मुंबई। अडाणी पावर लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी के मुनाफे और आय में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी का कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 19% घटकर 2,479 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹3,057 करोड़ था।
तिमाही नतीजों के अनुसार, अडाणी पावर का संचालन से रेवेन्यू भी दबाव में रहा। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कंपनी की कुल आय 12,451 करोड़ रही, जो एक साल पहले इसी अवधि में 13,671 करोड़ थी। इस तरह सालाना आधार पर रेवेन्यू में करीब 9% की गिरावट दर्ज की गई। ऊर्जा मांग में उतार-चढ़ाव और टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों को इस गिरावट की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है।
हालांकि मुनाफा और रेवेन्यू घटने के बावजूद ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर रहा। तिमाही के दौरान अडाणी पावर ने 23.6 अरब यूनिट बिजली की बिक्री की, जो पिछले साल इसी अवधि में 23.3 अरब यूनिट थी। लंबे समय तक चले मानसून के बावजूद बिजली बिक्री में आई यह मामूली बढ़त कंपनी के परिचालन प्रबंधन को दर्शाती है।
इस तिमाही में कंपनी के कर्ज में बढ़ोतरी भी देखने को मिली है। नए प्रोजेक्ट्स और विस्तार से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए लिए गए ब्रिज लोन के कारण कुल कर्ज बढ़कर ₹45,330 करोड़ हो गया है। मार्च 2025 के अंत में यह आंकड़ा ₹38,334 करोड़ था। हालांकि कंपनी की ओर से यह संकेत दिया गया है कि नकदी की स्थिति मजबूत बनी हुई है और कर्ज प्रबंधन पर नजर रखी जा रही है।
भविष्य की रणनीति के लिहाज से कंपनी को असम से एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला है। राज्य की बिजली वितरण कंपनी के साथ 3,200 मेगावाट की बिजली आपूर्ति के लिए लंबी अवधि का समझौता किया गया है। इस कॉन्ट्रैक्ट को कंपनी के विस्तार की दिशा में अहम माना जा रहा है। मौजूदा योजनाओं के तहत प्रस्तावित विस्तार क्षमता का एक बड़ा हिस्सा पहले ही बुक हो चुका है।
कॉन्सोलिडेटेड नतीजों के जरिए पूरे ग्रुप के प्रदर्शन की तस्वीर सामने आती है, जिसमें सभी सहायक इकाइयों का वित्तीय डेटा शामिल होता है। इससे निवेशकों को कंपनी की वास्तविक आर्थिक स्थिति का बेहतर आकलन करने में मदद मिलती है।
अडाणी पावर देश की प्रमुख निजी क्षेत्र की थर्मल पावर कंपनियों में शामिल है और इसके पास 15,250 मेगावाट की कुल उत्पादन क्षमता है। कंपनी के थर्मल प्लांट्स देश के कई राज्यों में संचालित हैं, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा के तहत गुजरात में सोलर क्षमता भी मौजूद है।
आगे की स्थिति की बात करें तो ऊर्जा मांग, ईंधन लागत और नियामकीय माहौल आने वाली तिमाहियों में कंपनी के प्रदर्शन की दिशा तय करेंगे। फिलहाल, निवेशकों की नजर कंपनी की विस्तार योजनाओं और कर्ज प्रबंधन पर बनी हुई है, जो आने वाले समय में इसके वित्तीय स्वास्थ्य के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
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