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स्वरा भास्कर: जंतर-मंतर से स्वरा भास्कर की सरकार पर हमला, बोलीं- डर के कारण चुप हैं कई दिग्गज
बालीवुड न्यूज़
सोनम वांगचुक के अनशन और CJP के प्रदर्शन को समर्थन देने पहुंचीं स्वरा ने कहा- किसी आंदोलन की ताकत सेलिब्रिटी नहीं, उसके मुद्दे और आम लोग होते हैं
अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर अपने राजनीतिक बयानों को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और सोनम वांगचुक के अनशन के समर्थन में पहुंचीं स्वरा ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों की ऐसे आंदोलनों से दूरी पर भी अपनी राय रखी। स्वरा ने कहा कि कई सेलिब्रिटीज शायद इसलिए खुलकर सामने नहीं आते, क्योंकि उन्हें डर है कि राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर ज्यादा बोलने के बाद उनके साथ भी वैसा ही हो सकता है, जैसा उनके मुताबिक उनके साथ हुआ।
मीडिया से बातचीत के दौरान स्वरा ने मौजूदा राजनीतिक माहौल की तुलना करीब डेढ़ दशक पहले की परिस्थितियों से की। उन्होंने कहा कि 2010-11 के समय भी सरकारों पर भ्रष्टाचार और गलत फैसलों के आरोप लगते थे, लेकिन उस दौर में नागरिकों के विरोध दर्ज कराने की परिस्थितियां अलग थीं। स्वरा का आरोप है कि आज सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता ज्यादा मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हैं। उन्होंने इसी दौरान फादर स्टेन स्वामी का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि हिरासत और जेल में रहने के दौरान हुई ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी किसकी तय होगी। सरकार की आलोचना करते हुए स्वरा ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और सत्ता के अहंकार तथा विरोध से निपटने के तरीके पर सवाल खड़े किए।
फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों के प्रदर्शन में नहीं पहुंचने के सवाल पर स्वरा ने कहा कि वह बॉलीवुड की कोई “क्लास मॉनिटर” नहीं हैं और यह तय करना उनका काम नहीं है कि कौन-सा कलाकार किस मुद्दे पर बोले। हालांकि उन्होंने दावा किया कि कई सेलिब्रिटीज उनकी स्थिति देखकर राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बोलने से बचते होंगे। स्वरा के मुताबिक कलाकारों को यह डर हो सकता है कि ज्यादा मुखर होने का असर उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन पर पड़ेगा। उन्होंने किसी खास अभिनेता या अभिनेत्री का नाम लेकर यह दावा नहीं किया कि वह सरकारी दबाव के कारण चुप है, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री की सामूहिक चुप्पी को लेकर जरूर सवाल उठाए।
स्वरा ने लोगों से यह भी कहा कि सामाजिक आंदोलनों के लिए सेलिब्रिटीज पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक किसी आंदोलन की अहमियत इस बात से तय नहीं होती कि उसमें कितने फिल्म स्टार या चर्चित चेहरे पहुंचे हैं। असली महत्व उस मुद्दे, उसकी मांगों और जमीन पर संघर्ष कर रहे लोगों का होता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से किसी उद्देश्य के लिए मेहनत कर रहे आम नागरिक और कार्यकर्ता अपने आप में महत्वपूर्ण हैं और उन्हें अपनी आवाज मजबूत बनाने के लिए किसी सेलिब्रिटी की मौजूदगी की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
अपनी मौजूदगी को लेकर भी स्वरा ने कहा कि वह प्रदर्शन में अभिनेत्री या सेलिब्रिटी के तौर पर नहीं, बल्कि एक नागरिक और मां के रूप में शामिल हुई हैं। उन्होंने अपनी बेटी का जिक्र करते हुए कहा कि देश के सामाजिक और लोकतांत्रिक माहौल से जुड़े सवाल उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण हैं। स्वरा के मुताबिक वह चाहती हैं कि उनकी बेटी भारत में ही बड़ी हो और उसे भी वे अवसर तथा स्वतंत्रताएं मिलें, जो उन्हें अपने जीवन में मिलीं। इसी दौरान उन्होंने कहा कि वह ऐसी परिस्थितियां नहीं चाहतीं, जिनमें मजबूरी के कारण उन्हें गोल्डन वीजा लेकर दुबई जैसे किसी दूसरे देश में शिफ्ट होने के बारे में सोचना पड़े।
जंतर-मंतर पर स्वरा भास्कर ने सोनम वांगचुक के अनशन और वहां चल रहे आंदोलन के प्रति समर्थन जाहिर किया। उनका कहना था कि किसी आंदोलन की गंभीरता केवल इसलिए कम नहीं हो जाती कि वहां बॉलीवुड या मनोरंजन जगत के बड़े सितारे नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने आंदोलनकारियों की कोशिशों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि लोगों को किसी मुद्दे की अहमियत उसकी मूल मांगों के आधार पर समझनी चाहिए। अगर कोई सवाल समाज और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ा है तो उसे सेलिब्रिटी समर्थन के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।
स्वरा भास्कर के अलावा अभिनेता प्रकाश राज और टीवी पर्सनैलिटी रघु राम जैसे चर्चित चेहरे भी इस प्रदर्शन से जुड़कर अपना समर्थन जाहिर कर चुके हैं। प्रकाश राज भी लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं। इन हस्तियों की मौजूदगी के बावजूद स्वरा ने जोर दिया कि किसी जन आंदोलन का केंद्र सेलिब्रिटी नहीं, बल्कि उसमें शामिल आम नागरिक और उनके मुद्दे होने चाहिए।
स्वरा भास्कर पहले भी कई राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर खुलकर बोलती रही हैं। नागरिकता से जुड़े आंदोलनों से लेकर महिला अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दूसरे सार्वजनिक मुद्दों पर वह विभिन्न मंचों से अपनी राय रख चुकी हैं। उनके राजनीतिक बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर तीखी बहस भी होती रही है। समर्थक उनके मुखर रवैये को नागरिक भागीदारी के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक उनके राजनीतिक रुख और बयानों पर सवाल उठाते रहे हैं। जंतर-मंतर पर दिए ताजा बयान में भी स्वरा ने सरकार की तीखी आलोचना करने के साथ यह दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में कई चर्चित लोग खुलकर अपनी बात कहने से डरते हैं।
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अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर अपने राजनीतिक बयानों को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और सोनम वांगचुक के अनशन के समर्थन में पहुंचीं स्वरा ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों की ऐसे आंदोलनों से दूरी पर भी अपनी राय रखी। स्वरा ने कहा कि कई सेलिब्रिटीज शायद इसलिए खुलकर सामने नहीं आते, क्योंकि उन्हें डर है कि राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर ज्यादा बोलने के बाद उनके साथ भी वैसा ही हो सकता है, जैसा उनके मुताबिक उनके साथ हुआ।
मीडिया से बातचीत के दौरान स्वरा ने मौजूदा राजनीतिक माहौल की तुलना करीब डेढ़ दशक पहले की परिस्थितियों से की। उन्होंने कहा कि 2010-11 के समय भी सरकारों पर भ्रष्टाचार और गलत फैसलों के आरोप लगते थे, लेकिन उस दौर में नागरिकों के विरोध दर्ज कराने की परिस्थितियां अलग थीं। स्वरा का आरोप है कि आज सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता ज्यादा मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हैं। उन्होंने इसी दौरान फादर स्टेन स्वामी का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि हिरासत और जेल में रहने के दौरान हुई ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी किसकी तय होगी। सरकार की आलोचना करते हुए स्वरा ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और सत्ता के अहंकार तथा विरोध से निपटने के तरीके पर सवाल खड़े किए।
फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों के प्रदर्शन में नहीं पहुंचने के सवाल पर स्वरा ने कहा कि वह बॉलीवुड की कोई “क्लास मॉनिटर” नहीं हैं और यह तय करना उनका काम नहीं है कि कौन-सा कलाकार किस मुद्दे पर बोले। हालांकि उन्होंने दावा किया कि कई सेलिब्रिटीज उनकी स्थिति देखकर राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बोलने से बचते होंगे। स्वरा के मुताबिक कलाकारों को यह डर हो सकता है कि ज्यादा मुखर होने का असर उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन पर पड़ेगा। उन्होंने किसी खास अभिनेता या अभिनेत्री का नाम लेकर यह दावा नहीं किया कि वह सरकारी दबाव के कारण चुप है, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री की सामूहिक चुप्पी को लेकर जरूर सवाल उठाए।
स्वरा ने लोगों से यह भी कहा कि सामाजिक आंदोलनों के लिए सेलिब्रिटीज पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक किसी आंदोलन की अहमियत इस बात से तय नहीं होती कि उसमें कितने फिल्म स्टार या चर्चित चेहरे पहुंचे हैं। असली महत्व उस मुद्दे, उसकी मांगों और जमीन पर संघर्ष कर रहे लोगों का होता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से किसी उद्देश्य के लिए मेहनत कर रहे आम नागरिक और कार्यकर्ता अपने आप में महत्वपूर्ण हैं और उन्हें अपनी आवाज मजबूत बनाने के लिए किसी सेलिब्रिटी की मौजूदगी की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
अपनी मौजूदगी को लेकर भी स्वरा ने कहा कि वह प्रदर्शन में अभिनेत्री या सेलिब्रिटी के तौर पर नहीं, बल्कि एक नागरिक और मां के रूप में शामिल हुई हैं। उन्होंने अपनी बेटी का जिक्र करते हुए कहा कि देश के सामाजिक और लोकतांत्रिक माहौल से जुड़े सवाल उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण हैं। स्वरा के मुताबिक वह चाहती हैं कि उनकी बेटी भारत में ही बड़ी हो और उसे भी वे अवसर तथा स्वतंत्रताएं मिलें, जो उन्हें अपने जीवन में मिलीं। इसी दौरान उन्होंने कहा कि वह ऐसी परिस्थितियां नहीं चाहतीं, जिनमें मजबूरी के कारण उन्हें गोल्डन वीजा लेकर दुबई जैसे किसी दूसरे देश में शिफ्ट होने के बारे में सोचना पड़े।
जंतर-मंतर पर स्वरा भास्कर ने सोनम वांगचुक के अनशन और वहां चल रहे आंदोलन के प्रति समर्थन जाहिर किया। उनका कहना था कि किसी आंदोलन की गंभीरता केवल इसलिए कम नहीं हो जाती कि वहां बॉलीवुड या मनोरंजन जगत के बड़े सितारे नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने आंदोलनकारियों की कोशिशों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि लोगों को किसी मुद्दे की अहमियत उसकी मूल मांगों के आधार पर समझनी चाहिए। अगर कोई सवाल समाज और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ा है तो उसे सेलिब्रिटी समर्थन के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।
स्वरा भास्कर के अलावा अभिनेता प्रकाश राज और टीवी पर्सनैलिटी रघु राम जैसे चर्चित चेहरे भी इस प्रदर्शन से जुड़कर अपना समर्थन जाहिर कर चुके हैं। प्रकाश राज भी लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं। इन हस्तियों की मौजूदगी के बावजूद स्वरा ने जोर दिया कि किसी जन आंदोलन का केंद्र सेलिब्रिटी नहीं, बल्कि उसमें शामिल आम नागरिक और उनके मुद्दे होने चाहिए।
स्वरा भास्कर पहले भी कई राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर खुलकर बोलती रही हैं। नागरिकता से जुड़े आंदोलनों से लेकर महिला अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दूसरे सार्वजनिक मुद्दों पर वह विभिन्न मंचों से अपनी राय रख चुकी हैं। उनके राजनीतिक बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर तीखी बहस भी होती रही है। समर्थक उनके मुखर रवैये को नागरिक भागीदारी के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक उनके राजनीतिक रुख और बयानों पर सवाल उठाते रहे हैं। जंतर-मंतर पर दिए ताजा बयान में भी स्वरा ने सरकार की तीखी आलोचना करने के साथ यह दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में कई चर्चित लोग खुलकर अपनी बात कहने से डरते हैं।
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