दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया से बनाई दूरी, X अकाउंट ऑफिस को सौंपा; उज्जैन से अयोध्या तक करेंगे पदयात्रा

Digital Desk

On

20 अक्टूबर से महाकाल की नगरी से शुरू होगी यात्रा, राम मंदिर चंदे के हिसाब और पारदर्शिता का मुद्दा उठाएंगे

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी प्रस्तावित उज्जैन-अयोध्या पदयात्रा से पहले सोशल मीडिया और निजी मोबाइल के इस्तेमाल से दूरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने अपने आधिकारिक X अकाउंट का संचालन कार्यालय की टीम को सौंप दिया है, जबकि निजी मोबाइल फोन की जिम्मेदारी अपने सचिव को दी है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि पदयात्रा के दौरान वे सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं रहेंगे और राजनीतिक बयानबाजी से भी दूरी बनाएंगे। उनकी पदयात्रा 20 अक्टूबर 2026 को उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी।

दिग्विजय सिंह लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे हैं और विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहे हैं। अब उन्होंने अपने X अकाउंट के व्यक्तिगत संचालन से खुद को अलग कर लिया है। उनके पहले इस्तेमाल किए जा रहे अकाउंट को कार्यालय के माध्यम से संचालित किए जाने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना बताया जा रहा है कि भविष्य में उस अकाउंट से जारी होने वाली सूचनाएं व्यक्तिगत पोस्ट के बजाय उनके कार्यालय की ओर से साझा की जाएंगी।

इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने अपना निजी मोबाइल फोन भी सचिव सचिन वत्स को सौंप दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि अब उनके निजी नंबर का इस्तेमाल सचिव करेंगे। फोन पर आने वाले जरूरी संदेशों और महत्वपूर्ण सूचनाओं की जानकारी उन्हें सचिव के माध्यम से दी जाएगी। इस फैसले को उन्होंने आगामी पदयात्रा के दौरान व्यक्तिगत रूप से सोशल मीडिया और मोबाइल से दूर रहने की अपनी योजना से जोड़ा है।

दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित पदयात्रा मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक जाएगी। पहले इस यात्रा को 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से शुरू करने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में कार्यक्रम में बदलाव करते हुए इसकी शुरुआत 20 अक्टूबर से करने का निर्णय लिया गया। यात्रा का समापन अयोध्या में प्रस्तावित है।

दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा को किसी राजनीतिक दल के झंडे या औपचारिक पार्टी अभियान से अलग रखने की बात कही है। उनका कहना है कि यात्रा का उद्देश्य धार्मिक आस्था से जुड़े आर्थिक मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता के सवाल उठाना है। विशेष रूप से राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से जुटाए गए दान और उसके उपयोग से जुड़े विषयों को वे इस यात्रा के दौरान प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं।

उन्होंने दावा किया है कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के हिसाब को लेकर कई सवाल हैं, जिन पर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। दिग्विजय सिंह स्वयं भी मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपए का योगदान देने की बात कह चुके हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों ने अपनी आस्था के साथ मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया, उन्हें यह जानने का अधिकार है कि राशि का उपयोग किस तरह किया गया।

दिग्विजय सिंह ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे पर वे कानूनी रास्ता भी अपना सकते हैं। इसके लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने और जरूरत पड़ने पर अयोध्या में न्यायालय का रुख करने की बात कही गई है। हालांकि दान में कथित अनियमितताओं से जुड़े उनके आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित किया जाना बाकी है और संबंधित संस्थाओं का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए दान देने वाले श्रद्धालुओं से भी यात्रा में शामिल होने की अपील की है। दिग्विजय सिंह चाहते हैं कि ऐसे लोग अपनी दान रसीद के साथ पदयात्रा का हिस्सा बनें। इसके जरिए वे दान के हिसाब और पारदर्शिता की मांग को सार्वजनिक स्तर पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी उम्र और राजनीतिक जीवन को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने कहा है कि वे अब 80 वर्ष की आयु में पहुंच चुके हैं और कांग्रेस नेतृत्व के सामने अपनी इच्छा रख चुके हैं कि पार्टी में युवा नेताओं को ज्यादा अवसर दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कांग्रेस ने उन्हें विधायक, सांसद, राज्यसभा सदस्य और मुख्यमंत्री सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने का अवसर दिया है।

दिग्विजय सिंह के अनुसार अब वे अपना अधिक समय धार्मिक और सामाजिक विषयों से जुड़े कार्यों में लगाना चाहते हैं। उन्होंने इसे ‘धर्म के लिए काम करने’ की इच्छा से जोड़ा है। हालांकि उन्होंने औपचारिक रूप से सक्रिय राजनीति छोड़ने की घोषणा नहीं की है। फिलहाल उनका जोर इस बात पर है कि प्रस्तावित यात्रा को पार्टी की नियमित राजनीतिक गतिविधि की तरह न देखा जाए।

पदयात्रा के दौरान राजनीतिक बयान और सोशल मीडिया पोस्ट नहीं करने की उनकी घोषणा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। उन्होंने कहा है कि यात्रा के दौरान वे Facebook और X जैसे प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत रूप से राजनीतिक सामग्री पोस्ट नहीं करेंगे। उनके सोशल मीडिया अकाउंट से यदि कोई आधिकारिक सूचना आती है तो उसका संचालन कार्यालय की टीम करेगी।

इस यात्रा में किसी बड़े राजनीतिक चेहरे को मुख्य अतिथि बनाने के बजाय अयोध्या आंदोलन से जुड़े कारसेवक संतोष दुबे को प्रमुख अतिथि बनाए जाने की बात कही गई है। दिग्विजय सिंह के मुताबिक संतोष दुबे अयोध्या आंदोलन के दौरान घायल हुए थे। इस चयन के जरिए यात्रा को सीधे राजनीतिक मंच के बजाय धार्मिक और जवाबदेही से जुड़े अभियान के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश दिखाई देती है।

दिग्विजय सिंह की इस घोषणा ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक हलकों में भी चर्चा बढ़ा दी है। लंबे राजनीतिक करियर के बाद सोशल मीडिया से व्यक्तिगत दूरी, मोबाइल सचिव को सौंपने और उज्जैन से अयोध्या तक लंबी पदयात्रा करने का फैसला उनके सार्वजनिक जीवन में एक अलग चरण के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि वे कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और पार्टी में उनकी वरिष्ठ भूमिका बनी हुई है।

उज्जैन से यात्रा की शुरुआत के पीछे धार्मिक महत्व भी जुड़ा है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से यात्रा शुरू कर अयोध्या तक जाने की योजना के जरिए दो प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ा जाएगा। यात्रा किन शहरों और जिलों से होकर गुजरेगी, प्रतिदिन कितनी दूरी तय की जाएगी और इसमें कितने लोग शामिल होंगे, इससे जुड़ा विस्तृत कार्यक्रम आगे सामने आने की उम्मीद है।

राम मंदिर से जुड़े दान को यात्रा का प्रमुख मुद्दा बनाए जाने के कारण आने वाले समय में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो सकती है। दिग्विजय सिंह इसे पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के पैसे के हिसाब से जुड़ा विषय बता रहे हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया है कि उनकी यात्रा किसी राजनीतिक पार्टी के बैनर पर आयोजित नहीं होगी और इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक आस्था से जुड़े आर्थिक मामलों में जवाबदेही की मांग करना रहेगा।

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
18 Jul 2026 By Priyanka

दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया से बनाई दूरी, X अकाउंट ऑफिस को सौंपा; उज्जैन से अयोध्या तक करेंगे पदयात्रा

Digital Desk

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी प्रस्तावित उज्जैन-अयोध्या पदयात्रा से पहले सोशल मीडिया और निजी मोबाइल के इस्तेमाल से दूरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने अपने आधिकारिक X अकाउंट का संचालन कार्यालय की टीम को सौंप दिया है, जबकि निजी मोबाइल फोन की जिम्मेदारी अपने सचिव को दी है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि पदयात्रा के दौरान वे सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं रहेंगे और राजनीतिक बयानबाजी से भी दूरी बनाएंगे। उनकी पदयात्रा 20 अक्टूबर 2026 को उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी।

दिग्विजय सिंह लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे हैं और विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहे हैं। अब उन्होंने अपने X अकाउंट के व्यक्तिगत संचालन से खुद को अलग कर लिया है। उनके पहले इस्तेमाल किए जा रहे अकाउंट को कार्यालय के माध्यम से संचालित किए जाने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना बताया जा रहा है कि भविष्य में उस अकाउंट से जारी होने वाली सूचनाएं व्यक्तिगत पोस्ट के बजाय उनके कार्यालय की ओर से साझा की जाएंगी।

इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने अपना निजी मोबाइल फोन भी सचिव सचिन वत्स को सौंप दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि अब उनके निजी नंबर का इस्तेमाल सचिव करेंगे। फोन पर आने वाले जरूरी संदेशों और महत्वपूर्ण सूचनाओं की जानकारी उन्हें सचिव के माध्यम से दी जाएगी। इस फैसले को उन्होंने आगामी पदयात्रा के दौरान व्यक्तिगत रूप से सोशल मीडिया और मोबाइल से दूर रहने की अपनी योजना से जोड़ा है।

दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित पदयात्रा मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक जाएगी। पहले इस यात्रा को 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से शुरू करने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में कार्यक्रम में बदलाव करते हुए इसकी शुरुआत 20 अक्टूबर से करने का निर्णय लिया गया। यात्रा का समापन अयोध्या में प्रस्तावित है।

दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा को किसी राजनीतिक दल के झंडे या औपचारिक पार्टी अभियान से अलग रखने की बात कही है। उनका कहना है कि यात्रा का उद्देश्य धार्मिक आस्था से जुड़े आर्थिक मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता के सवाल उठाना है। विशेष रूप से राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से जुटाए गए दान और उसके उपयोग से जुड़े विषयों को वे इस यात्रा के दौरान प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं।

उन्होंने दावा किया है कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के हिसाब को लेकर कई सवाल हैं, जिन पर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। दिग्विजय सिंह स्वयं भी मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपए का योगदान देने की बात कह चुके हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों ने अपनी आस्था के साथ मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया, उन्हें यह जानने का अधिकार है कि राशि का उपयोग किस तरह किया गया।

दिग्विजय सिंह ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे पर वे कानूनी रास्ता भी अपना सकते हैं। इसके लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने और जरूरत पड़ने पर अयोध्या में न्यायालय का रुख करने की बात कही गई है। हालांकि दान में कथित अनियमितताओं से जुड़े उनके आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित किया जाना बाकी है और संबंधित संस्थाओं का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए दान देने वाले श्रद्धालुओं से भी यात्रा में शामिल होने की अपील की है। दिग्विजय सिंह चाहते हैं कि ऐसे लोग अपनी दान रसीद के साथ पदयात्रा का हिस्सा बनें। इसके जरिए वे दान के हिसाब और पारदर्शिता की मांग को सार्वजनिक स्तर पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी उम्र और राजनीतिक जीवन को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने कहा है कि वे अब 80 वर्ष की आयु में पहुंच चुके हैं और कांग्रेस नेतृत्व के सामने अपनी इच्छा रख चुके हैं कि पार्टी में युवा नेताओं को ज्यादा अवसर दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कांग्रेस ने उन्हें विधायक, सांसद, राज्यसभा सदस्य और मुख्यमंत्री सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने का अवसर दिया है।

दिग्विजय सिंह के अनुसार अब वे अपना अधिक समय धार्मिक और सामाजिक विषयों से जुड़े कार्यों में लगाना चाहते हैं। उन्होंने इसे ‘धर्म के लिए काम करने’ की इच्छा से जोड़ा है। हालांकि उन्होंने औपचारिक रूप से सक्रिय राजनीति छोड़ने की घोषणा नहीं की है। फिलहाल उनका जोर इस बात पर है कि प्रस्तावित यात्रा को पार्टी की नियमित राजनीतिक गतिविधि की तरह न देखा जाए।

पदयात्रा के दौरान राजनीतिक बयान और सोशल मीडिया पोस्ट नहीं करने की उनकी घोषणा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। उन्होंने कहा है कि यात्रा के दौरान वे Facebook और X जैसे प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत रूप से राजनीतिक सामग्री पोस्ट नहीं करेंगे। उनके सोशल मीडिया अकाउंट से यदि कोई आधिकारिक सूचना आती है तो उसका संचालन कार्यालय की टीम करेगी।

इस यात्रा में किसी बड़े राजनीतिक चेहरे को मुख्य अतिथि बनाने के बजाय अयोध्या आंदोलन से जुड़े कारसेवक संतोष दुबे को प्रमुख अतिथि बनाए जाने की बात कही गई है। दिग्विजय सिंह के मुताबिक संतोष दुबे अयोध्या आंदोलन के दौरान घायल हुए थे। इस चयन के जरिए यात्रा को सीधे राजनीतिक मंच के बजाय धार्मिक और जवाबदेही से जुड़े अभियान के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश दिखाई देती है।

दिग्विजय सिंह की इस घोषणा ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक हलकों में भी चर्चा बढ़ा दी है। लंबे राजनीतिक करियर के बाद सोशल मीडिया से व्यक्तिगत दूरी, मोबाइल सचिव को सौंपने और उज्जैन से अयोध्या तक लंबी पदयात्रा करने का फैसला उनके सार्वजनिक जीवन में एक अलग चरण के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि वे कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और पार्टी में उनकी वरिष्ठ भूमिका बनी हुई है।

उज्जैन से यात्रा की शुरुआत के पीछे धार्मिक महत्व भी जुड़ा है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से यात्रा शुरू कर अयोध्या तक जाने की योजना के जरिए दो प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ा जाएगा। यात्रा किन शहरों और जिलों से होकर गुजरेगी, प्रतिदिन कितनी दूरी तय की जाएगी और इसमें कितने लोग शामिल होंगे, इससे जुड़ा विस्तृत कार्यक्रम आगे सामने आने की उम्मीद है।

राम मंदिर से जुड़े दान को यात्रा का प्रमुख मुद्दा बनाए जाने के कारण आने वाले समय में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो सकती है। दिग्विजय सिंह इसे पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के पैसे के हिसाब से जुड़ा विषय बता रहे हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया है कि उनकी यात्रा किसी राजनीतिक पार्टी के बैनर पर आयोजित नहीं होगी और इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक आस्था से जुड़े आर्थिक मामलों में जवाबदेही की मांग करना रहेगा।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/digvijay-singh-kept-distance-from-social-media-handed-over-account/article-59130

खबरें और भी हैं

कुलदीप मैती पर भाजपा की नजर! अमित शाह की कोलकाता बैठक में मिल सकता है बड़ा संकेत
कौन होगा दतिया विधानसभा उपचुनाव में जनता की पहली पसंद?
Select one option below:

टाप न्यूज

कुलदीप मैती पर भाजपा की नजर! अमित शाह की कोलकाता बैठक में मिल सकता है बड़ा संकेत

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ...
देश विदेश 
कुलदीप मैती पर भाजपा की नजर! अमित शाह की कोलकाता बैठक में मिल सकता है बड़ा संकेत

MP Cabinet Meeting: जगदीशपुर में आज जुटेगी मोहन कैबिनेट, मानसून सत्र से पहले अहम प्रस्तावों पर होगी चर्चा

20 जुलाई से विधानसभा का मानसून सत्र, CM मोहन यादव ने कैबिनेट एजेंडे और तैयारियों की समीक्षा की
मध्य प्रदेश  भोपाल 
MP Cabinet Meeting: जगदीशपुर में आज जुटेगी मोहन कैबिनेट, मानसून सत्र से पहले अहम प्रस्तावों पर होगी चर्चा

दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया से बनाई दूरी, X अकाउंट ऑफिस को सौंपा; उज्जैन से अयोध्या तक करेंगे पदयात्रा

20 अक्टूबर से महाकाल की नगरी से शुरू होगी यात्रा, राम मंदिर चंदे के हिसाब और पारदर्शिता का मुद्दा उठाएंगे...
चुनाव  मध्य प्रदेश 
दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया से बनाई दूरी, X अकाउंट ऑफिस को सौंपा; उज्जैन से अयोध्या तक करेंगे पदयात्रा

Datia By-Election: स्वागत के लिए आगे बढ़े कार्यकर्ताओं को नरोत्तम मिश्रा ने रोका, बोले- ‘दूल्हा पीछे आ रहा है, पहले उसे माला पहनाओ’

दतिया उपचुनाव प्रचार में नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को दी प्राथमिकता, कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा में आया...
मध्य प्रदेश 
Datia By-Election: स्वागत के लिए आगे बढ़े कार्यकर्ताओं को नरोत्तम मिश्रा ने रोका, बोले- ‘दूल्हा पीछे आ रहा है, पहले उसे माला पहनाओ’

बिजनेस

Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.