई राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं की, ही कोई बड़बोले दावे किए। सरकार, विदेश मंत्रालय और सेना ने संयम बरतते हुए केवल तथ्य प्रस्तुत किए—यही इस बार की कूटनीति का केंद्र बिंदु था।

भारत में नहीं होता धर्म के आधार पर भेदभाव

कर्नल सोफिया कुरैशी द्वारा हिंदी में दिए गए बयान और उनके आत्मविश्वास भरे अंदाज़ ने यह जताया कि भारत में मुस्लिम महिलाएं भी देश की सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। भारत की सेना, न्यायपालिका, और प्रशासन में सभी धर्मों के लोगों की समान भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि भारत एक समावेशी लोकतंत्र है।

पाकिस्तान को नहीं समझ रहा संदेश

पाकिस्तान ने अब तक भारत के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की नीति को उसकी कमजोरी समझा, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। PoK और पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से फिर से गोलीबारी और आतंकी गतिविधियों की खबरें सामने रही हैं। लाहौर, नसीराबाद और गोपाल नगर जैसे क्षेत्रों में हुए हालिया धमाके यह संकेत दे रहे हैं कि आतंकवाद अब पाकिस्तान के भीतर ही विस्फोट करने लगा है।

आतंकवाद अब खुद पाकिस्तान के लिए संकट

पाकिस्तान ने अफगान संकट के बाद जिस तरह आतंकियों को संरक्षण दिया, वह अब उसी के लिए आत्मघाती साबित हो रहा है। भारत ने वैश्विक मंच पर यह दिखा दिया है कि वह केवल अपनी रक्षा नहीं करता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति व्यवस्था में भी योगदान दे रहा है। अब आतंकवादी खुद अपने ठिकानों को नष्ट कर रहे हैं क्योंकि उन्हें समझ गया है कि भारत अब चुप नहीं बैठेगा।

व्यक्ति की पहचान धर्म नहीं, देशभक्ति होनी चाहिए

आज जब भारत की महिला सैन्य अधिकारी यह संदेश दे रही हैं कि आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई किसी धर्म के विरुद्ध नहीं, बल्कि मानवता के हत्यारों के विरुद्ध है, तब यह भी साफ होता है कि भारत की एकता उसकी विविधता में निहित है। धर्म, भाषा या जाति से परे, हर भारतीय के लिए देश सर्वोपरि है।

अंतिम सत्य: आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता

सीरिया में 12 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद अब शांति की कोशिशें हो रही हैं, जबकि पाकिस्तान में अभी भी आतंकी शिविर फल-फूल रहे हैं। ऐसे में भारत की यह कार्रवाई एक चेतावनी है—अब आतंकवाद को कहीं भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह सीमा पार हो या उसके भीतर।

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08 May 2025 By दैनिक जागरण

धर्म नहीं, राष्ट्र सर्वोपरि: भारतीय सेना की महिला अफसरों ने आतंकवाद को दिया करारा जवाब

Jagran Desk

इस कार्रवाई की जानकारी जब भारतीय सेना की दो महिला अफसरों, कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह, ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी, तो ये स्पष्ट हो गया कि भारत अब आतंकवाद को उसी की भाषा में जवाब देने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर एक संयमित और सशक्त राष्ट्र की छवि पेश कर रहा है।

कर्नल सोफिया कुरैशी, जो सेना की वरिष्ठ मुस्लिम महिला अधिकारी हैं, और विंग कमांडर व्योमिका सिंह का यह संयुक्त संबोधन कई स्तरों पर प्रतीकात्मक था। इसने केवल भारत की सैन्य शक्ति को दर्शाया, बल्कि यह भी दिखाया कि भारत में सेना, धर्म और जाति से ऊपर, राष्ट्र के प्रति समर्पण की बुनियाद पर खड़ी है।

सटीक जवाब, लेकिन संयमित रणनीति

7 मई की रात भारतीय सेना ने PoK और पाकिस्तान के आतंकी शिविरों पर लक्षित मिसाइल स्ट्राइक की। इन हमलों में लश्कर-ए-तैयबा के वो आतंकी मारे गए जो 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में धर्म पूछकर पर्यटकों की हत्या में शामिल थे। सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन शिविरों के वीडियो दिखाए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कार्रवाई सटीक और योजनाबद्ध थी।

भारत सरकार ने इस बार कोई राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं की, ही कोई बड़बोले दावे किए। सरकार, विदेश मंत्रालय और सेना ने संयम बरतते हुए केवल तथ्य प्रस्तुत किए—यही इस बार की कूटनीति का केंद्र बिंदु था।

भारत में नहीं होता धर्म के आधार पर भेदभाव

कर्नल सोफिया कुरैशी द्वारा हिंदी में दिए गए बयान और उनके आत्मविश्वास भरे अंदाज़ ने यह जताया कि भारत में मुस्लिम महिलाएं भी देश की सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। भारत की सेना, न्यायपालिका, और प्रशासन में सभी धर्मों के लोगों की समान भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि भारत एक समावेशी लोकतंत्र है।

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आतंकवाद अब खुद पाकिस्तान के लिए संकट

पाकिस्तान ने अफगान संकट के बाद जिस तरह आतंकियों को संरक्षण दिया, वह अब उसी के लिए आत्मघाती साबित हो रहा है। भारत ने वैश्विक मंच पर यह दिखा दिया है कि वह केवल अपनी रक्षा नहीं करता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति व्यवस्था में भी योगदान दे रहा है। अब आतंकवादी खुद अपने ठिकानों को नष्ट कर रहे हैं क्योंकि उन्हें समझ गया है कि भारत अब चुप नहीं बैठेगा।

व्यक्ति की पहचान धर्म नहीं, देशभक्ति होनी चाहिए

आज जब भारत की महिला सैन्य अधिकारी यह संदेश दे रही हैं कि आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई किसी धर्म के विरुद्ध नहीं, बल्कि मानवता के हत्यारों के विरुद्ध है, तब यह भी साफ होता है कि भारत की एकता उसकी विविधता में निहित है। धर्म, भाषा या जाति से परे, हर भारतीय के लिए देश सर्वोपरि है।

अंतिम सत्य: आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता

सीरिया में 12 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद अब शांति की कोशिशें हो रही हैं, जबकि पाकिस्तान में अभी भी आतंकी शिविर फल-फूल रहे हैं। ऐसे में भारत की यह कार्रवाई एक चेतावनी है—अब आतंकवाद को कहीं भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह सीमा पार हो या उसके भीतर।

https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/religion-not-religion-women-officers-of-indian-army-gave-a/article-20153

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