छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां मां की फटकार से आहत होकर एक 20 वर्षीय छात्रा ने आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान आरती टंडन के रूप में हुई है, जो बीए प्रथम वर्ष की छात्रा थी। घटना बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र के घुड़देवा इलाके की है, जहां गुरुवार सुबह नाना के पुराने और बंद पड़े क्वार्टर में युवती का शव दुपट्टे के फंदे से लटका मिला।
पुलिस के अनुसार, यह घटना 28–29 जनवरी की दरम्यानी रात की है। परिजनों ने बताया कि घटना वाले दिन घर के काम को लेकर आरती की मां ने उसे डांटा था। इसके बाद वह नाराज होकर कॉलेज जाने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटी। परिजनों को जब काफी देर तक उसका कोई पता नहीं चला तो उन्होंने उसकी तलाश शुरू की।
नाना के बंद क्वार्टर में मिला शव
तलाश के दौरान परिजनों को यह बात खटकने लगी कि नाना के पुराने क्वार्टर की चाबी घर में नहीं थी। यह क्वार्टर बांकीमोंगरा के घुड़देवा इलाके में स्थित है, जो लंबे समय से बंद पड़ा था। शक होने पर परिजन वहां पहुंचे। दरवाजा अंदर से बंद मिला। मृतका के भाई ने दीवार फांदकर अंदर प्रवेश किया, जहां पंखे से दुपट्टे के सहारे आरती का शव लटका हुआ मिला।
सूचना मिलने पर बांकीमोंगरा पुलिस मौके पर पहुंची। शव को फंदे से उतारकर पंचनामा किया गया और पोस्टमार्टम के लिए SECL अस्पताल की मर्चुरी भेजा गया। गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
परिवार और पृष्ठभूमि
आरती टंडन मूल रूप से जांजगीर-चांपा जिले के गुमिया गांव की रहने वाली थी। उसके पिता अजीत टंडन ने बताया कि वह कोरबा में रहकर कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी। आरती बचपन से ही अपने नाना अमृत टंडन के साथ उसी क्वार्टर में रहती थी। नाना के SECL से रिटायर होने के बाद परिवार गांव चला गया था, जिसके बाद यह क्वार्टर खाली और बंद था।
पिता ने बताया कि मां की फटकार केवल समझाने के उद्देश्य से थी और किसी को यह अंदेशा नहीं था कि आरती इतना बड़ा कदम उठा लेगी। परिवार इस घटना से गहरे सदमे में है।
पुलिस जांच और आगे की स्थिति
पुलिस ने मौके से मृतका का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और कॉल डिटेल्स व अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। फिलहाल, मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संवाद और युवाओं पर पड़ने वाले भावनात्मक दबाव जैसे गंभीर मुद्दों की ओर ध्यान दिलाती है।
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