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ट्विशा केस में लीगल एड वकीलों की भूमिका पर सवाल, पिता ने की जांच की मांग
भोपाल,(म.प्र.)
चीफ जस्टिस और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी शिकायत, आरोपी पक्ष से कथित संबंधों और पैरवी को लेकर उठाए गंभीर सवाल
एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े चर्चित मामले में अब कानूनी सहायता व्यवस्था यानी लीगल एड सिस्टम से जुड़े कुछ वकीलों की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एमपीएसएलएसए) और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विवेक रूसिया को शिकायत भेजकर मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देने के लिए नियुक्त कुछ लीगल एड वकील कथित तौर पर आरोपी पक्ष के साथ सक्रिय दिखाई दिए, जिससे निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायत में कहा गया है कि जिन वकीलों को जरूरतमंद लोगों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से नियुक्त किया गया था, वे एक ऐसे मामले में आरोपी पक्ष के करीब दिखाई दे रहे हैं, जो पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। नवनिधि शर्मा का आरोप है कि इन वकीलों की नियुक्ति उस दौरान हुई थी जब गिरिबाला सिंह भोपाल में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थीं। शिकायतकर्ता का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं लीगल एड व्यवस्था का दुरुपयोग तो नहीं हुआ।
शिकायत के साथ कुछ तस्वीरें भी संबंधित अधिकारियों को भेजी गई हैं। इनमें से एक तस्वीर को लेकर दावा किया गया है कि लीगल एड डिफेंस काउंसिल योजना से जुड़े सहायक अधिवक्ता श्रेयस सक्सेना आरोपी समर्थ सिंह के विवाह समारोह में मौजूद थे और समारोह में भाग लेते दिखाई दे रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि कोई लीगल एड पैनल से जुड़ा वकील आरोपी पक्ष के निजी संबंधों में शामिल पाया जाता है, तो उसकी भूमिका और निष्पक्षता की जांच की जानी चाहिए।
नवनिधि शर्मा ने यह भी आरोप लगाया है कि 15 मई को अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिवक्ता आरोपी पक्ष के निजी वकील के साथ अदालत में मौजूद थे। शिकायत में कहा गया है कि इस मामले में यह जांच की जानी चाहिए कि अदालत में उनकी मौजूदगी किस भूमिका में थी और क्या वह उनकी अधिकृत जिम्मेदारियों के अनुरूप थी या नहीं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मामले में चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल रीना वर्मा का नाम भी शिकायत में शामिल किया गया है। आरोप है कि 2 जून को जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, उस दौरान उन्होंने वकालतनामा प्रस्तुत किया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि आरोपी पक्ष पहले से निजी अधिवक्ताओं की सेवाएं ले रहा था, तो लीगल एड से जुड़े अधिकारियों और वकीलों की सक्रियता के कारणों की जांच की जानी चाहिए। उनका मानना है कि इससे पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।
शिकायत में दो विशेष नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। नवनिधि शर्मा का आरोप है कि गिरिबाला सिंह के कार्यकाल में नियुक्त दो लीगल एड वकील बाद में उन्हीं से जुड़े मामले में आरोपी पक्ष के साथ दिखाई दिए। शिकायत में कहा गया है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह एक गंभीर विषय है और इसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए ऐसे सभी संदेहों को स्पष्ट करना आवश्यक है।
इसके अलावा शिकायत में एक कथित कॉल रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि 12 मई की रात करीब 11 बजे राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े एक सदस्य को कॉल किया गया था। शिकायतकर्ता ने उस कॉल और उससे जुड़े तथ्यों की भी जांच कराने की मांग की है। साथ ही 15 मई को अग्रिम जमानत याचिका के दौरान हुई पैरवी और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की मांग की गई है।
शिकायत में एक अन्य अज्ञात व्यक्ति का भी जिक्र किया गया है, जो कथित तौर पर पहले एक ब्यूटी पार्लर और बाद में विवाह समारोह में दिखाई देता है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उस व्यक्ति की पहचान और पूरे मामले में उसकी भूमिका स्पष्ट की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि कोई व्यक्ति घटनाक्रम से जुड़ा है तो उसकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
नवनिधि शर्मा की ओर से अधिवक्ता अंकुर पांडे ने बताया कि शिकायत संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है और अब कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। शिकायत में लीगल एड वकीलों की भूमिका, आरोपी पक्ष के साथ कथित संबंधों, कॉल रिकॉर्ड, अग्रिम जमानत सुनवाई के दौरान हुई पैरवी और तस्वीरों में दिखाई देने वाले अन्य लोगों की पहचान की जांच की मांग की गई है।
गौरतलब है कि लीगल एड वकील उन लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और निजी वकील रखने में सक्षम नहीं होते। इनकी नियुक्ति जिला, राज्य और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से की जाती है। महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग, गरीब नागरिकों और जेल में बंद व्यक्तियों को इस व्यवस्था का लाभ दिया जाता है। इन वकीलों की फीस सरकार या संबंधित विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा वहन की जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आर्थिक स्थिति के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे।
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ट्विशा केस में लीगल एड वकीलों की भूमिका पर सवाल, पिता ने की जांच की मांग
भोपाल,(म.प्र.)
एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े चर्चित मामले में अब कानूनी सहायता व्यवस्था यानी लीगल एड सिस्टम से जुड़े कुछ वकीलों की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एमपीएसएलएसए) और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विवेक रूसिया को शिकायत भेजकर मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देने के लिए नियुक्त कुछ लीगल एड वकील कथित तौर पर आरोपी पक्ष के साथ सक्रिय दिखाई दिए, जिससे निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायत में कहा गया है कि जिन वकीलों को जरूरतमंद लोगों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से नियुक्त किया गया था, वे एक ऐसे मामले में आरोपी पक्ष के करीब दिखाई दे रहे हैं, जो पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। नवनिधि शर्मा का आरोप है कि इन वकीलों की नियुक्ति उस दौरान हुई थी जब गिरिबाला सिंह भोपाल में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थीं। शिकायतकर्ता का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं लीगल एड व्यवस्था का दुरुपयोग तो नहीं हुआ।
शिकायत के साथ कुछ तस्वीरें भी संबंधित अधिकारियों को भेजी गई हैं। इनमें से एक तस्वीर को लेकर दावा किया गया है कि लीगल एड डिफेंस काउंसिल योजना से जुड़े सहायक अधिवक्ता श्रेयस सक्सेना आरोपी समर्थ सिंह के विवाह समारोह में मौजूद थे और समारोह में भाग लेते दिखाई दे रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि कोई लीगल एड पैनल से जुड़ा वकील आरोपी पक्ष के निजी संबंधों में शामिल पाया जाता है, तो उसकी भूमिका और निष्पक्षता की जांच की जानी चाहिए।
नवनिधि शर्मा ने यह भी आरोप लगाया है कि 15 मई को अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिवक्ता आरोपी पक्ष के निजी वकील के साथ अदालत में मौजूद थे। शिकायत में कहा गया है कि इस मामले में यह जांच की जानी चाहिए कि अदालत में उनकी मौजूदगी किस भूमिका में थी और क्या वह उनकी अधिकृत जिम्मेदारियों के अनुरूप थी या नहीं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मामले में चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल रीना वर्मा का नाम भी शिकायत में शामिल किया गया है। आरोप है कि 2 जून को जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, उस दौरान उन्होंने वकालतनामा प्रस्तुत किया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि आरोपी पक्ष पहले से निजी अधिवक्ताओं की सेवाएं ले रहा था, तो लीगल एड से जुड़े अधिकारियों और वकीलों की सक्रियता के कारणों की जांच की जानी चाहिए। उनका मानना है कि इससे पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।
शिकायत में दो विशेष नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। नवनिधि शर्मा का आरोप है कि गिरिबाला सिंह के कार्यकाल में नियुक्त दो लीगल एड वकील बाद में उन्हीं से जुड़े मामले में आरोपी पक्ष के साथ दिखाई दिए। शिकायत में कहा गया है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह एक गंभीर विषय है और इसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए ऐसे सभी संदेहों को स्पष्ट करना आवश्यक है।
इसके अलावा शिकायत में एक कथित कॉल रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि 12 मई की रात करीब 11 बजे राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े एक सदस्य को कॉल किया गया था। शिकायतकर्ता ने उस कॉल और उससे जुड़े तथ्यों की भी जांच कराने की मांग की है। साथ ही 15 मई को अग्रिम जमानत याचिका के दौरान हुई पैरवी और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की मांग की गई है।
शिकायत में एक अन्य अज्ञात व्यक्ति का भी जिक्र किया गया है, जो कथित तौर पर पहले एक ब्यूटी पार्लर और बाद में विवाह समारोह में दिखाई देता है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उस व्यक्ति की पहचान और पूरे मामले में उसकी भूमिका स्पष्ट की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि कोई व्यक्ति घटनाक्रम से जुड़ा है तो उसकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
नवनिधि शर्मा की ओर से अधिवक्ता अंकुर पांडे ने बताया कि शिकायत संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है और अब कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। शिकायत में लीगल एड वकीलों की भूमिका, आरोपी पक्ष के साथ कथित संबंधों, कॉल रिकॉर्ड, अग्रिम जमानत सुनवाई के दौरान हुई पैरवी और तस्वीरों में दिखाई देने वाले अन्य लोगों की पहचान की जांच की मांग की गई है।
गौरतलब है कि लीगल एड वकील उन लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और निजी वकील रखने में सक्षम नहीं होते। इनकी नियुक्ति जिला, राज्य और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से की जाती है। महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग, गरीब नागरिकों और जेल में बंद व्यक्तियों को इस व्यवस्था का लाभ दिया जाता है। इन वकीलों की फीस सरकार या संबंधित विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा वहन की जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आर्थिक स्थिति के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे।
