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सीतारामन ने लोकसभा सत्र में कॉर्पोरेट कानून विधेयक पेश किया
नेशनल न्यूज
मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात पर प्रधानमंत्री आज लोकसभा में रखेंगे सरकार का पक्ष; जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त रुख
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार दोपहर 2 बजे लोकसभा में देश की स्थिति और सरकार की रणनीति पर विस्तृत बयान देंगे। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के भारत पर संभावित असर को देखते हुए यह संबोधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बिगड़े हालात का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति, खासकर तेल और गैस पर पड़ सकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री सदन को मौजूदा स्थिति, तैयारियों और आगे की रणनीति से अवगत कराएंगे। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा था, जिसके बाद यह संबोधन तय हुआ है।
प्रधानमंत्री सोमवार दोपहर 2 बजे लोकसभा में बोलेंगे। इससे पहले रविवार को उनकी अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक हुई, जो करीब साढ़े तीन घंटे चली।
कैसे संभाल रही है सरकार स्थिति?
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि देश में जमाखोरी और कालाबाजारी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाजार पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
विपक्ष का रुख
विपक्षी दलों का दावा है कि देश में एलपीजी और अन्य ऊर्जा संसाधनों की कमी की स्थिति बन रही है। उन्होंने संसद में इस पर तत्काल चर्चा की मांग की है। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि आपूर्ति सामान्य है और घबराने की जरूरत नहीं है।
28 जनवरी से मिडिल ईस्ट में संघर्ष तेज हुआ है। इसके बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ना स्वाभाविक है।
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में भी यह मुद्दा लगातार उठता रहा है। हाल के दिनों में एलपीजी कीमतों और उपलब्धता को लेकर सदन में कई बार हंगामा हो चुका है।
अन्य विधायी कामकाज
आज के सत्र में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेंगी। इस विधेयक के जरिए लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट, 2008 और कंपनी एक्ट, 2013 में बदलाव प्रस्तावित हैं।
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद संसद में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा की संभावना है। सरकार की रणनीति और विपक्ष की प्रतिक्रिया से यह तय होगा कि आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट और महंगाई जैसे मुद्दों पर सियासत किस दिशा में जाती है।
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सीतारामन ने लोकसभा सत्र में कॉर्पोरेट कानून विधेयक पेश किया
नेशनल न्यूज
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार दोपहर 2 बजे लोकसभा में देश की स्थिति और सरकार की रणनीति पर विस्तृत बयान देंगे। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के भारत पर संभावित असर को देखते हुए यह संबोधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बिगड़े हालात का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति, खासकर तेल और गैस पर पड़ सकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री सदन को मौजूदा स्थिति, तैयारियों और आगे की रणनीति से अवगत कराएंगे। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा था, जिसके बाद यह संबोधन तय हुआ है।
प्रधानमंत्री सोमवार दोपहर 2 बजे लोकसभा में बोलेंगे। इससे पहले रविवार को उनकी अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक हुई, जो करीब साढ़े तीन घंटे चली।
कैसे संभाल रही है सरकार स्थिति?
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि देश में जमाखोरी और कालाबाजारी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाजार पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
विपक्ष का रुख
विपक्षी दलों का दावा है कि देश में एलपीजी और अन्य ऊर्जा संसाधनों की कमी की स्थिति बन रही है। उन्होंने संसद में इस पर तत्काल चर्चा की मांग की है। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि आपूर्ति सामान्य है और घबराने की जरूरत नहीं है।
28 जनवरी से मिडिल ईस्ट में संघर्ष तेज हुआ है। इसके बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ना स्वाभाविक है।
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में भी यह मुद्दा लगातार उठता रहा है। हाल के दिनों में एलपीजी कीमतों और उपलब्धता को लेकर सदन में कई बार हंगामा हो चुका है।
अन्य विधायी कामकाज
आज के सत्र में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेंगी। इस विधेयक के जरिए लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट, 2008 और कंपनी एक्ट, 2013 में बदलाव प्रस्तावित हैं।
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद संसद में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा की संभावना है। सरकार की रणनीति और विपक्ष की प्रतिक्रिया से यह तय होगा कि आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट और महंगाई जैसे मुद्दों पर सियासत किस दिशा में जाती है।
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