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रौशनी श्रीवास्तव ने स्थानीय बालिका आश्रय गृह में ‘कालिका’ की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की; मानसिक शोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल
Bollywood
एक बेहद जज्बाती और प्रभावशाली पहल के तहत अभिनेत्री रौशनी श्रीवास्तव ने हाल ही में एक स्थानीय बालिका आश्रय गृह में अपनी फिल्म “कालिका” की विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मानसिक शोषण (मेंटल एब्यूज़) जैसे अक्सर अनदेखे रह जाने वाले गंभीर मुद्दे पर जागरूकता फैलाना और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत शुरू करना था।
फिल्म में राजा गुरु, सार कश्यप और स्वयं रौशनी श्रीवास्तव ने महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। निर्माता निम्मी श्रीवास्तव द्वारा निर्मित “कालिका” रौशनी के लिए एक बेहद खास प्रोजेक्ट है, जिसे उन्होंने अपने दिवंगत पिता श्री एस.के. श्रीवास्तव के नाम समर्पित किया है।
यह स्क्रीनिंग न सिर्फ उद्देश्य से भरी रही, बल्कि भावनात्मक रूप से भी बेहद प्रभावशाली साबित हुई। उपस्थित लड़कियां फिल्म की कहानी से गहराई से जुड़ गईं और उन्हें यह समझने में मदद मिली कि मानसिक शोषण (Mental Abuse) वास्तव में क्या होता है—एक ऐसा विषय जिसे अक्सर गलत समझा जाता है या नजरअंदाज कर दिया जाता है।
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फिल्म की मजबूत कहानी के माध्यम से दर्शकों ने यह जाना कि मानसिक और भावनात्मक रूप से परेशान करना किसी व्यक्ति को किस हद तक प्रभावित कर सकता है, यहाँ तक कि उसे आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाने की स्थिति तक पहुँचा सकता है। इस संवेदनशील बहुत जरूरी विषय को सामने लाकर फिल्म ने लड़कियों को भावनात्मक प्रहार को पहचानने और उससे मुकाबला करने की समझ दी।
“मानसिक शोषण वो ज़ख्म है जो नज़र नहीं आता। अगर हम युवाओं को इसे पहचानना सिखा दें, तो बचाव की राह वहीं से खुल जाएगी।"
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में आश्रय गृह के मैनेजमेंट का महत्वपूर्ण योगदान रहा। रौशनी ने विशेष रूप से सिस्टर रीटा के प्रति अपना आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह स्क्रीनिंग संभव हो सकी। सिस्टर रीटा ने भी रौशनी के इस उद्देश्य को सपोर्ट करते हुए कहा कि ऐसी असहाय लडकियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता मिलनी चाहिए।"
इस सार्थक पहल के माध्यम से “कालिका” केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि जागरूकता की एक प्रेरणादायक मशाल बनकर उभरी है, जो संवेदनशील और कमजोर युवा दिलों को मानसिक मजबूती, हमदर्दी और जरूरत पड़ने पर मदद लेने के महत्व का संदेश देती है।
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रौशनी श्रीवास्तव ने स्थानीय बालिका आश्रय गृह में ‘कालिका’ की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की; मानसिक शोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल
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एक बेहद जज्बाती और प्रभावशाली पहल के तहत अभिनेत्री रौशनी श्रीवास्तव ने हाल ही में एक स्थानीय बालिका आश्रय गृह में अपनी फिल्म “कालिका” की विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मानसिक शोषण (मेंटल एब्यूज़) जैसे अक्सर अनदेखे रह जाने वाले गंभीर मुद्दे पर जागरूकता फैलाना और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत शुरू करना था।
फिल्म में राजा गुरु, सार कश्यप और स्वयं रौशनी श्रीवास्तव ने महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। निर्माता निम्मी श्रीवास्तव द्वारा निर्मित “कालिका” रौशनी के लिए एक बेहद खास प्रोजेक्ट है, जिसे उन्होंने अपने दिवंगत पिता श्री एस.के. श्रीवास्तव के नाम समर्पित किया है।
यह स्क्रीनिंग न सिर्फ उद्देश्य से भरी रही, बल्कि भावनात्मक रूप से भी बेहद प्रभावशाली साबित हुई। उपस्थित लड़कियां फिल्म की कहानी से गहराई से जुड़ गईं और उन्हें यह समझने में मदद मिली कि मानसिक शोषण (Mental Abuse) वास्तव में क्या होता है—एक ऐसा विषय जिसे अक्सर गलत समझा जाता है या नजरअंदाज कर दिया जाता है।
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फिल्म की मजबूत कहानी के माध्यम से दर्शकों ने यह जाना कि मानसिक और भावनात्मक रूप से परेशान करना किसी व्यक्ति को किस हद तक प्रभावित कर सकता है, यहाँ तक कि उसे आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाने की स्थिति तक पहुँचा सकता है। इस संवेदनशील बहुत जरूरी विषय को सामने लाकर फिल्म ने लड़कियों को भावनात्मक प्रहार को पहचानने और उससे मुकाबला करने की समझ दी।
“मानसिक शोषण वो ज़ख्म है जो नज़र नहीं आता। अगर हम युवाओं को इसे पहचानना सिखा दें, तो बचाव की राह वहीं से खुल जाएगी।"
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में आश्रय गृह के मैनेजमेंट का महत्वपूर्ण योगदान रहा। रौशनी ने विशेष रूप से सिस्टर रीटा के प्रति अपना आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह स्क्रीनिंग संभव हो सकी। सिस्टर रीटा ने भी रौशनी के इस उद्देश्य को सपोर्ट करते हुए कहा कि ऐसी असहाय लडकियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता मिलनी चाहिए।"
इस सार्थक पहल के माध्यम से “कालिका” केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि जागरूकता की एक प्रेरणादायक मशाल बनकर उभरी है, जो संवेदनशील और कमजोर युवा दिलों को मानसिक मजबूती, हमदर्दी और जरूरत पड़ने पर मदद लेने के महत्व का संदेश देती है।
