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जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत आज: शुक्र प्रदोष पर विशेष संयोग, शुभ मुहूर्त में शिव आराधना का महत्व
धर्म डेस्क
30 जनवरी, शुक्रवार को माघ शुक्ल त्रयोदशी पर शुक्र प्रदोष व्रत, प्रदोष काल में पूजा से धन, सौभाग्य और शांति की कामना
हिंदू पंचांग के अनुसार आज जनवरी महीने का अंतिम प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। यह व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ रहा है और शुक्रवार के कारण इसे विशेष रूप से शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस संयोग को अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धालु आज भगवान शिव की आराधना कर सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करेंगे।
पंचांग के मुताबिक त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 30 जनवरी को सुबह 11:09 बजे हुई है और इसका समापन 31 जनवरी को सुबह 8:25 बजे होगा। प्रदोष व्रत का पालन उदयातिथि और प्रदोष काल के आधार पर किया जाता है, इसलिए यह व्रत आज शुक्रवार को ही रखा गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि प्रदोष काल में की गई शिव पूजा शीघ्र फल प्रदान करती है।
धार्मिक गणना के अनुसार आज प्रदोष काल शाम 5:59 बजे से रात 8:37 बजे तक रहेगा। इस दौरान करीब ढाई घंटे तक भगवान शिव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद मुद्रा में रहते हैं और भक्तों की सच्ची प्रार्थना को स्वीकार करते हैं।
शुक्र प्रदोष व्रत को विशेष रूप से धन, वैवाहिक सुख और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, जिससे जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं का विस्तार होता है। यही कारण है कि यह व्रत विशेष रूप से गृहस्थ जीवन से जुड़ी कामनाओं के लिए रखा जाता है।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं। प्रदोष काल में पुनः शुद्ध होकर शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक कर बेलपत्र, सफेद फूल और धतूरा अर्पित किए जाते हैं। इस दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप और प्रदोष व्रत कथा का पाठ किया जाता है। अंत में भगवान शिव की आरती कर व्रत पूर्ण किया जाता है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार प्रदोष व्रत केवल एक उपवास नहीं, बल्कि आत्मसंयम और श्रद्धा का प्रतीक है। यह व्रत व्यक्ति को धैर्य, संतुलन और सकारात्मकता की ओर प्रेरित करता है। विशेषकर शुक्र प्रदोष को जीवन में संतुलन, प्रेम और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
देश के विभिन्न हिस्सों में शिव मंदिरों में आज विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास के साथ जनवरी का यह अंतिम प्रदोष व्रत धार्मिक वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना रहा है।
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