ईरान हिंसा से लौटे भारतीयों की आपबीती: दिल्ली एयरपोर्ट पर परिवार से मिलते ही फूट-फूटकर रोए

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28 दिसंबर से जारी हिंसा में फंसे थे छात्र; बोले— इंटरनेट बंद, डर के साए में गुजारे दिन, हालात बेहद बदतर

ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच वहां फंसे भारतीय नागरिक शुक्रवार देर रात दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। जैसे ही वे अपने परिजनों से मिले, भावनाएं काबू में नहीं रहीं। कई लोग गले लगकर फूट-फूटकर रोते दिखे। लौटने वालों में ज्यादातर छात्र थे, जो बीते एक महीने से ईरान में असुरक्षा और डर के माहौल में फंसे हुए थे।

ईरान से लौटे जम्मू-कश्मीर के एक युवक ने बताया कि हालात लगातार बिगड़ते जा रहे थे। “बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया था। हर जगह विरोध-प्रदर्शन और गोलीबारी की खबरें थीं,” उसने कहा। कई छात्रों ने बताया कि इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद होने से परिवार से संपर्क टूट गया था, जिससे मानसिक दबाव और बढ़ गया।

दिल्ली पहुंचे मेडिकल छात्र अर्श दहरा ने बताया कि भारतीय दूतावास ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन सीमित उड़ानों के चलते उन्होंने निजी फ्लाइट से अपने खर्च पर भारत लौटने का फैसला किया। एक अन्य छात्र ने कहा कि वे लगभग एक महीने तक तेहरान में फंसे रहे। “घर से बाहर निकलते ही प्रदर्शनकारी रास्ता रोक लेते थे। कई बार गाड़ियों पर पत्थर भी फेंके गए,” उसने बताया।

ईरान में 28 दिसंबर 2025 को महंगाई और आर्थिक संकट के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुए थे। ईरानी मुद्रा रियाल के ऐतिहासिक रूप से कमजोर होने और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया। देखते ही देखते प्रदर्शन देश के सभी 31 प्रांतों में फैल गए। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, अब तक 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में लोग गोलीबारी का शिकार हुए।

14 जनवरी को ईरान ने अस्थायी रूप से अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था, जिससे विदेशी नागरिकों की वापसी और मुश्किल हो गई। अगले दिन एयरस्पेस खुलने के बाद भारतीय नागरिकों की वापसी शुरू हो सकी।

सरकारी प्रतिक्रिया और कदम
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ईरान में इस समय करीब 9,000 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें अधिकांश छात्र हैं। हालात को देखते हुए सभी को उपलब्ध साधनों से देश छोड़ने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने ईरान में मौजूद भारतीयों के लिए हेल्पलाइन नंबर और ईमेल एड्रेस भी जारी किए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में हालात फिलहाल स्थिर होने के संकेत नहीं दे रहे। अंतरराष्ट्रीय तनाव और आंतरिक असंतोष के बीच वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी भारत सरकार के लिए प्राथमिकता बनी हुई है। दिल्ली एयरपोर्ट पर लौटे नागरिकों की आंखों में राहत साफ दिखी—क्योंकि डर और अनिश्चितता के लंबे दौर के बाद वे आखिरकार घर लौट पाए।

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17 Jan 2026 By Nitin Trivedi

ईरान हिंसा से लौटे भारतीयों की आपबीती: दिल्ली एयरपोर्ट पर परिवार से मिलते ही फूट-फूटकर रोए

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ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच वहां फंसे भारतीय नागरिक शुक्रवार देर रात दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। जैसे ही वे अपने परिजनों से मिले, भावनाएं काबू में नहीं रहीं। कई लोग गले लगकर फूट-फूटकर रोते दिखे। लौटने वालों में ज्यादातर छात्र थे, जो बीते एक महीने से ईरान में असुरक्षा और डर के माहौल में फंसे हुए थे।

ईरान से लौटे जम्मू-कश्मीर के एक युवक ने बताया कि हालात लगातार बिगड़ते जा रहे थे। “बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया था। हर जगह विरोध-प्रदर्शन और गोलीबारी की खबरें थीं,” उसने कहा। कई छात्रों ने बताया कि इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद होने से परिवार से संपर्क टूट गया था, जिससे मानसिक दबाव और बढ़ गया।

दिल्ली पहुंचे मेडिकल छात्र अर्श दहरा ने बताया कि भारतीय दूतावास ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन सीमित उड़ानों के चलते उन्होंने निजी फ्लाइट से अपने खर्च पर भारत लौटने का फैसला किया। एक अन्य छात्र ने कहा कि वे लगभग एक महीने तक तेहरान में फंसे रहे। “घर से बाहर निकलते ही प्रदर्शनकारी रास्ता रोक लेते थे। कई बार गाड़ियों पर पत्थर भी फेंके गए,” उसने बताया।

ईरान में 28 दिसंबर 2025 को महंगाई और आर्थिक संकट के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुए थे। ईरानी मुद्रा रियाल के ऐतिहासिक रूप से कमजोर होने और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया। देखते ही देखते प्रदर्शन देश के सभी 31 प्रांतों में फैल गए। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, अब तक 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में लोग गोलीबारी का शिकार हुए।

14 जनवरी को ईरान ने अस्थायी रूप से अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था, जिससे विदेशी नागरिकों की वापसी और मुश्किल हो गई। अगले दिन एयरस्पेस खुलने के बाद भारतीय नागरिकों की वापसी शुरू हो सकी।

सरकारी प्रतिक्रिया और कदम
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ईरान में इस समय करीब 9,000 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें अधिकांश छात्र हैं। हालात को देखते हुए सभी को उपलब्ध साधनों से देश छोड़ने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने ईरान में मौजूद भारतीयों के लिए हेल्पलाइन नंबर और ईमेल एड्रेस भी जारी किए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में हालात फिलहाल स्थिर होने के संकेत नहीं दे रहे। अंतरराष्ट्रीय तनाव और आंतरिक असंतोष के बीच वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी भारत सरकार के लिए प्राथमिकता बनी हुई है। दिल्ली एयरपोर्ट पर लौटे नागरिकों की आंखों में राहत साफ दिखी—क्योंकि डर और अनिश्चितता के लंबे दौर के बाद वे आखिरकार घर लौट पाए।

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