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विश्व कप में अमेरिका का कमाल, ऑस्ट्रेलिया को हराकर नॉकआउट में पहुंचा
स्पोर्ट्स डेस्क
32 साल बाद अंतिम-32 में बनाई जगह, पैराग्वे की जीत से तुर्की टूर्नामेंट से बाहर
अमेरिका ने फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए 32 साल बाद नॉकआउट राउंड में अपनी जगह पक्की कर ली है। मेजबान टीम ने ग्रुप-डी के मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराकर लगातार दूसरी जीत दर्ज की। इस जीत के साथ अमेरिका के छह अंक हो गए हैं और वह ग्रुप में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, इसी ग्रुप के दूसरे मुकाबले में पैराग्वे ने तुर्की को 1-0 से हराकर अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा, जबकि तुर्की लगातार दूसरी हार के बाद टूर्नामेंट से बाहर हो गया। अमेरिका की इस उपलब्धि को खास माना जा रहा है क्योंकि टीम ने 1994 के बाद पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में प्रवेश किया है। घरेलू दर्शकों के सामने खेल रही अमेरिकी टीम का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता नजर आ रहा है और अब उसे आगे के मुकाबलों के लिए मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है। सिएटल स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में अमेरिका अपने स्टार फॉरवर्ड क्रिश्चियन पुलिसिक के बिना मैदान पर उतरा था। पुलिसिक पिंडली की चोट के कारण इस मैच का हिस्सा नहीं बन सके थे। मैच से पहले माना जा रहा था कि उनकी गैरमौजूदगी टीम के प्रदर्शन पर असर डाल सकती है, लेकिन अमेरिकी खिलाड़ियों ने शानदार सामूहिक खेल दिखाकर यह चिंता खत्म कर दी। शुरुआत से ही अमेरिका ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और ऑस्ट्रेलिया के डिफेंस पर दबाव बनाया। मैच के 11वें मिनट में अमेरिका को बढ़त मिली। फोलारिन बालोगुन ने बॉक्स के अंदर खतरनाक क्रॉस भेजा, जिसे रोकने की कोशिश में ऑस्ट्रेलियाई डिफेंडर कैमरून बर्गेस से गलती हो गई। गेंद उनके ही गोल में चली गई और अमेरिका को 1-0 की बढ़त मिल गई। यह आत्मघाती गोल ऑस्ट्रेलिया के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। गोल खाने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने वापसी की कोशिश शुरू की, लेकिन अमेरिकी डिफेंस ने उन्हें ज्यादा मौके नहीं दिए। अमेरिकी मिडफील्ड ने खेल की रफ्तार अपने नियंत्रण में रखी और लगातार आक्रमण जारी रखा। पहले हाफ के अंतिम मिनटों में अमेरिका ने अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। 43वें मिनट में सिर्जिनो डेस्ट का प्रयास डिफ्लेक्ट होकर एलेक्स फ्रीमैन तक पहुंचा। फ्रीमैन ने बेहतरीन हेडर लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। शुरुआत में ऑफसाइड और अन्य तकनीकी पहलुओं को लेकर वीडियो रिव्यू किया गया, लेकिन बाद में गोल को मान्यता दे दी गई। 21 वर्षीय एलेक्स फ्रीमैन का यह विश्व कप में पहला गोल था और उन्होंने इसे बेहद यादगार बना दिया। गोल के बाद अमेरिकी दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और टीम 2-0 की मजबूत बढ़त के साथ हाफ टाइम में गई।
दूसरे हाफ में ऑस्ट्रेलिया ने आक्रामक रवैया अपनाया। टीम ने कई बार अमेरिकी गोलपोस्ट की ओर हमले किए, लेकिन अंतिम क्षणों में उसके खिलाड़ी मौके भुनाने में सफल नहीं हो सके। अमेरिकी गोलकीपर और रक्षापंक्ति ने संयम बनाए रखा और कोई बड़ी गलती नहीं की। मैच आगे बढ़ने के साथ अमेरिका ने भी जवाबी हमले किए, लेकिन स्कोरलाइन में कोई बदलाव नहीं हुआ। अंततः अमेरिका ने 2-0 की जीत दर्ज की और नॉकआउट चरण का टिकट हासिल कर लिया। इस जीत ने टीम का मनोबल काफी बढ़ाया है। पहले मुकाबले में अमेरिका ने पैराग्वे को 4-1 से हराया था और अब लगातार दो जीत के साथ उसने ग्रुप-डी में अपना दबदबा कायम कर लिया है। ग्रुप-डी के दूसरे मुकाबले में पैराग्वे और तुर्की के बीच रोमांचक संघर्ष देखने को मिला। सांता क्लारा में खेले गए इस मैच की शुरुआत बेहद तेज रही। पैराग्वे ने मैच शुरू होने के महज 64 सेकेंड के भीतर गोल दागकर सबको चौंका दिया। एंड्रेस क्यूबास ने शानदार तरीके से गेंद छीनी और उसे जूलियो एनसिसो को पास किया। एनसिसो ने तुरंत माटियास गलार्सा के लिए मौका बनाया और गलार्सा ने बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाकर गेंद को नेट में पहुंचा दिया। यह गोल टूर्नामेंट का अब तक का सबसे तेज गोल बन गया। शुरुआती बढ़त मिलने के बाद पैराग्वे ने रक्षात्मक रणनीति अपनाई और तुर्की को दबाव में रखने की कोशिश की। तुर्की ने गोल खाने के बाद लगातार आक्रमण किए। टीम ने कई अच्छे मूव बनाए और कुछ मौकों पर बराबरी के बेहद करीब पहुंच गई। मर्ट मुल्दुर का एक शानदार हेडर पोस्ट और क्रॉसबार से टकराकर बाहर चला गया, जिसने तुर्की के समर्थकों को निराश कर दिया। पहले हाफ के इंजरी टाइम में मैच ने नया मोड़ लिया जब पैराग्वे के मिगुएल अल्मिरोन को रेड कार्ड दिखा दिया गया। विवाद के दौरान नए नियमों के उल्लंघन के कारण उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा। इसके बाद पैराग्वे को लगभग पूरा दूसरा हाफ दस खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद पैराग्वे ने शानदार अनुशासन दिखाया। उसकी रक्षापंक्ति लगातार तुर्की के हमलों को रोकती रही। तुर्की ने बराबरी के लिए पूरी ताकत लगा दी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। मैच के अंतिम मिनटों में भी तुर्की ने कई प्रयास किए, मगर पैराग्वे के खिलाड़ियों ने बढ़त बरकरार रखी। आखिरकार मैच 1-0 के स्कोर पर समाप्त हुआ और पैराग्वे ने महत्वपूर्ण तीन अंक हासिल कर लिए। इस परिणाम के बाद ग्रुप-डी की स्थिति बेहद दिलचस्प हो गई है। अमेरिका छह अंकों के साथ शीर्ष पर है और नॉकआउट में पहुंच चुका है। ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के तीन-तीन अंक हैं, जबकि तुर्की बिना किसी अंक के टूर्नामेंट से बाहर हो गया है। अब ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के बीच होने वाला अंतिम ग्रुप मुकाबला तय करेगा कि अमेरिका के साथ अगले दौर में कौन सी टीम पहुंचेगी।
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विश्व कप में अमेरिका का कमाल, ऑस्ट्रेलिया को हराकर नॉकआउट में पहुंचा
स्पोर्ट्स डेस्क
अमेरिका ने फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए 32 साल बाद नॉकआउट राउंड में अपनी जगह पक्की कर ली है। मेजबान टीम ने ग्रुप-डी के मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराकर लगातार दूसरी जीत दर्ज की। इस जीत के साथ अमेरिका के छह अंक हो गए हैं और वह ग्रुप में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, इसी ग्रुप के दूसरे मुकाबले में पैराग्वे ने तुर्की को 1-0 से हराकर अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा, जबकि तुर्की लगातार दूसरी हार के बाद टूर्नामेंट से बाहर हो गया। अमेरिका की इस उपलब्धि को खास माना जा रहा है क्योंकि टीम ने 1994 के बाद पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में प्रवेश किया है। घरेलू दर्शकों के सामने खेल रही अमेरिकी टीम का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता नजर आ रहा है और अब उसे आगे के मुकाबलों के लिए मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है। सिएटल स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में अमेरिका अपने स्टार फॉरवर्ड क्रिश्चियन पुलिसिक के बिना मैदान पर उतरा था। पुलिसिक पिंडली की चोट के कारण इस मैच का हिस्सा नहीं बन सके थे। मैच से पहले माना जा रहा था कि उनकी गैरमौजूदगी टीम के प्रदर्शन पर असर डाल सकती है, लेकिन अमेरिकी खिलाड़ियों ने शानदार सामूहिक खेल दिखाकर यह चिंता खत्म कर दी। शुरुआत से ही अमेरिका ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और ऑस्ट्रेलिया के डिफेंस पर दबाव बनाया। मैच के 11वें मिनट में अमेरिका को बढ़त मिली। फोलारिन बालोगुन ने बॉक्स के अंदर खतरनाक क्रॉस भेजा, जिसे रोकने की कोशिश में ऑस्ट्रेलियाई डिफेंडर कैमरून बर्गेस से गलती हो गई। गेंद उनके ही गोल में चली गई और अमेरिका को 1-0 की बढ़त मिल गई। यह आत्मघाती गोल ऑस्ट्रेलिया के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। गोल खाने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने वापसी की कोशिश शुरू की, लेकिन अमेरिकी डिफेंस ने उन्हें ज्यादा मौके नहीं दिए। अमेरिकी मिडफील्ड ने खेल की रफ्तार अपने नियंत्रण में रखी और लगातार आक्रमण जारी रखा। पहले हाफ के अंतिम मिनटों में अमेरिका ने अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। 43वें मिनट में सिर्जिनो डेस्ट का प्रयास डिफ्लेक्ट होकर एलेक्स फ्रीमैन तक पहुंचा। फ्रीमैन ने बेहतरीन हेडर लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। शुरुआत में ऑफसाइड और अन्य तकनीकी पहलुओं को लेकर वीडियो रिव्यू किया गया, लेकिन बाद में गोल को मान्यता दे दी गई। 21 वर्षीय एलेक्स फ्रीमैन का यह विश्व कप में पहला गोल था और उन्होंने इसे बेहद यादगार बना दिया। गोल के बाद अमेरिकी दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और टीम 2-0 की मजबूत बढ़त के साथ हाफ टाइम में गई।
दूसरे हाफ में ऑस्ट्रेलिया ने आक्रामक रवैया अपनाया। टीम ने कई बार अमेरिकी गोलपोस्ट की ओर हमले किए, लेकिन अंतिम क्षणों में उसके खिलाड़ी मौके भुनाने में सफल नहीं हो सके। अमेरिकी गोलकीपर और रक्षापंक्ति ने संयम बनाए रखा और कोई बड़ी गलती नहीं की। मैच आगे बढ़ने के साथ अमेरिका ने भी जवाबी हमले किए, लेकिन स्कोरलाइन में कोई बदलाव नहीं हुआ। अंततः अमेरिका ने 2-0 की जीत दर्ज की और नॉकआउट चरण का टिकट हासिल कर लिया। इस जीत ने टीम का मनोबल काफी बढ़ाया है। पहले मुकाबले में अमेरिका ने पैराग्वे को 4-1 से हराया था और अब लगातार दो जीत के साथ उसने ग्रुप-डी में अपना दबदबा कायम कर लिया है। ग्रुप-डी के दूसरे मुकाबले में पैराग्वे और तुर्की के बीच रोमांचक संघर्ष देखने को मिला। सांता क्लारा में खेले गए इस मैच की शुरुआत बेहद तेज रही। पैराग्वे ने मैच शुरू होने के महज 64 सेकेंड के भीतर गोल दागकर सबको चौंका दिया। एंड्रेस क्यूबास ने शानदार तरीके से गेंद छीनी और उसे जूलियो एनसिसो को पास किया। एनसिसो ने तुरंत माटियास गलार्सा के लिए मौका बनाया और गलार्सा ने बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाकर गेंद को नेट में पहुंचा दिया। यह गोल टूर्नामेंट का अब तक का सबसे तेज गोल बन गया। शुरुआती बढ़त मिलने के बाद पैराग्वे ने रक्षात्मक रणनीति अपनाई और तुर्की को दबाव में रखने की कोशिश की। तुर्की ने गोल खाने के बाद लगातार आक्रमण किए। टीम ने कई अच्छे मूव बनाए और कुछ मौकों पर बराबरी के बेहद करीब पहुंच गई। मर्ट मुल्दुर का एक शानदार हेडर पोस्ट और क्रॉसबार से टकराकर बाहर चला गया, जिसने तुर्की के समर्थकों को निराश कर दिया। पहले हाफ के इंजरी टाइम में मैच ने नया मोड़ लिया जब पैराग्वे के मिगुएल अल्मिरोन को रेड कार्ड दिखा दिया गया। विवाद के दौरान नए नियमों के उल्लंघन के कारण उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा। इसके बाद पैराग्वे को लगभग पूरा दूसरा हाफ दस खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद पैराग्वे ने शानदार अनुशासन दिखाया। उसकी रक्षापंक्ति लगातार तुर्की के हमलों को रोकती रही। तुर्की ने बराबरी के लिए पूरी ताकत लगा दी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। मैच के अंतिम मिनटों में भी तुर्की ने कई प्रयास किए, मगर पैराग्वे के खिलाड़ियों ने बढ़त बरकरार रखी। आखिरकार मैच 1-0 के स्कोर पर समाप्त हुआ और पैराग्वे ने महत्वपूर्ण तीन अंक हासिल कर लिए। इस परिणाम के बाद ग्रुप-डी की स्थिति बेहद दिलचस्प हो गई है। अमेरिका छह अंकों के साथ शीर्ष पर है और नॉकआउट में पहुंच चुका है। ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के तीन-तीन अंक हैं, जबकि तुर्की बिना किसी अंक के टूर्नामेंट से बाहर हो गया है। अब ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के बीच होने वाला अंतिम ग्रुप मुकाबला तय करेगा कि अमेरिका के साथ अगले दौर में कौन सी टीम पहुंचेगी।
