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7 साल बाद भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग, सितंबर में BRICS समिट के लिए दिल्ली आने की तैयारी
Digital Desk
12-13 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति के शामिल होने की उम्मीद; गलवान तनाव के बाद भारत का यह पहला दौरा हो सकता है
भारत और चीन के रिश्तों के लिहाज से सितंबर 2026 बेहद अहम साबित हो सकता है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आने की संभावना है। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को प्रस्तावित 18वें BRICS Leaders' Summit की मेजबानी भारत करेगा। अगर शी का दौरा तय कार्यक्रम के मुताबिक होता है, तो करीब सात साल बाद वे भारत की यात्रा करेंगे।
शी जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी के बीच तमिलनाडु के मामल्लपुरम में अनौपचारिक शिखर वार्ता हुई थी। इसके बाद जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प ने दोनों देशों के संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया। वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर तनाव बढ़ने के साथ दोनों देशों ने सीमावर्ती इलाकों में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की।
SCO बैठक में दिया गया था न्योता
सरकारी अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग को भारत में होने वाले BRICS सम्मेलन का निमंत्रण दिया था। इसके बाद चीनी पक्ष की ओर से भारत की BRICS अध्यक्षता को समर्थन देने के संकेत मिले।
हालांकि शी जिनपिंग की यात्रा का विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में उनके दौरे की अंतिम पुष्टि दोनों देशों की औपचारिक घोषणा के बाद ही होगी।
गलवान के बाद रिश्तों में आया था लंबा तनाव
2020 की गलवान घाटी की घटना के बाद नई दिल्ली और बीजिंग के बीच राजनीतिक और सैन्य स्तर पर संबंध काफी तनावपूर्ण रहे। सीमा विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों के सैन्य कमांडरों और राजनयिक अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई।
अक्टूबर 2024 में कुछ विवादित क्षेत्रों को लेकर सैनिकों के पीछे हटने की सहमति को संबंध सामान्य करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिशें तेज हुईं। प्रत्यक्ष हवाई सेवाओं को धीरे-धीरे बहाल करने, वीजा प्रक्रिया आसान करने और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बातचीत बढ़ाने जैसे कदम भी इस प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं।
इसके बावजूद LAC से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दे अब भी भारत-चीन संबंधों के केंद्र में हैं। दोनों देशों की सैन्य मौजूदगी और सीमा सुरक्षा से जुड़े विषय द्विपक्षीय वार्ता में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
BRICS मंच पर जुट सकते हैं कई बड़े नेता
भारत में होने वाला यह सम्मेलन इसलिए भी अहम होगा क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में BRICS का विस्तार हुआ है। शिखर सम्मेलन में रूस समेत संगठन के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और नई तकनीकों जैसे विषय प्रमुखता से उठ सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, सप्लाई चेन और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग भी एजेंडे का हिस्सा बनने की संभावना है।
मोदी-शी मुलाकात पर रहेंगी निगाहें
शी जिनपिंग भारत आते हैं तो सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी संभावित बातचीत पर रहेगी। गलवान घटना के बाद दोनों नेताओं की अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान मुलाकातें हुई हैं, लेकिन भारत में होने वाली आमने-सामने की उच्चस्तरीय बातचीत का कूटनीतिक महत्व अलग होगा।
संभावित बातचीत में सीमा पर शांति बनाए रखने, द्विपक्षीय संपर्क बढ़ाने और आर्थिक संबंधों से जुड़े विषय सामने आ सकते हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक मतभेद बने रहने के बावजूद हाल के वर्षों में संवाद के रास्ते खुले रखने पर जोर दिया गया है।
वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की मेजबानी
भारत ऐसे समय BRICS सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है, जब दुनिया व्यापारिक तनाव, पश्चिम एशिया के संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने और वैश्विक संस्थाओं में उनकी भूमिका मजबूत करने के मुद्दे BRICS की बैठकों में लगातार प्रमुखता हासिल कर रहे हैं।
नई दिल्ली में सम्मेलन की तैयारियां आने वाले हफ्तों में और तेज होने की संभावना है। सदस्य देशों के नेताओं की भागीदारी और द्विपक्षीय बैठकों का विस्तृत कार्यक्रम आधिकारिक स्तर पर तय होने के बाद सामने आएगा।
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7 साल बाद भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग, सितंबर में BRICS समिट के लिए दिल्ली आने की तैयारी
Digital Desk
भारत और चीन के रिश्तों के लिहाज से सितंबर 2026 बेहद अहम साबित हो सकता है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आने की संभावना है। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को प्रस्तावित 18वें BRICS Leaders' Summit की मेजबानी भारत करेगा। अगर शी का दौरा तय कार्यक्रम के मुताबिक होता है, तो करीब सात साल बाद वे भारत की यात्रा करेंगे।
शी जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी के बीच तमिलनाडु के मामल्लपुरम में अनौपचारिक शिखर वार्ता हुई थी। इसके बाद जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प ने दोनों देशों के संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया। वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर तनाव बढ़ने के साथ दोनों देशों ने सीमावर्ती इलाकों में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की।
SCO बैठक में दिया गया था न्योता
सरकारी अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग को भारत में होने वाले BRICS सम्मेलन का निमंत्रण दिया था। इसके बाद चीनी पक्ष की ओर से भारत की BRICS अध्यक्षता को समर्थन देने के संकेत मिले।
हालांकि शी जिनपिंग की यात्रा का विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में उनके दौरे की अंतिम पुष्टि दोनों देशों की औपचारिक घोषणा के बाद ही होगी।
गलवान के बाद रिश्तों में आया था लंबा तनाव
2020 की गलवान घाटी की घटना के बाद नई दिल्ली और बीजिंग के बीच राजनीतिक और सैन्य स्तर पर संबंध काफी तनावपूर्ण रहे। सीमा विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों के सैन्य कमांडरों और राजनयिक अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई।
अक्टूबर 2024 में कुछ विवादित क्षेत्रों को लेकर सैनिकों के पीछे हटने की सहमति को संबंध सामान्य करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिशें तेज हुईं। प्रत्यक्ष हवाई सेवाओं को धीरे-धीरे बहाल करने, वीजा प्रक्रिया आसान करने और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बातचीत बढ़ाने जैसे कदम भी इस प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं।
इसके बावजूद LAC से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दे अब भी भारत-चीन संबंधों के केंद्र में हैं। दोनों देशों की सैन्य मौजूदगी और सीमा सुरक्षा से जुड़े विषय द्विपक्षीय वार्ता में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
BRICS मंच पर जुट सकते हैं कई बड़े नेता
भारत में होने वाला यह सम्मेलन इसलिए भी अहम होगा क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में BRICS का विस्तार हुआ है। शिखर सम्मेलन में रूस समेत संगठन के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और नई तकनीकों जैसे विषय प्रमुखता से उठ सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, सप्लाई चेन और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग भी एजेंडे का हिस्सा बनने की संभावना है।
मोदी-शी मुलाकात पर रहेंगी निगाहें
शी जिनपिंग भारत आते हैं तो सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी संभावित बातचीत पर रहेगी। गलवान घटना के बाद दोनों नेताओं की अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान मुलाकातें हुई हैं, लेकिन भारत में होने वाली आमने-सामने की उच्चस्तरीय बातचीत का कूटनीतिक महत्व अलग होगा।
संभावित बातचीत में सीमा पर शांति बनाए रखने, द्विपक्षीय संपर्क बढ़ाने और आर्थिक संबंधों से जुड़े विषय सामने आ सकते हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक मतभेद बने रहने के बावजूद हाल के वर्षों में संवाद के रास्ते खुले रखने पर जोर दिया गया है।
वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की मेजबानी
भारत ऐसे समय BRICS सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है, जब दुनिया व्यापारिक तनाव, पश्चिम एशिया के संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने और वैश्विक संस्थाओं में उनकी भूमिका मजबूत करने के मुद्दे BRICS की बैठकों में लगातार प्रमुखता हासिल कर रहे हैं।
नई दिल्ली में सम्मेलन की तैयारियां आने वाले हफ्तों में और तेज होने की संभावना है। सदस्य देशों के नेताओं की भागीदारी और द्विपक्षीय बैठकों का विस्तृत कार्यक्रम आधिकारिक स्तर पर तय होने के बाद सामने आएगा।
