फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंची, खाने-पीने की चीजें महंगी; वैश्विक तनाव से आगे और बढ़ने की आशंका

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जनवरी में 2.74% थी महंगाई; फूड इन्फ्लेशन 3.47% पर पहुंचा, कच्चे तेल के दाम बढ़े तो पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं

फरवरी में महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी रही। फूड इन्फ्लेशन जनवरी के 2.13% से बढ़कर फरवरी में 3.47% पर पहुंच गया। फल, सब्जियों और अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर उपभोक्ता कीमतों पर पड़ा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई की दर शहरों की तुलना में अधिक रही। ग्रामीण महंगाई जनवरी के 2.73% से बढ़कर फरवरी में 3.37% हो गई, जबकि शहरी महंगाई 2.75% से बढ़कर 3.02% दर्ज की गई।

वैश्विक तनाव से बढ़ सकता है दबाव
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल के बाजार पर पड़ सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं और 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। इससे परिवहन लागत में इजाफा होगा और इसका असर फल-सब्जियों से लेकर रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर पड़ सकता है।

महंगाई मापने के तरीके में बदलाव
फरवरी का यह आंकड़ा नए बेस ईयर (2024) के आधार पर जारी किए गए महंगाई के दूसरे आंकड़ों में शामिल है। सरकार ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की टोकरी में बदलाव करते हुए कई नए खर्चों को शामिल किया है।

नए फॉर्मूले में खाने-पीने की चीजों का वजन घटाकर 45.9% से 36.75% कर दिया गया है, जबकि हाउसिंग, बिजली और गैस जैसे खर्चों का हिस्सा बढ़ाया गया है। इसके अलावा बदलती जीवनशैली को देखते हुए ओटीटी सब्सक्रिप्शन और डिजिटल स्टोरेज जैसे खर्चों को भी उपभोक्ता टोकरी में शामिल किया गया है। वहीं वीसीआर और ऑडियो कैसेट जैसे पुराने उत्पादों को सूची से हटा दिया गया है।

RBI का अनुमान और आगे की स्थिति
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए औसत महंगाई दर लगभग 2.1% रहने का अनुमान जताया है। हालांकि अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह बढ़कर करीब 4% तक पहुंच सकती है। फिलहाल महंगाई दर आरबीआई के निर्धारित लक्ष्य 4% के भीतर बनी हुई है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि मौद्रिक नीति में तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।

महंगाई का सीधा असर आम लोगों पर
महंगाई दर 3.21% होने का मतलब है कि पिछले साल की तुलना में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में औसतन इतनी वृद्धि हुई है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी सामान की कीमत फरवरी 2025 में 100 रुपये थी, तो वही सामान फरवरी 2026 में औसतन करीब 103 रुपये के आसपास पहुंच गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों और वैश्विक बाजार की स्थिति पर ही महंगाई की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

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