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गुड्डू–कौशिक की जोड़ी की कहानी: ‘दीवानियत’ से चर्चा में म्यूजिक कंपोजर बोले- पहले काम कम था, अब छोड़ना पड़ता है
बालीवुड न्यूज़
कॉलेज से बॉलीवुड तक का सफर, इंडस्ट्री में इंस्पिरेशन और शुरुआती संघर्षों की जर्नी साझा की म्यूजिक कंपोजिंग जोड़ी ने
बॉलीवुड म्यूजिक की नई चमकदार जोड़ी गुड्डू और कौशिक, जिन्होंने हाल ही में फिल्म एक दीवाने की दीवानियत के टाइटल ट्रैक ‘दीवानियत’ को कंपोज किया, आज इंडस्ट्री में पहचान बना चुके हैं। दोनों ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने शुरुआती संघर्ष, इंस्पिरेशन और बॉलीवुड में ब्रेक मिलने की कहानी साझा की।
कौशिक ने बताया कि कोलकाता से मुंबई तक का सफर चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने कहा, “पहले काम कम था, अब इतना काम है कि कभी-कभी छोड़ना पड़ता है। हर स्टेज पर कुछ कमी जरूर थी, लेकिन हमने सबसे ज्यादा सीखा।” गुड्डू ने इसे खूबसूरत जर्नी बताया और कहा कि फैंस का प्यार और उनके गाने पसंद करना उनकी मेहनत का सबसे बड़ा इनाम है।
गुड्डू और कौशिक की जोड़ी परिवारिक है। दोनों कज़िन हैं। गुड्डू ने बताया कि कॉलेज के दिनों में उन्होंने कौशिक से कहा था कि बॉलीवुड में कुछ गाने बनाएं। उस वक्त गुड्डू एक बैंड से जुड़े थे और कौशिक इंडियन क्लासिकल म्यूजिक में सक्रिय थे। धीरे-धीरे दोनों ने कोलैब करना शुरू किया और कंपोजिशन के गुर एक-दूसरे से सीखे।
कौशिक ने अपने संगीत की प्रेरणा पिता से मिलने की बात साझा की। उन्होंने कहा, “मेरे पापा गाते थे और सिखाते भी। टैगोर और किशोर कुमार के गाने सुनते हुए मैंने इंडस्ट्री में कदम रखा।” दोनों मुंबई 2013 में आए और प्रीतम के टीम से जुड़कर संगीत के गुर सीखने लगे।
बॉलीवुड में पहला ब्रेक उन्हें बहन होगी तेरी… फिल्म के गाने तेरे होकर रहूं से मिला। इसके बाद शादी में जरूर आना, बधाई हो, लव यात्री और सूर्यवंशी जैसी फिल्मों में उनके गाने रिलीज हुए। दीवानियत के कोरस पार्ट को दोनों ने खुद गाया और कंपोज भी किया।
गुड्डू–कौशिक ने इंडस्ट्री में अपने इंस्पिरेशन की बात भी साझा की। गुड्डू ने कहा कि विशाल–शेखर और गुरु प्रीतम ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया। कौशिक ने ए.आर. रहमान से भी बहुत कुछ सीखने का अनुभव बताया।
कौशिक ने बताया कि कभी बड़े प्रोजेक्ट्स में ब्रेक ना मिलने पर भी वे निराश नहीं हुए। उन्होंने सैयारा जैसी फिल्मों के उदाहरण दिए और बताया कि उन्होंने निर्देशक मोहित सूरी के सामने अपना काम पेश किया, लेकिन फिल्म की कहानी और संगीत से मेल नहीं खा पाया।
गुड्डू–कौशिक का मानना है कि संघर्ष और सीखने की प्रक्रिया ही उन्हें बॉलीवुड में आगे बढ़ा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंडस्ट्री में मेहनत, धैर्य और सही मौके की पहचान ही सफलता की कुंजी है।
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