Iran-US War: होर्मुज में 2 तेल टैंकरों में विस्फोट का दावा, सातवीं रात भी ईरान पर अमेरिकी हमले

अंतराष्ट्रीय न्यूज

On

IRGC ने टैंकरों के समुद्री माइंस से टकराने का दावा किया, CENTCOM ने किया खंडन; जमीनी कार्रवाई पर ईरान ने कुवैत-बहरीन को लेकर दी चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर तनाव के केंद्र में आ गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने शनिवार को दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट में दो तेल टैंकर समुद्र में मौजूद माइंस की चपेट में आने के बाद विस्फोट और आग का शिकार हुए। ईरानी पक्ष ने इसके पीछे अमेरिकी खुफिया जानकारी की कथित विफलता को जिम्मेदार बताया है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने इस दावे को गलत बताया। जहाजों की पहचान, चालक दल की स्थिति और विस्फोट के वास्तविक कारण को लेकर तत्काल स्वतंत्र पुष्टि स्पष्ट नहीं थी। इसी बीच अमेरिका ने लगातार सातवीं रात ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रखने की बात कही है। ताजा घटनाक्रम के साथ फारस की खाड़ी में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया है। होर्मुज से वैश्विक तेल और LNG व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहां किसी जहाज पर हमला, माइंस की मौजूदगी या समुद्री यातायात बाधित होने की खबर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और शिपिंग पर असर डाल सकती है।

IRGC की ओर से सामने आए दावे में कहा गया कि दोनों टैंकर समुद्र में बिछी माइंस से टकराए और इसके बाद उनमें विस्फोट हुआ। ईरानी पक्ष ने अमेरिका पर जहाजों को गलत खुफिया जानकारी देने का आरोप भी लगाया। इसके उलट CENTCOM ने ईरान के इस दावे को खारिज कर दिया। दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत बयान आने के कारण घटना को लेकर स्थिति साफ नहीं है। युद्ध के मौजूदा माहौल में समुद्री घटनाओं को लेकर सूचना युद्ध भी तेज है और अलग-अलग पक्ष अपने दावे जारी कर रहे हैं। ऐसे में टैंकरों से जुड़ी घटना के वास्तविक कारण की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

होर्मुज स्ट्रेट पिछले कई महीनों से इस संघर्ष का बेहद संवेदनशील हिस्सा बना हुआ है। ईरान पहले भी यहां से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी देता रहा है और समुद्री यातायात पर दबाव बढ़ा है। यह जलमार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित संकरा समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे बड़े ऊर्जा उत्पादक देशों के तेल और गैस निर्यात के लिए यह रास्ता रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। इसलिए यहां तनाव बढ़ते ही केवल ईरान और अमेरिका नहीं, बल्कि एशिया और यूरोप के ऊर्जा आयातक देशों की चिंता भी बढ़ जाती है।

दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने ईरान पर अपने सैन्य अभियान को लगातार सातवीं रात भी जारी रखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के अलग-अलग हिस्सों में सैन्य प्रतिष्ठानों, हथियार भंडारण सुविधाओं और समुद्री सैन्य क्षमताओं से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया। सीरिक, बुशेहर, बंदर अब्बास, केश्म द्वीप और यज्द समेत कई क्षेत्रों में हमलों की खबरें सामने आई हैं। इन इलाकों का सामरिक महत्व अलग-अलग है। खासकर बंदर अब्बास और होर्मुज के आसपास का क्षेत्र ईरान की नौसैनिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

अमेरिकी सैन्य अभियान का फोकस ईरान की मिसाइल, ड्रोन और समुद्री हमला करने की क्षमता को कमजोर करने पर बताया जा रहा है। CENTCOM की ओर से सैन्य कार्रवाई से जुड़े वीडियो और जानकारियां भी जारी की गई हैं। दूसरी ओर ईरान ने कहा है कि अमेरिकी हमलों का जवाब दिया जाएगा और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान उसके निशाने पर बने रहेंगे। पिछले दिनों खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों से जुड़े ठिकानों पर हमलों की खबरें भी सामने आती रही हैं। ताजा अमेरिकी हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई ने संघर्ष के दायरे को और व्यापक होने का खतरा बढ़ा दिया है।

सबसे गंभीर चेतावनी ईरान के एक सांसद की ओर से संभावित अमेरिकी जमीनी कार्रवाई को लेकर सामने आई। ईरानी सांसद अहमद बख्शायेश अर्देस्तानी ने कहा कि अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ जमीन पर सैन्य अभियान शुरू करता है तो जवाब केवल ईरानी सीमा तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में ईरानी बल कुवैत और बहरीन में प्रवेश कर वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। यह एक सांसद का बयान है और इसे ईरानी सरकार की औपचारिक सैन्य घोषणा नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन मौजूदा तनाव के बीच इस तरह की चेतावनी ने खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है।

कुवैत और बहरीन दोनों अमेरिका के महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार हैं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना की पांचवीं फ्लीट का मुख्यालय स्थित है, जबकि कुवैत में भी अमेरिका की महत्वपूर्ण सैन्य मौजूदगी और सुविधाएं हैं। ईरान और अमेरिका के बीच सीधा जमीनी संघर्ष शुरू होने की स्थिति में इन ठिकानों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा बन सकती है। यही कारण है कि खाड़ी के छोटे देशों के लिए मौजूदा टकराव बेहद संवेदनशील बन गया है। वे एक तरफ अमेरिका के सुरक्षा साझेदार हैं और दूसरी तरफ भौगोलिक रूप से ईरान के बेहद करीब हैं।

युद्ध का असर अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर खतरा बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। हाल की लड़ाई में खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा सुविधाओं, बिजली और पानी से जुड़े प्रतिष्ठानों के प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को लेकर चिंता जताई है। खाड़ी देशों में पानी की बड़ी जरूरत समुद्री जल को साफ करने वाले desalination plants से पूरी होती है। ऐसे संयंत्रों पर हमला या बिजली आपूर्ति बाधित होना लाखों लोगों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

होर्मुज में टैंकरों से जुड़ी ताजा खबर ने तेल बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। इस जलमार्ग पर किसी भी तरह का बड़ा व्यवधान कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव ला सकता है। जहाजरानी कंपनियों के लिए भी जोखिम बढ़ता है। समुद्री माइंस, ड्रोन, मिसाइल या जहाजों पर हमले की आशंका के कारण बीमा लागत बढ़ सकती है और कई कंपनियां वैकल्पिक रास्तों या यात्रा रोकने पर विचार कर सकती हैं। इससे सप्लाई में देरी और परिवहन खर्च बढ़ने का खतरा रहता है।

भारत के लिए भी होर्मुज का घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है और पश्चिम एशिया उसके प्रमुख आपूर्ति क्षेत्रों में शामिल है। अगर फारस की खाड़ी से तेल और गैस की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भारतीय आयात बिल पर पड़ सकता है। समुद्री माल ढुलाई और बीमा महंगा होने का असर भी आयात लागत पर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं, इसलिए संघर्ष का क्षेत्रीय विस्तार होने की स्थिति में उनकी सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनेगी।

अमेरिका की ओर से लगातार सात रात तक किए गए हमलों ने यह संकेत दिया है कि सैन्य अभियान अभी थमता दिखाई नहीं दे रहा। वहीं ईरान भी होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र में अपनी सामरिक स्थिति का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहा है। दोनों पक्षों की तरफ से हमले और जवाबी चेतावनियां जारी रहने के कारण किसी गलत आकलन से संघर्ष के अचानक बड़े क्षेत्र में फैलने का खतरा बना हुआ है। खासकर बहरीन, कुवैत और दूसरे खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने इस टकराव के बीच संवेदनशील बने हुए हैं।

इस बीच होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों के लिए सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। IRGC ने समुद्री यातायात को अपनी चेतावनियों पर ध्यान देने को कहा है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर नियंत्रण या व्यापारिक जहाजों को खतरे में डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दो तेल टैंकरों में विस्फोट के ईरानी दावे और उसके अमेरिकी खंडन के बाद अब जहाजों की वास्तविक स्थिति, नुकसान और घटना के कारणों से जुड़ी स्वतंत्र जानकारी का इंतजार है।

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
18 Jul 2026 By Priyanka

Iran-US War: होर्मुज में 2 तेल टैंकरों में विस्फोट का दावा, सातवीं रात भी ईरान पर अमेरिकी हमले

अंतराष्ट्रीय न्यूज

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर तनाव के केंद्र में आ गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने शनिवार को दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट में दो तेल टैंकर समुद्र में मौजूद माइंस की चपेट में आने के बाद विस्फोट और आग का शिकार हुए। ईरानी पक्ष ने इसके पीछे अमेरिकी खुफिया जानकारी की कथित विफलता को जिम्मेदार बताया है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने इस दावे को गलत बताया। जहाजों की पहचान, चालक दल की स्थिति और विस्फोट के वास्तविक कारण को लेकर तत्काल स्वतंत्र पुष्टि स्पष्ट नहीं थी। इसी बीच अमेरिका ने लगातार सातवीं रात ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रखने की बात कही है। ताजा घटनाक्रम के साथ फारस की खाड़ी में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया है। होर्मुज से वैश्विक तेल और LNG व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहां किसी जहाज पर हमला, माइंस की मौजूदगी या समुद्री यातायात बाधित होने की खबर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और शिपिंग पर असर डाल सकती है।

IRGC की ओर से सामने आए दावे में कहा गया कि दोनों टैंकर समुद्र में बिछी माइंस से टकराए और इसके बाद उनमें विस्फोट हुआ। ईरानी पक्ष ने अमेरिका पर जहाजों को गलत खुफिया जानकारी देने का आरोप भी लगाया। इसके उलट CENTCOM ने ईरान के इस दावे को खारिज कर दिया। दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत बयान आने के कारण घटना को लेकर स्थिति साफ नहीं है। युद्ध के मौजूदा माहौल में समुद्री घटनाओं को लेकर सूचना युद्ध भी तेज है और अलग-अलग पक्ष अपने दावे जारी कर रहे हैं। ऐसे में टैंकरों से जुड़ी घटना के वास्तविक कारण की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

होर्मुज स्ट्रेट पिछले कई महीनों से इस संघर्ष का बेहद संवेदनशील हिस्सा बना हुआ है। ईरान पहले भी यहां से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी देता रहा है और समुद्री यातायात पर दबाव बढ़ा है। यह जलमार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित संकरा समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे बड़े ऊर्जा उत्पादक देशों के तेल और गैस निर्यात के लिए यह रास्ता रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। इसलिए यहां तनाव बढ़ते ही केवल ईरान और अमेरिका नहीं, बल्कि एशिया और यूरोप के ऊर्जा आयातक देशों की चिंता भी बढ़ जाती है।

दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने ईरान पर अपने सैन्य अभियान को लगातार सातवीं रात भी जारी रखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के अलग-अलग हिस्सों में सैन्य प्रतिष्ठानों, हथियार भंडारण सुविधाओं और समुद्री सैन्य क्षमताओं से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया। सीरिक, बुशेहर, बंदर अब्बास, केश्म द्वीप और यज्द समेत कई क्षेत्रों में हमलों की खबरें सामने आई हैं। इन इलाकों का सामरिक महत्व अलग-अलग है। खासकर बंदर अब्बास और होर्मुज के आसपास का क्षेत्र ईरान की नौसैनिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

अमेरिकी सैन्य अभियान का फोकस ईरान की मिसाइल, ड्रोन और समुद्री हमला करने की क्षमता को कमजोर करने पर बताया जा रहा है। CENTCOM की ओर से सैन्य कार्रवाई से जुड़े वीडियो और जानकारियां भी जारी की गई हैं। दूसरी ओर ईरान ने कहा है कि अमेरिकी हमलों का जवाब दिया जाएगा और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान उसके निशाने पर बने रहेंगे। पिछले दिनों खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों से जुड़े ठिकानों पर हमलों की खबरें भी सामने आती रही हैं। ताजा अमेरिकी हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई ने संघर्ष के दायरे को और व्यापक होने का खतरा बढ़ा दिया है।

सबसे गंभीर चेतावनी ईरान के एक सांसद की ओर से संभावित अमेरिकी जमीनी कार्रवाई को लेकर सामने आई। ईरानी सांसद अहमद बख्शायेश अर्देस्तानी ने कहा कि अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ जमीन पर सैन्य अभियान शुरू करता है तो जवाब केवल ईरानी सीमा तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में ईरानी बल कुवैत और बहरीन में प्रवेश कर वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। यह एक सांसद का बयान है और इसे ईरानी सरकार की औपचारिक सैन्य घोषणा नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन मौजूदा तनाव के बीच इस तरह की चेतावनी ने खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है।

कुवैत और बहरीन दोनों अमेरिका के महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार हैं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना की पांचवीं फ्लीट का मुख्यालय स्थित है, जबकि कुवैत में भी अमेरिका की महत्वपूर्ण सैन्य मौजूदगी और सुविधाएं हैं। ईरान और अमेरिका के बीच सीधा जमीनी संघर्ष शुरू होने की स्थिति में इन ठिकानों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा बन सकती है। यही कारण है कि खाड़ी के छोटे देशों के लिए मौजूदा टकराव बेहद संवेदनशील बन गया है। वे एक तरफ अमेरिका के सुरक्षा साझेदार हैं और दूसरी तरफ भौगोलिक रूप से ईरान के बेहद करीब हैं।

युद्ध का असर अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर खतरा बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। हाल की लड़ाई में खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा सुविधाओं, बिजली और पानी से जुड़े प्रतिष्ठानों के प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को लेकर चिंता जताई है। खाड़ी देशों में पानी की बड़ी जरूरत समुद्री जल को साफ करने वाले desalination plants से पूरी होती है। ऐसे संयंत्रों पर हमला या बिजली आपूर्ति बाधित होना लाखों लोगों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

होर्मुज में टैंकरों से जुड़ी ताजा खबर ने तेल बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। इस जलमार्ग पर किसी भी तरह का बड़ा व्यवधान कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव ला सकता है। जहाजरानी कंपनियों के लिए भी जोखिम बढ़ता है। समुद्री माइंस, ड्रोन, मिसाइल या जहाजों पर हमले की आशंका के कारण बीमा लागत बढ़ सकती है और कई कंपनियां वैकल्पिक रास्तों या यात्रा रोकने पर विचार कर सकती हैं। इससे सप्लाई में देरी और परिवहन खर्च बढ़ने का खतरा रहता है।

भारत के लिए भी होर्मुज का घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है और पश्चिम एशिया उसके प्रमुख आपूर्ति क्षेत्रों में शामिल है। अगर फारस की खाड़ी से तेल और गैस की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भारतीय आयात बिल पर पड़ सकता है। समुद्री माल ढुलाई और बीमा महंगा होने का असर भी आयात लागत पर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं, इसलिए संघर्ष का क्षेत्रीय विस्तार होने की स्थिति में उनकी सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनेगी।

अमेरिका की ओर से लगातार सात रात तक किए गए हमलों ने यह संकेत दिया है कि सैन्य अभियान अभी थमता दिखाई नहीं दे रहा। वहीं ईरान भी होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र में अपनी सामरिक स्थिति का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहा है। दोनों पक्षों की तरफ से हमले और जवाबी चेतावनियां जारी रहने के कारण किसी गलत आकलन से संघर्ष के अचानक बड़े क्षेत्र में फैलने का खतरा बना हुआ है। खासकर बहरीन, कुवैत और दूसरे खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने इस टकराव के बीच संवेदनशील बने हुए हैं।

इस बीच होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों के लिए सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। IRGC ने समुद्री यातायात को अपनी चेतावनियों पर ध्यान देने को कहा है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर नियंत्रण या व्यापारिक जहाजों को खतरे में डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दो तेल टैंकरों में विस्फोट के ईरानी दावे और उसके अमेरिकी खंडन के बाद अब जहाजों की वास्तविक स्थिति, नुकसान और घटना के कारणों से जुड़ी स्वतंत्र जानकारी का इंतजार है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-us-war-claims-of-explosion-in-2-oil-tankers-in/article-59116

खबरें और भी हैं

कुलदीप मैती पर भाजपा की नजर! अमित शाह की कोलकाता बैठक में मिल सकता है बड़ा संकेत
कौन होगा दतिया विधानसभा उपचुनाव में जनता की पहली पसंद?
Select one option below:

टाप न्यूज

कुलदीप मैती पर भाजपा की नजर! अमित शाह की कोलकाता बैठक में मिल सकता है बड़ा संकेत

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ...
देश विदेश 
कुलदीप मैती पर भाजपा की नजर! अमित शाह की कोलकाता बैठक में मिल सकता है बड़ा संकेत

MP Cabinet Meeting: जगदीशपुर में आज जुटेगी मोहन कैबिनेट, मानसून सत्र से पहले अहम प्रस्तावों पर होगी चर्चा

20 जुलाई से विधानसभा का मानसून सत्र, CM मोहन यादव ने कैबिनेट एजेंडे और तैयारियों की समीक्षा की
मध्य प्रदेश  भोपाल 
MP Cabinet Meeting: जगदीशपुर में आज जुटेगी मोहन कैबिनेट, मानसून सत्र से पहले अहम प्रस्तावों पर होगी चर्चा

दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया से बनाई दूरी, X अकाउंट ऑफिस को सौंपा; उज्जैन से अयोध्या तक करेंगे पदयात्रा

20 अक्टूबर से महाकाल की नगरी से शुरू होगी यात्रा, राम मंदिर चंदे के हिसाब और पारदर्शिता का मुद्दा उठाएंगे...
चुनाव  मध्य प्रदेश 
दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया से बनाई दूरी, X अकाउंट ऑफिस को सौंपा; उज्जैन से अयोध्या तक करेंगे पदयात्रा

Datia By-Election: स्वागत के लिए आगे बढ़े कार्यकर्ताओं को नरोत्तम मिश्रा ने रोका, बोले- ‘दूल्हा पीछे आ रहा है, पहले उसे माला पहनाओ’

दतिया उपचुनाव प्रचार में नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को दी प्राथमिकता, कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा में आया...
मध्य प्रदेश 
Datia By-Election: स्वागत के लिए आगे बढ़े कार्यकर्ताओं को नरोत्तम मिश्रा ने रोका, बोले- ‘दूल्हा पीछे आ रहा है, पहले उसे माला पहनाओ’

बिजनेस

Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.