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LPG संकट का असर: स्विगी-जोमैटो पर ऑर्डर 60% तक घटे, कई रेस्टोरेंट बंद
बिजनेस न्यूज
कॉमर्शियल LPG सिलेंडर की कमी से क्लाउड किचन और रेस्टोरेंट प्रभावित; फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर घटे, गिग वर्कर्स ने सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की
कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर अब देश की फूड डिलीवरी इंडस्ट्री पर साफ दिखाई देने लगा है। कई शहरों में गैस सप्लाई बाधित होने के कारण रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन सीमित मेन्यू के साथ काम कर रहे हैं या अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं। इसका सीधा असर ऑनलाइन फूड ऑर्डर पर पड़ा है, जहां स्विगी और जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर में तेज गिरावट दर्ज की जा रही है।
डिलीवरी पार्टनर्स के अनुसार पहले जहां एक दिन में 25 से 30 तक ऑर्डर मिल जाते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 5 से 10 के बीच रह गई है। गैस की कमी के कारण कई रेस्टोरेंट ने अपने मेन्यू से ऐसे व्यंजन हटा दिए हैं जिनमें ज्यादा गैस की खपत होती है। रोटी, डोसा और पूरी जैसे आइटम कई जगहों पर उपलब्ध नहीं हैं, जिससे ग्राहकों के पास सीमित विकल्प बच रहे हैं और ऑर्डर कम हो रहे हैं।
गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन का कहना है कि फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर कैंसिलेशन की दर 50 से 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यूनियन के अनुसार इससे हजारों डिलीवरी पार्टनर्स की आय पर सीधा असर पड़ा है। कई डिलीवरी पार्टनर्स जो पहले पूरे दिन में ज्यादा डिलीवरी करके बेहतर कमाई कर लेते थे, अब मुश्किल से चार से पांच डिलीवरी ही कर पा रहे हैं।
स्थिति को देखते हुए यूनियन ने सरकार के सामने कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं। इसमें प्रभावित गिग वर्कर्स को तत्काल 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने, डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर आईडी डिएक्टिवेशन पर कम से कम तीन महीने की रोक लगाने और इस अवधि में न्यूनतम आय या इंसेंटिव सुनिश्चित करने की मांग शामिल है। इसके अलावा गैस संकट से प्रभावित डिलीवरी पार्टनर्स, क्लाउड किचन कर्मचारियों और छोटे फूड कारोबारियों के लिए राहत पैकेज देने की भी मांग की गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक क्विक सर्विस रेस्टोरेंट यानी क्यूएसआर सेक्टर की कुकिंग का बड़ा हिस्सा एलपीजी पर निर्भर है। जेएम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार देश की प्रमुख क्यूएसआर चेन में लगभग 60 से 65 प्रतिशत कुकिंग एलपीजी से होती है। आमतौर पर इन रेस्टोरेंट्स के पास सिर्फ एक से दो सप्ताह का गैस स्टॉक रहता है, इसलिए सप्लाई में थोड़ी भी रुकावट आने पर किचन का संचालन प्रभावित होने लगता है।
मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सेक्टर देश की कुल एलपीजी खपत का करीब 8 से 10 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल करता है। यही वजह है कि कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी का असर इस पूरे सेक्टर पर तेजी से दिखाई देता है।
गैस संकट का असर अब कॉरपोरेट कैंटीन तक भी पहुंच गया है। आईटी कंपनी इंफोसिस ने अपने कई कैंपस में कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे फिलहाल घर से खाना लेकर आएं, क्योंकि कैंटीन में सीमित मेन्यू ही उपलब्ध रहेगा। कंपनी ने कर्मचारियों को भेजे ईमेल में बताया है कि कुछ भोजन बाहरी सेंट्रल किचन से मंगाया जाएगा और गैस पर बनने वाले कई फूड आइटम अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं होंगे।
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