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उज्जैन में RTO के फैसले के विरोध में 100 से अधिक बसें खड़ी, स्लीपर कोच पर रोक से हंगामा
उज्जैन (म.प्र.)
अचानक कार्रवाई से टूरिस्ट बस ऑपरेटर नाराज, धार्मिक यात्राएं और शादी-ब्याह का आवागमन प्रभावित
उज्जैन। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) द्वारा स्लीपर कोच बसों पर अचानक रोक लगाए जाने के विरोध में गुरुवार को उज्जैन में टूरिस्ट बस ऑपरेटरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित ऑपरेटरों ने विरोध स्वरूप 100 से अधिक बसें सामाजिक न्याय परिसर में खड़ी कर दीं, जिससे पूरे दिन माहौल तनावपूर्ण बना रहा। इस विरोध का सीधा असर आम यात्रियों, धार्मिक यात्राओं और शादी-ब्याह से जुड़े आवागमन पर भी देखने को मिला।
टूरिस्ट बस ऑपरेटर एसोसिएशन का कहना है कि RTO ने बिना पूर्व सूचना या किसी वैकल्पिक व्यवस्था के स्लीपर कोच बसों का संचालन बंद कर दिया। जिन बसों पर रोक लगाई गई है, वे पहले से ही RTO द्वारा विधिवत फिटनेस पास और पंजीकृत थीं। ऐसे में अचानक लिया गया यह फैसला न केवल व्यावसायिक रूप से नुकसानदायक है, बल्कि नैतिक रूप से भी उचित नहीं है।
ऑपरेटरों के अनुसार, स्लीपर कोच बसें लंबे समय से धार्मिक यात्राओं, टूर पैकेज, बारात और अन्य सामाजिक आयोजनों में उपयोग की जा रही थीं। रोक के बाद टूरिस्ट एजेंट, ड्राइवर, कंडक्टर, गाइड और सहायक स्टाफ के साथ-साथ धर्म यात्रा से जुड़े छोटे व्यवसायों पर भी संकट खड़ा हो गया है। हजारों परिवारों की आजीविका इन बसों पर निर्भर है, जो अब अचानक ठप पड़ती नजर आ रही है।
बस ऑपरेटरों ने बताया कि जिन बसों को अब रोका गया है, उन्हें वर्ष 2019 में 2x2 सीट व्यवस्था के साथ फिजिकल जांच के बाद फिटनेस प्रमाणपत्र दिया गया था। इन बसों का पंजीकरण भी नियमित रूप से होता रहा और दिसंबर 2025 तक वैध रजिस्ट्रेशन जारी था। अब कुछ घटनाओं का हवाला देते हुए RTO ने सभी स्लीपर कोच बसों को 2x1 सीट व्यवस्था में बदलने का निर्देश दिया है।
ऑपरेटरों का कहना है कि यदि बसों को नए नियमों के अनुसार मॉडिफाई कराया जाता है, तो एक बस पर लगभग 7 से 10 लाख रुपये तक का खर्च आएगा। इसके अलावा, इस प्रक्रिया में समय भी लगेगा। उज्जैन जिले में ही ऐसी करीब 839 बसें हैं, जिन्हें फिलहाल ब्लॉक कर दिया गया है। प्रदेशभर में यह संख्या लगभग 8 हजार बताई जा रही है। इतने बड़े पैमाने पर बसों के बंद होने से परिवहन व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
प्रदर्शन कर रहे ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि वे सुरक्षा मानकों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन नियमों में बदलाव के लिए पर्याप्त समय और व्यावहारिक समाधान दिया जाना चाहिए।
एसोसिएशन ने परिवहन विभाग और प्रशासन से मांग की है कि स्लीपर कोच बसों पर लगाई गई रोक को अस्थायी रूप से हटाया जाए और सभी हितधारकों से चर्चा कर संतुलित फैसला लिया जाए। फिलहाल, बसों के खड़े हो जाने से उज्जैन में धार्मिक यात्राओं और सामाजिक आयोजनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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