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पीएम मोदी के कथित एडिटेड वीडियो मामले में कार्रवाई तेज, मेटा इंडिया हेड समेत कई पर FIR दर्ज
बिजनेस डेस्क
हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने आपत्तिजनक वीडियो मामले में केस दर्ज किया, नोएडा में प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर महिला पर जीरो एफआईआर दर्ज।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कथित एडिटेड वीडियो के मामले में पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है। हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए कथित आपत्तिजनक और मॉर्फ्ड वीडियो को लेकर दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों के साथ मेटा इंडिया के प्रमुख को भी सह-आरोपी के रूप में नामजद किया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश के नोएडा में प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी किए जाने के आरोप में एक महिला के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। दोनों मामलों की जांच अलग-अलग एजेंसियों द्वारा की जा रही है और पुलिस ने संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायतों के आधार पर की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री से जुड़े कथित रूप से एडिट किए गए वीडियो प्रसारित किए गए, जिनमें आपत्तिजनक सामग्री का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं। शुरुआती जांच में जिन सोशल मीडिया अकाउंट्स से कथित सामग्री साझा की गई, उनके संचालकों को आरोपी बनाया गया है। साथ ही मेटा इंडिया के प्रमुख को दोनों मामलों में सह-आरोपी के रूप में शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि यह कदम जांच प्रक्रिया के तहत उठाया गया है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
मामले की प्रमुख बातें
- हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की।
- सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों को आरोपी बनाया गया।
- मेटा इंडिया हेड को सह-आरोपी के रूप में नामजद किया गया।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) और IT Act के तहत कार्रवाई।
- मेटा को नोटिस जारी कर संबंधित जानकारी मांगी गई।
पुलिस जांच के अनुसार, यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक छात्र प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित वीडियो से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रदर्शन से जुड़े कुछ वीडियो को एडिट कर प्रधानमंत्री को लेकर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने की शिकायत मिली थी। इसके बाद साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और संबंधित लिंक तथा सोशल मीडिया पोस्ट की पड़ताल की। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित वीडियो किसने तैयार किया, किसने साझा किया और इसके प्रसार में किन-किन खातों की भूमिका रही।
जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आवश्यक सूचना उपलब्ध कराने के लिए नोटिस भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जानकारी मिलने के बाद आरोपियों की पहचान और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा रहा है और साइबर विशेषज्ञ भी जांच में सहयोग कर रहे हैं।
जांच में पुलिस की कार्रवाई
- सोशल मीडिया लिंक और पोस्ट की तकनीकी जांच।
- संबंधित प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी।
- डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जा रहे हैं।
- आरोपियों की पहचान की प्रक्रिया जारी।
- साइबर विशेषज्ञों की मदद से जांच आगे बढ़ रही है।
इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में नोएडा पुलिस ने प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में एक महिला के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की है। शिकायत के अनुसार, दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान महिला ने प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। शिकायत मिलने के बाद एक्सप्रेसवे थाने में मामला दर्ज किया गया। चूंकि घटना दूसरे क्षेत्र से संबंधित बताई गई है, इसलिए इसे जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज कर आगे की जांच के लिए संबंधित पुलिस इकाई को भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कथित टिप्पणी से संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने, समाज में वैमनस्य फैलाने और शांति व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जीरो एफआईआर क्या होती है?
- किसी भी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
- घटना उसी थाना क्षेत्र की होना जरूरी नहीं।
- बाद में मामला संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले थाने को भेजा जाता है।
- इससे शिकायत दर्ज कराने में देरी नहीं होती।
- जांच संबंधित क्षेत्र की पुलिस आगे बढ़ाती है।
सोशल मीडिया से जुड़े मामलों में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी पोस्ट, वीडियो या सामग्री की जांच तकनीकी आधार पर की जाती है और उसके बाद ही जिम्मेदारी तय की जाती है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने तक किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाता।
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पीएम मोदी के कथित एडिटेड वीडियो मामले में कार्रवाई तेज, मेटा इंडिया हेड समेत कई पर FIR दर्ज
बिजनेस डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कथित एडिटेड वीडियो के मामले में पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है। हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए कथित आपत्तिजनक और मॉर्फ्ड वीडियो को लेकर दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों के साथ मेटा इंडिया के प्रमुख को भी सह-आरोपी के रूप में नामजद किया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश के नोएडा में प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी किए जाने के आरोप में एक महिला के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। दोनों मामलों की जांच अलग-अलग एजेंसियों द्वारा की जा रही है और पुलिस ने संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायतों के आधार पर की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री से जुड़े कथित रूप से एडिट किए गए वीडियो प्रसारित किए गए, जिनमें आपत्तिजनक सामग्री का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं। शुरुआती जांच में जिन सोशल मीडिया अकाउंट्स से कथित सामग्री साझा की गई, उनके संचालकों को आरोपी बनाया गया है। साथ ही मेटा इंडिया के प्रमुख को दोनों मामलों में सह-आरोपी के रूप में शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि यह कदम जांच प्रक्रिया के तहत उठाया गया है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
मामले की प्रमुख बातें
- हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की।
- सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों को आरोपी बनाया गया।
- मेटा इंडिया हेड को सह-आरोपी के रूप में नामजद किया गया।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) और IT Act के तहत कार्रवाई।
- मेटा को नोटिस जारी कर संबंधित जानकारी मांगी गई।
पुलिस जांच के अनुसार, यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक छात्र प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित वीडियो से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रदर्शन से जुड़े कुछ वीडियो को एडिट कर प्रधानमंत्री को लेकर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने की शिकायत मिली थी। इसके बाद साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और संबंधित लिंक तथा सोशल मीडिया पोस्ट की पड़ताल की। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित वीडियो किसने तैयार किया, किसने साझा किया और इसके प्रसार में किन-किन खातों की भूमिका रही।
जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आवश्यक सूचना उपलब्ध कराने के लिए नोटिस भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जानकारी मिलने के बाद आरोपियों की पहचान और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा रहा है और साइबर विशेषज्ञ भी जांच में सहयोग कर रहे हैं।
जांच में पुलिस की कार्रवाई
- सोशल मीडिया लिंक और पोस्ट की तकनीकी जांच।
- संबंधित प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी।
- डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जा रहे हैं।
- आरोपियों की पहचान की प्रक्रिया जारी।
- साइबर विशेषज्ञों की मदद से जांच आगे बढ़ रही है।
इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में नोएडा पुलिस ने प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में एक महिला के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की है। शिकायत के अनुसार, दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान महिला ने प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। शिकायत मिलने के बाद एक्सप्रेसवे थाने में मामला दर्ज किया गया। चूंकि घटना दूसरे क्षेत्र से संबंधित बताई गई है, इसलिए इसे जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज कर आगे की जांच के लिए संबंधित पुलिस इकाई को भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कथित टिप्पणी से संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने, समाज में वैमनस्य फैलाने और शांति व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जीरो एफआईआर क्या होती है?
- किसी भी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
- घटना उसी थाना क्षेत्र की होना जरूरी नहीं।
- बाद में मामला संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले थाने को भेजा जाता है।
- इससे शिकायत दर्ज कराने में देरी नहीं होती।
- जांच संबंधित क्षेत्र की पुलिस आगे बढ़ाती है।
सोशल मीडिया से जुड़े मामलों में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी पोस्ट, वीडियो या सामग्री की जांच तकनीकी आधार पर की जाती है और उसके बाद ही जिम्मेदारी तय की जाती है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने तक किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाता।
