EU ने भारत के साथ रक्षा समझौते को दी मंजूरी, दिल्ली समिट में होंगे साइन

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आतंकवाद, समुद्री और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ेगा; 27 जनवरी को भारत-EU शिखर सम्मेलन में डील पर मुहर

यूरोपीय यूनियन (EU) ने भारत के साथ बहुप्रतीक्षित सुरक्षा और रक्षा समझौते (Security and Defence Agreement) को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस समझौते पर अगले हफ्ते नई दिल्ली में होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए जाएंगे। EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने बुधवार को यूरोपीय संसद में इसकी जानकारी दी।

कलास ने कहा कि यह समझौता भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है, जिसमें रक्षा के साथ-साथ आतंकवाद विरोधी सहयोग, समुद्री सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे अहम क्षेत्र शामिल होंगे। उन्होंने इसे मौजूदा वैश्विक सुरक्षा हालात के लिहाज से “जरूरी और समयोचित” करार दिया।

EU परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन अगले सप्ताह भारत दौरे पर आ रहे हैं। दोनों नेता 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे, जबकि 27 जनवरी को भारत-EU शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसी बैठक में रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

काजा कलास के मुताबिक, इस सुरक्षा समझौते से भारत और EU को आतंकवाद से निपटने में साझा रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर और अन्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा, साइबर हमलों से बचाव और संवेदनशील तकनीकों की रक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग को नई गति मिलेगी।

EU के लगभग 90 सदस्यों वाला प्रतिनिधिमंडल भारत आ रहा है, जिसमें विदेश नीति, व्यापार और रणनीतिक मामलों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इस दौरान रक्षा समझौते के साथ-साथ भारत और EU के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद है।

सूत्रों के अनुसार, 27 जनवरी को FTA पर भी सहमति बनने की संभावना है, हालांकि इसके लिए अभी कुछ कानूनी और प्रक्रियागत औपचारिकताएं बाकी हैं। यूरोपीय संसद और यूरोपीय काउंसिल की मंजूरी के बाद ट्रेड कमिश्नर मारोस सेफकोविक इस समझौते को अंतिम रूप देंगे।

हालांकि, कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे मुद्दे अब भी बातचीत का अहम हिस्सा बने हुए हैं। CBAM के तहत EU स्टील और सीमेंट जैसे उत्पादों पर कार्बन टैक्स लगाने की व्यवस्था कर रहा है, जिसे लेकर भारत ने आपत्ति जताई है। दोनों पक्ष इस पर संतुलित समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।

EU के लिए भारत रणनीतिक रूप से इसलिए भी अहम है क्योंकि वह चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करना चाहता है। वहीं भारत के लिए यूरोपीय बाजारों तक आसान पहुंच निर्यात, मैन्युफैक्चरिंग और निवेश को बढ़ावा दे सकती है।

वित्त वर्ष 2023-24 में भारत और EU के बीच व्यापार करीब 135 अरब डॉलर का रहा। प्रस्तावित मुक्त व्यापार और रक्षा समझौते को भारत का अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय व्यापार-रणनीतिक पैकेज माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह साझेदारी आने वाले वर्षों में भारत-EU संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जा सकती है।

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