प्लास्टिक बोतल में शराब पर मंत्री का बयान बना विवाद की वजह

दुर्ग-भिलाई (छ.ग.)

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कृषि मंत्री रामविचार नेताम बोले—कैंसर का असर है या नहीं, अनुभव के बाद ही कुछ कह सकूंगा

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्लास्टिक बोतलों में शराब बिक्री के फैसले के बीच कृषि मंत्री रामविचार नेताम की एक टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। दुर्ग में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री नेताम ने प्लास्टिक बोतल में बिकने वाली शराब से कैंसर होने की आशंका पर सवाल पूछे जाने पर कहा कि उन्हें इसका अनुभव नहीं है और “अनुभव लेकर ही बता पाएंगे”। उनके इस बयान को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

यह बयान गुरुवार को दुर्ग स्थित कामधेनु विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के बाद सामने आया। पत्रकारों ने मंत्री से पर्यावरणविदों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जताई जा रही चिंताओं पर सवाल किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक बोतलों में रखी शराब से हानिकारक रसायन रिस सकते हैं, जो लंबे समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसी संदर्भ में पूछे गए सवाल पर मंत्री नेताम ने हंसते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि प्लास्टिक या कांच की बोतल में रखी शराब से कैंसर होता है या नहीं, और वे इस पर अनुभव के बाद ही कुछ कह सकेंगे।

सरकारी फैसले की पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में शराब की पैकेजिंग में बदलाव करते हुए कुछ श्रेणियों में प्लास्टिक बोतलों के उपयोग का निर्णय लिया है। सरकार का तर्क है कि इससे लागत में कमी आएगी और वितरण व्यवस्था आसान होगी। हालांकि, इस फैसले के बाद से पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि प्लास्टिक बोतलें न केवल पर्यावरण के लिए खतरा हैं, बल्कि अल्कोहल के संपर्क में आने पर इनमें मौजूद रसायन मानव शरीर के लिए और अधिक नुकसानदेह हो सकते हैं।

विपक्ष का हमला, जिम्मेदारी पर सवाल
मंत्री के बयान के सामने आते ही विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। विपक्षी नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और संवेदनहीन टिप्पणी बताया। उनका कहना है कि एक जिम्मेदार मंत्री से यह अपेक्षा की जाती है कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दे पर तथ्य और वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर बात करे, न कि हल्के-फुल्के अंदाज में।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय आया है, जब सरकार पहले से ही शराब नीति को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही है। इससे पहले भी मंत्री नेताम सार्वजनिक मंचों पर दिए गए कुछ बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं। ऐसे में यह टिप्पणी सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी चिंता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शराब जैसी रासायनिक संरचना वाले पदार्थों को प्लास्टिक में लंबे समय तक रखना सुरक्षित नहीं माना जाता। खासकर उच्च तापमान में प्लास्टिक से रसायन निकलने की आशंका और बढ़ जाती है। वहीं, पर्यावरणविदों का तर्क है कि प्लास्टिक बोतलों का बढ़ता उपयोग कचरा प्रबंधन की समस्या को और गंभीर करेगा।

फिलहाल, मंत्री के बयान पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। लेकिन यह मुद्दा एक बार फिर शराब नीति, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे सवालों को केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या प्लास्टिक बोतलों में शराब बिक्री के फैसले पर पुनर्विचार किया जाता है।

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