ढलती उम्र में सेहत का हमसफ़र: योग और बढ़ती उम्र का विज्ञान

आकांक्षा शर्मा, योग विशेषज्ञ

ढलती उम्र में स्वस्थ रहने के लिए योग के वैज्ञानिक लाभ। बुजुर्गों के लिए सुरक्षित आसन, चेयर योग और प्राणायाम की प्रामाणिक जानकारी।

बढ़ती उम्र के जैविक बदलाव और चुनौतियां

समय का पहिया अपनी गति से चलता रहता है, और इसके साथ ही मानव शरीर भी विभिन्न जैविक और शारीरिक बदलावों के दौर से गुजरता है। उम्र बढ़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन समकालीन जीवनशैली में 'हेल्दी एजिंग' (स्वस्थ बुढ़ापा) एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

चिकित्सीय विज्ञान के अनुसार, 60 की उम्र पार करते ही शरीर में कई तरह के संरचनात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। हड्डियों की सघनता कम होने से ऑस्टियोपोरोसिस और मांसपेशियों के कमजोर होने से सार्कोपेनिया का खतरा बढ़ जाता है, जिससे शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है। इसके अतिरिक्त, जोड़ों का लुब्रिकेंट (साइनोवियल फ्लूइड) कम होने से जोड़ों में अकड़न और दर्द की समस्या आम हो जाती है।

बुजुर्गों के लिए योग क्यों है सबसे सुरक्षित?

अक्सर यह सवाल उठता है कि जिम या भारी एक्सरसाइज के मुकाबले बुजुर्गों के लिए योग क्यों बेहतर है? जमीनी हकीकत और विशेषज्ञों के इनपुट्स बताते हैं कि योग एक 'लो-इम्पैक्ट' (कम दबाव वाली) शारीरिक गतिविधि है। यह जोड़ों पर अतिरिक्त मानसिक या शारीरिक दबाव डाले बिना मांसपेशियों को टोन करता है।

योग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लचीलापन है। इसे किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति अपनी शारीरिक क्षमता और सीमाओं के अनुसार आसानी से मॉडिफाई (परिवर्तित) कर सकता है। यही कारण है कि इसे वरिष्ठ नागरिकों की शारीरिक सुरक्षा के लिहाज से सबसे अचूक माना गया है।

संतुलन और दर्द निवारण में मुख्य लाभ

नियमित योगाभ्यास से वरिष्ठ नागरिकों के शरीर में रक्त का संचार सुधरता है, जिससे हृदय की कार्यप्रणाली बेहतर होती है। आसनों के माध्यम से फेफड़ों तक प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है, जो अनिद्रा (इंसोमनिया) जैसी समस्याओं को दूर कर गहरी नींद लाने में सहायक है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग के प्राथमिक लाभ:  ┌──────────────────────────┬────────────────────────────────────────────────┐  │ लाभ का क्षेत्र            │ मुख्य प्रभाव                                    │  ├──────────────────────────┼────────────────────────────────────────────────┤  │ शारीरिक संतुलन           │ मांसपेशियों की ताकत बढ़ाना, गिरने से बचाव       │  │ सर्कुलेटरी सिस्टम        │ बेहतर रक्त संचार, हृदय स्वास्थ्य में सुधार       │  │ न्यूरोलॉजिकल लाभ         │ मानसिक शांति, अनिद्रा और तनाव से मुक्ति        │  │ मस्कुलोस्केलेटल          │ जोड़ों की अकड़न दूर करना, लचीलेपन में वृद्धि   │  └──────────────────────────┴────────────────────────────────────────────────┘  

शारीरिक लाभ के साथ-साथ यह बढ़ती उम्र में अकेलेपन, काम से सेवानिवृत्ति और निर्भरता के कारण उपजने वाले मानसिक अवसाद या एंग्जायटी (चिंता) को कम करने का भी सबसे प्रभावी माध्यम है।

सुरक्षित और उपयोगी आसनों की श्रृंखला

वरिष्ठ नागरिकों को हमेशा हल्के और नियंत्रित स्ट्रेचिंग वाले आसनों से शुरुआत करनी चाहिए। शुरुआती दौर के लिए निम्नलिखित चार आसन सबसे ज्यादा कारगर और सुरक्षित माने गए हैं:

  • ताड़ासन (Mountain Pose): सीधे खड़े होकर हाथों को ऊपर खींचने से रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है और शरीर का पोस्चर सुधरता है। संतुलन न बनने पर एड़ियों को जमीन पर ही रखना चाहिए।

  • कटिचक्रासन (Standing Spinal Twist): कमर को दोनों ओर धीरे-धीरे घुमाने से पीठ और रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बना रहता है।

  • भद्रासन (Butterfly Pose): जमीन पर बैठकर पैरों के तलवों को मिलाकर घुटनों को हिलाने से कूल्हों और जांघों के जोड़ खुलते हैं, जिससे चलने-फिरने में सुगमता आती है।

  • मार्जरी आसन (Cat-Cow Stretch): घुटनों और हाथों के बल बिल्ली की मुद्रा में आकर पीठ को ऊपर-नीचे करने से पीठ के निचले हिस्से (लोअर बैक) के दर्द में तुरंत राहत मिलती है।

चेयर योग और प्राणायाम का महत्व

जो बुजुर्ग घुटनों के अत्यधिक दर्द या शारीरिक कमजोरी के कारण जमीन पर बैठने में असमर्थ हैं, उनके लिए 'चेयर योग' (कुर्सी पर बैठकर किया जाने वाला योग) एक बेहतरीन विकल्प है। कुर्सी पर बैठकर गर्दन घुमाना, हल्के ट्विस्ट करना और हाथों को ऊपर खींचना भी समान रूप से लाभकारी है।

शारीरिक आसनों के अलावा प्राणायाम श्वसन तंत्र को मजबूत करने की चाबी है। अनुलोम-विलोम के नियमित अभ्यास से नाड़ियों का शुद्धिकरण होता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। वहीं, भ्रामरी प्राणायाम (मस्तिष्क में 'ॐ' के मकार का गुंजन) दिमागी नसों को शांत कर तनाव को तुरंत कम करता है।

योगाभ्यास के दौरान बरतने वाली सावधानियां

स्थानीय योग गुरुओं और डॉक्टरों के अनुसार, बुजुर्गों को योग करते समय 'स्थिरं सुखम् आसनम्' के सिद्धांत का पालन करना चाहिए। शरीर के साथ किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या झटके देने से बचना चाहिए।

यदि हाल ही में कोई बड़ी सर्जरी हुई हो, या व्यक्ति गंभीर हर्निया, हाई ब्लड प्रेशर अथवा स्लिप डिस्क की समस्या से ग्रसित हो, तो उन्हें चिकित्सकीय सलाह और एक योग्य योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही योगाभ्यास की शुरुआत करनी चाहिए। उम्र महज एक संख्या है; यदि सही मार्गदर्शन में योग को जीवन में शामिल किया जाए, तो जीवन का उत्तरार्ध आत्मनिर्भर और ऊर्जावान बनाया जा सकता है।

 

 

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20 Jun 2026 By दैनिक जागरण

ढलती उम्र में सेहत का हमसफ़र: योग और बढ़ती उम्र का विज्ञान

आकांक्षा शर्मा, योग विशेषज्ञ

बढ़ती उम्र के जैविक बदलाव और चुनौतियां

समय का पहिया अपनी गति से चलता रहता है, और इसके साथ ही मानव शरीर भी विभिन्न जैविक और शारीरिक बदलावों के दौर से गुजरता है। उम्र बढ़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन समकालीन जीवनशैली में 'हेल्दी एजिंग' (स्वस्थ बुढ़ापा) एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

चिकित्सीय विज्ञान के अनुसार, 60 की उम्र पार करते ही शरीर में कई तरह के संरचनात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। हड्डियों की सघनता कम होने से ऑस्टियोपोरोसिस और मांसपेशियों के कमजोर होने से सार्कोपेनिया का खतरा बढ़ जाता है, जिससे शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है। इसके अतिरिक्त, जोड़ों का लुब्रिकेंट (साइनोवियल फ्लूइड) कम होने से जोड़ों में अकड़न और दर्द की समस्या आम हो जाती है।

बुजुर्गों के लिए योग क्यों है सबसे सुरक्षित?

अक्सर यह सवाल उठता है कि जिम या भारी एक्सरसाइज के मुकाबले बुजुर्गों के लिए योग क्यों बेहतर है? जमीनी हकीकत और विशेषज्ञों के इनपुट्स बताते हैं कि योग एक 'लो-इम्पैक्ट' (कम दबाव वाली) शारीरिक गतिविधि है। यह जोड़ों पर अतिरिक्त मानसिक या शारीरिक दबाव डाले बिना मांसपेशियों को टोन करता है।

योग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लचीलापन है। इसे किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति अपनी शारीरिक क्षमता और सीमाओं के अनुसार आसानी से मॉडिफाई (परिवर्तित) कर सकता है। यही कारण है कि इसे वरिष्ठ नागरिकों की शारीरिक सुरक्षा के लिहाज से सबसे अचूक माना गया है।

संतुलन और दर्द निवारण में मुख्य लाभ

नियमित योगाभ्यास से वरिष्ठ नागरिकों के शरीर में रक्त का संचार सुधरता है, जिससे हृदय की कार्यप्रणाली बेहतर होती है। आसनों के माध्यम से फेफड़ों तक प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है, जो अनिद्रा (इंसोमनिया) जैसी समस्याओं को दूर कर गहरी नींद लाने में सहायक है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग के प्राथमिक लाभ:  ┌──────────────────────────┬────────────────────────────────────────────────┐  │ लाभ का क्षेत्र            │ मुख्य प्रभाव                                    │  ├──────────────────────────┼────────────────────────────────────────────────┤  │ शारीरिक संतुलन           │ मांसपेशियों की ताकत बढ़ाना, गिरने से बचाव       │  │ सर्कुलेटरी सिस्टम        │ बेहतर रक्त संचार, हृदय स्वास्थ्य में सुधार       │  │ न्यूरोलॉजिकल लाभ         │ मानसिक शांति, अनिद्रा और तनाव से मुक्ति        │  │ मस्कुलोस्केलेटल          │ जोड़ों की अकड़न दूर करना, लचीलेपन में वृद्धि   │  └──────────────────────────┴────────────────────────────────────────────────┘  

शारीरिक लाभ के साथ-साथ यह बढ़ती उम्र में अकेलेपन, काम से सेवानिवृत्ति और निर्भरता के कारण उपजने वाले मानसिक अवसाद या एंग्जायटी (चिंता) को कम करने का भी सबसे प्रभावी माध्यम है।

सुरक्षित और उपयोगी आसनों की श्रृंखला

वरिष्ठ नागरिकों को हमेशा हल्के और नियंत्रित स्ट्रेचिंग वाले आसनों से शुरुआत करनी चाहिए। शुरुआती दौर के लिए निम्नलिखित चार आसन सबसे ज्यादा कारगर और सुरक्षित माने गए हैं:

  • ताड़ासन (Mountain Pose): सीधे खड़े होकर हाथों को ऊपर खींचने से रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है और शरीर का पोस्चर सुधरता है। संतुलन न बनने पर एड़ियों को जमीन पर ही रखना चाहिए।

  • कटिचक्रासन (Standing Spinal Twist): कमर को दोनों ओर धीरे-धीरे घुमाने से पीठ और रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बना रहता है।

  • भद्रासन (Butterfly Pose): जमीन पर बैठकर पैरों के तलवों को मिलाकर घुटनों को हिलाने से कूल्हों और जांघों के जोड़ खुलते हैं, जिससे चलने-फिरने में सुगमता आती है।

  • मार्जरी आसन (Cat-Cow Stretch): घुटनों और हाथों के बल बिल्ली की मुद्रा में आकर पीठ को ऊपर-नीचे करने से पीठ के निचले हिस्से (लोअर बैक) के दर्द में तुरंत राहत मिलती है।

चेयर योग और प्राणायाम का महत्व

जो बुजुर्ग घुटनों के अत्यधिक दर्द या शारीरिक कमजोरी के कारण जमीन पर बैठने में असमर्थ हैं, उनके लिए 'चेयर योग' (कुर्सी पर बैठकर किया जाने वाला योग) एक बेहतरीन विकल्प है। कुर्सी पर बैठकर गर्दन घुमाना, हल्के ट्विस्ट करना और हाथों को ऊपर खींचना भी समान रूप से लाभकारी है।

शारीरिक आसनों के अलावा प्राणायाम श्वसन तंत्र को मजबूत करने की चाबी है। अनुलोम-विलोम के नियमित अभ्यास से नाड़ियों का शुद्धिकरण होता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। वहीं, भ्रामरी प्राणायाम (मस्तिष्क में 'ॐ' के मकार का गुंजन) दिमागी नसों को शांत कर तनाव को तुरंत कम करता है।

योगाभ्यास के दौरान बरतने वाली सावधानियां

स्थानीय योग गुरुओं और डॉक्टरों के अनुसार, बुजुर्गों को योग करते समय 'स्थिरं सुखम् आसनम्' के सिद्धांत का पालन करना चाहिए। शरीर के साथ किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या झटके देने से बचना चाहिए।

यदि हाल ही में कोई बड़ी सर्जरी हुई हो, या व्यक्ति गंभीर हर्निया, हाई ब्लड प्रेशर अथवा स्लिप डिस्क की समस्या से ग्रसित हो, तो उन्हें चिकित्सकीय सलाह और एक योग्य योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही योगाभ्यास की शुरुआत करनी चाहिए। उम्र महज एक संख्या है; यदि सही मार्गदर्शन में योग को जीवन में शामिल किया जाए, तो जीवन का उत्तरार्ध आत्मनिर्भर और ऊर्जावान बनाया जा सकता है।

 

 

https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/yoga-the-companion-of-health-in-old-age-and-the/article-56514

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