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अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर 30 दिन की छूट दी, कच्चा तेल 100 डॉलर पार
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ईरान युद्ध से वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने की आशंका; बाजार स्थिर रखने के लिए अमेरिका ने सीमित मात्रा में रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी
मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी प्रशासन ने दुनिया के देशों को सीमित मात्रा में रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार यह छूट उन तेल कार्गो के लिए दी गई है जो पहले से जहाजों में लोड होकर समुद्र में फंसे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में आपूर्ति बनाए रखना और अचानक बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना है।
ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें भी तेज़ी से बढ़ी हैं। हालिया कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर मध्य पूर्व में संघर्ष लंबा चलता है तो तेल बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम अस्थायी है और इसका उद्देश्य वैश्विक सप्लाई चेन में अचानक पैदा हुई बाधाओं को कम करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुमति केवल सीमित मात्रा के तेल लेनदेन तक ही लागू होगी।
उधर क्षेत्रीय सुरक्षा हालात भी तेजी से बदल रहे हैं। इराक में अमेरिकी सेना का एक KC-135 सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। एक ईरान समर्थित विद्रोही संगठन ने दावा किया कि उसने पश्चिमी इराक में एयर डिफेंस सिस्टम से हमला कर विमान गिराया, हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि दुर्घटना किसी हमले के कारण नहीं हुई।
इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है। इजराइल की सेना के मुताबिक ईरान की ओर से कई मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें रक्षा प्रणाली ने हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके बाद संवेदनशील इलाकों में नागरिकों को अलर्ट जारी किया गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों में रहने की सलाह दी गई।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इजराइल का लक्ष्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े खतरों को खत्म करना है। उन्होंने यह भी कहा कि हालिया हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान हुआ है, हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि मौजूदा हालात में ईरान की सरकार का तुरंत गिरना तय नहीं है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र के कई मानवाधिकार विशेषज्ञों ने क्षेत्र में हो रहे हमलों पर चिंता जताई है और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील की है। उनका कहना है कि अगर संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार दोनों पर पड़ सकता है।
ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में तेल की कीमतें और सप्लाई दोनों ही भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर रहेंगी। इसलिए आने वाले हफ्तों में वैश्विक बाजार की नजर मध्य पूर्व के हालात और बड़े देशों के फैसलों पर टिकी रहेगी।
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