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62 शॉट, फिर भी नहीं हुआ एक गोल; तुर्किये वर्ल्ड कप से बाहर
स्पोर्ट्स डेस्क
ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के खिलाफ कुल 62 शॉट लगाए, लेकिन एक भी गोल नहीं कर सकी टीम; कोच मोंटेला भी रहे हैरान
वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया।
टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई। पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है। शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।
दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।
वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई।
पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है। शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।
दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।
मुख्य कोच विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। यही कमी अंततः तुर्किये के वर्ल्ड कप अभियान का अंत बन गई। विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी।
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62 शॉट, फिर भी नहीं हुआ एक गोल; तुर्किये वर्ल्ड कप से बाहर
स्पोर्ट्स डेस्क
वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया।
टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई। पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है। शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।
दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।
वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई।
पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है। शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।
दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।
मुख्य कोच विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। यही कमी अंततः तुर्किये के वर्ल्ड कप अभियान का अंत बन गई। विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी।
