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रायगढ़ में फिर पकड़ी गई अवैध अफीम की खेती
रायगढ़ (छ.ग.)
रायगढ़ के लैलूंगा क्षेत्र में अवैध अफीम की खेती का खुलासा; 17 दिनों में पांचवां मामला सामने आने से प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अवैध अफीम की खेती का एक और मामला सामने आया है। लैलूंगा थाना क्षेत्र में करीब 50 डिसमिल जमीन पर उगाई जा रही अफीम की फसल को पुलिस ने बरामद किया है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है। बीते 17 दिनों में यह पांचवां मामला है, जिससे प्रशासन की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस को सूचना मिली थी कि लैलूंगा इलाके में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही है। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और खेत में लगी फसल को जब्त कर लिया। इस कार्रवाई में जगतराम नाग और मनोज नाग को गिरफ्तार किया गया, जबकि साधराम नाग मौके से फरार हो गया।
कैसे चल रहा था अवैध कारोबार?
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी पत्थलगांव के एक व्यापारी से अफीम के बीज लाकर खेती कर रहे थे। पुलिस इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, ताकि सप्लाई चेन और अन्य जुड़े लोगों का पता लगाया जा सके।
लगातार बढ़ रहे मामले
रायगढ़ में यह दूसरी बार है जब दो दिनों के भीतर अफीम की खेती पकड़ी गई है। इससे पहले 21 मार्च को तमनार ब्लॉक के आमाघाट क्षेत्र में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। वहां झारखंड के एक व्यक्ति द्वारा 10-12 वर्षों से खेती किए जाने की बात सामने आई थी।
इसके अलावा, 7 मार्च को दुर्ग और 10 व 12 मार्च को बलरामपुर जिले में भी ऐसे मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना को लेकर राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए इसे ‘अफीम स्टार्टअप’ की नई शाखा बताया। उन्होंने राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं?
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती राज्यों से बीज और तकनीक की उपलब्धता, तथा ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी की कमी के कारण इस तरह की अवैध खेती को बढ़ावा मिल रहा है। लंबे समय तक बिना पकड़े रहना इस नेटवर्क के संगठित होने की ओर इशारा करता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है। साथ ही, अन्य संभावित स्थानों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है।
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रायगढ़ में फिर पकड़ी गई अवैध अफीम की खेती
रायगढ़ (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अवैध अफीम की खेती का एक और मामला सामने आया है। लैलूंगा थाना क्षेत्र में करीब 50 डिसमिल जमीन पर उगाई जा रही अफीम की फसल को पुलिस ने बरामद किया है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है। बीते 17 दिनों में यह पांचवां मामला है, जिससे प्रशासन की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस को सूचना मिली थी कि लैलूंगा इलाके में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही है। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और खेत में लगी फसल को जब्त कर लिया। इस कार्रवाई में जगतराम नाग और मनोज नाग को गिरफ्तार किया गया, जबकि साधराम नाग मौके से फरार हो गया।
कैसे चल रहा था अवैध कारोबार?
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी पत्थलगांव के एक व्यापारी से अफीम के बीज लाकर खेती कर रहे थे। पुलिस इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, ताकि सप्लाई चेन और अन्य जुड़े लोगों का पता लगाया जा सके।
लगातार बढ़ रहे मामले
रायगढ़ में यह दूसरी बार है जब दो दिनों के भीतर अफीम की खेती पकड़ी गई है। इससे पहले 21 मार्च को तमनार ब्लॉक के आमाघाट क्षेत्र में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। वहां झारखंड के एक व्यक्ति द्वारा 10-12 वर्षों से खेती किए जाने की बात सामने आई थी।
इसके अलावा, 7 मार्च को दुर्ग और 10 व 12 मार्च को बलरामपुर जिले में भी ऐसे मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना को लेकर राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए इसे ‘अफीम स्टार्टअप’ की नई शाखा बताया। उन्होंने राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं?
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती राज्यों से बीज और तकनीक की उपलब्धता, तथा ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी की कमी के कारण इस तरह की अवैध खेती को बढ़ावा मिल रहा है। लंबे समय तक बिना पकड़े रहना इस नेटवर्क के संगठित होने की ओर इशारा करता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है। साथ ही, अन्य संभावित स्थानों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है।
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