काला हिरण विवाद पर निर्देशक का जवाब, बोले- फिल्म किसी अभिनेता पर आधारित नहीं

बालीवुड डेस्क

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रिलीज रोकने की मांग के बीच भरत श्रीनेत ने कहा- किरदार और सलमान खान के बीच दिखाई दे रही समानताएं महज संयोग, फैसला दर्शक करेंगे

फिल्म काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी की घोषणा के बाद से शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। फिल्म को लेकर अभिनेता सलमान खान और फिल्म निर्माताओं के बीच तनातनी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल ही में सलमान खान की ओर से फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया, जिसके बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया। इसी बीच फिल्म के निर्देशक भरत एस श्रीनेत ने खुलकर अपनी बात रखी है और साफ शब्दों में कहा है कि उनकी फिल्म किसी व्यक्ति विशेष पर आधारित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सलमान खान न तो भगवान हैं और न ही ऐसे व्यक्ति जो किसी की फिल्म या करियर को रोक सकें। फिल्म को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ जब इसका पोस्टर और टीजर सामने आया। कई लोगों ने दावा किया कि फिल्म का मुख्य किरदार सलमान खान से मिलता-जुलता दिखाई देता है। इतना ही नहीं, पोस्टर में अभिनेता के हाथ में दिखाए गए ब्रेसलेट को भी सलमान खान के मशहूर फ़िरोज़ा ब्रेसलेट से जोड़कर देखा गया। सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चाएं शुरू हो गईं कि फिल्म कहीं न कहीं सलमान खान और उनके चर्चित काला हिरण शिकार मामले से प्रेरित है। इसके बाद फिल्म को लेकर बहस और तेज हो गई।

निर्देशक भरत श्रीनेत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के हाथ में ब्रेसलेट दिख जाने भर से यह नहीं माना जा सकता कि पूरा किरदार उसी पर आधारित है। उन्होंने कहा कि ब्रेसलेट कोई ऐसी चीज नहीं है जिस पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार हो। अगर किसी को लगता है कि केवल वही इसे पहन सकता है तो उसे उसका पेटेंट करवा लेना चाहिए। निर्देशक ने कहा कि फिल्म का उद्देश्य किसी अभिनेता या सार्वजनिक व्यक्ति की छवि को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि यह एक स्वतंत्र कहानी है जिसे रचनात्मक दृष्टिकोण से तैयार किया गया है। भरत श्रीनेत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता कासिम इकबाल खान को जानबूझकर सलमान खान जैसा दिखाने की कोशिश नहीं की गई है। उनके मुताबिक कासिम की शक्ल और व्यक्तित्व स्वाभाविक रूप से कुछ लोगों को सलमान की याद दिला सकते हैं, लेकिन इसके लिए किसी तरह के मेकअप, प्रोस्थेटिक्स या विशेष तकनीक का उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बायोपिक फिल्मों में कलाकारों को किसी नेता या अभिनेता जैसा दिखाने के लिए विशेष तैयारी की जाती है, लेकिन उनकी फिल्म में ऐसा कुछ नहीं किया गया।

विवाद बढ़ने के बाद सलमान खान की ओर से अदालत में याचिका दाखिल की गई। याचिका में दावा किया गया कि फिल्म उनकी अनुमति के बिना उनके जीवन से जुड़े संवेदनशील मामलों और विवादों का उपयोग करती नजर आती है। इसमें 1998 के काला हिरण शिकार मामले और हाल के वर्षों में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े घटनाक्रमों का अप्रत्यक्ष संदर्भ होने का आरोप लगाया गया। इसी आधार पर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच ने फिलहाल फिल्म पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पहले दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं को जवाब दाखिल करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को निर्धारित की गई है। अदालत के इस फैसले के बाद फिल्म की रिलीज को लेकर बनी अनिश्चितता कुछ हद तक कम हुई है, लेकिन विवाद अब भी जारी है।

इस पूरे मामले में फिल्म के निर्माता अमित जानी भी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें पिछले दो वर्षों से लगातार धमकियां मिल रही हैं। उनका आरोप है कि विभिन्न नंबरों से उन्हें फोन और संदेश भेजे जा रहे हैं, जिनमें फिल्म छोड़ने और रिलीज रोकने की चेतावनी दी जा रही है। उन्होंने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और मामले की जांच की मांग की है। अमित जानी का कहना है कि वह ऐसे विषयों पर फिल्में बनाते हैं जो समाज और समकालीन घटनाओं से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि एक फिल्म निर्माता के तौर पर उन्हें अपनी बात कहने और अपनी कहानियां दर्शकों तक पहुंचाने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माण में कई लोगों की मेहनत और समय लगता है, ऐसे में रिलीज से पहले विवाद खड़ा होना पूरी टीम के लिए निराशाजनक है।

उधर सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर बहस जारी है। कुछ लोग फिल्म निर्माताओं के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सलमान खान के समर्थकों का कहना है कि यदि किसी फिल्म में किसी व्यक्ति की पहचान या उससे जुड़े मामलों का उपयोग किया जा रहा है तो उसकी सहमति जरूरी होनी चाहिए। दोनों पक्षों के समर्थक अपने-अपने तर्क रख रहे हैं, जिससे यह विवाद और ज्यादा चर्चा में आ गया है। इस तरह के विवाद नई बात नहीं हैं। अतीत में भी कई फिल्मों को लेकर कानूनी आपत्तियां और सार्वजनिक बहस देखने को मिली हैं। 

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20 Jun 2026 By Vaishnavi.J

काला हिरण विवाद पर निर्देशक का जवाब, बोले- फिल्म किसी अभिनेता पर आधारित नहीं

बालीवुड डेस्क

फिल्म काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी की घोषणा के बाद से शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। फिल्म को लेकर अभिनेता सलमान खान और फिल्म निर्माताओं के बीच तनातनी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल ही में सलमान खान की ओर से फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया, जिसके बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया। इसी बीच फिल्म के निर्देशक भरत एस श्रीनेत ने खुलकर अपनी बात रखी है और साफ शब्दों में कहा है कि उनकी फिल्म किसी व्यक्ति विशेष पर आधारित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सलमान खान न तो भगवान हैं और न ही ऐसे व्यक्ति जो किसी की फिल्म या करियर को रोक सकें। फिल्म को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ जब इसका पोस्टर और टीजर सामने आया। कई लोगों ने दावा किया कि फिल्म का मुख्य किरदार सलमान खान से मिलता-जुलता दिखाई देता है। इतना ही नहीं, पोस्टर में अभिनेता के हाथ में दिखाए गए ब्रेसलेट को भी सलमान खान के मशहूर फ़िरोज़ा ब्रेसलेट से जोड़कर देखा गया। सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चाएं शुरू हो गईं कि फिल्म कहीं न कहीं सलमान खान और उनके चर्चित काला हिरण शिकार मामले से प्रेरित है। इसके बाद फिल्म को लेकर बहस और तेज हो गई।

निर्देशक भरत श्रीनेत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के हाथ में ब्रेसलेट दिख जाने भर से यह नहीं माना जा सकता कि पूरा किरदार उसी पर आधारित है। उन्होंने कहा कि ब्रेसलेट कोई ऐसी चीज नहीं है जिस पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार हो। अगर किसी को लगता है कि केवल वही इसे पहन सकता है तो उसे उसका पेटेंट करवा लेना चाहिए। निर्देशक ने कहा कि फिल्म का उद्देश्य किसी अभिनेता या सार्वजनिक व्यक्ति की छवि को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि यह एक स्वतंत्र कहानी है जिसे रचनात्मक दृष्टिकोण से तैयार किया गया है। भरत श्रीनेत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता कासिम इकबाल खान को जानबूझकर सलमान खान जैसा दिखाने की कोशिश नहीं की गई है। उनके मुताबिक कासिम की शक्ल और व्यक्तित्व स्वाभाविक रूप से कुछ लोगों को सलमान की याद दिला सकते हैं, लेकिन इसके लिए किसी तरह के मेकअप, प्रोस्थेटिक्स या विशेष तकनीक का उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बायोपिक फिल्मों में कलाकारों को किसी नेता या अभिनेता जैसा दिखाने के लिए विशेष तैयारी की जाती है, लेकिन उनकी फिल्म में ऐसा कुछ नहीं किया गया।

विवाद बढ़ने के बाद सलमान खान की ओर से अदालत में याचिका दाखिल की गई। याचिका में दावा किया गया कि फिल्म उनकी अनुमति के बिना उनके जीवन से जुड़े संवेदनशील मामलों और विवादों का उपयोग करती नजर आती है। इसमें 1998 के काला हिरण शिकार मामले और हाल के वर्षों में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े घटनाक्रमों का अप्रत्यक्ष संदर्भ होने का आरोप लगाया गया। इसी आधार पर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच ने फिलहाल फिल्म पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पहले दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं को जवाब दाखिल करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को निर्धारित की गई है। अदालत के इस फैसले के बाद फिल्म की रिलीज को लेकर बनी अनिश्चितता कुछ हद तक कम हुई है, लेकिन विवाद अब भी जारी है।

इस पूरे मामले में फिल्म के निर्माता अमित जानी भी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें पिछले दो वर्षों से लगातार धमकियां मिल रही हैं। उनका आरोप है कि विभिन्न नंबरों से उन्हें फोन और संदेश भेजे जा रहे हैं, जिनमें फिल्म छोड़ने और रिलीज रोकने की चेतावनी दी जा रही है। उन्होंने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और मामले की जांच की मांग की है। अमित जानी का कहना है कि वह ऐसे विषयों पर फिल्में बनाते हैं जो समाज और समकालीन घटनाओं से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि एक फिल्म निर्माता के तौर पर उन्हें अपनी बात कहने और अपनी कहानियां दर्शकों तक पहुंचाने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माण में कई लोगों की मेहनत और समय लगता है, ऐसे में रिलीज से पहले विवाद खड़ा होना पूरी टीम के लिए निराशाजनक है।

उधर सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर बहस जारी है। कुछ लोग फिल्म निर्माताओं के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सलमान खान के समर्थकों का कहना है कि यदि किसी फिल्म में किसी व्यक्ति की पहचान या उससे जुड़े मामलों का उपयोग किया जा रहा है तो उसकी सहमति जरूरी होनी चाहिए। दोनों पक्षों के समर्थक अपने-अपने तर्क रख रहे हैं, जिससे यह विवाद और ज्यादा चर्चा में आ गया है। इस तरह के विवाद नई बात नहीं हैं। अतीत में भी कई फिल्मों को लेकर कानूनी आपत्तियां और सार्वजनिक बहस देखने को मिली हैं। 

https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/directors-response-to-black-deer-controversy-the-film-is-not/article-56504

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