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असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव प्रचार थमा, स्टालिन ने पुडुचेरी को राज्य का दर्जा देने की मांग उठाई
CHUNAV
साइलेंस पीरियड लागू; चुनाव आयोग ने प्रचार, रैलियों और डिजिटल कैंपेन पर लगाई रोक
असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार मंगलवार शाम 5 बजे थम गया। Election Commission of India ने ‘साइलेंस पीरियड’ लागू करते हुए सभी प्रकार के चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है। इन राज्यों में 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत लागू इस अवधि में किसी भी प्रकार की जनसभा, रैली, रोड शो या जनसंपर्क अभियान की अनुमति नहीं होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि टीवी, सोशल मीडिया, बल्क SMS और फोन कॉल के जरिए भी वोट मांगना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
इस बीच M. K. Stalin ने पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस मांग को लेकर गंभीर नहीं है, जबकि पुडुचेरी विधानसभा अब तक 14 बार राज्य का दर्जा देने के प्रस्ताव पारित कर चुकी है।
स्टालिन ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण पुडुचेरी को प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में कई सीमाओं का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, राज्य का दर्जा मिलने से यहां की शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकेगी और स्थानीय जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
चुनाव आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि बाहरी राजनीतिक कार्यकर्ता, जो संबंधित राज्यों के मतदाता नहीं हैं, उन्हें प्रचार समाप्त होते ही क्षेत्र छोड़ना होगा। इसका उद्देश्य निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना है।
इधर, विभिन्न राजनीतिक दलों ने अंतिम दिन प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी। केरल में मतदाता जागरूकता के लिए अधिकारियों द्वारा किए गए नवाचार भी चर्चा में रहे, जबकि असम और पुडुचेरी में स्थानीय मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहे।
चुनावी माहौल के बीच अब ध्यान मतदान की तैयारियों पर केंद्रित हो गया है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया जा रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
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असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार मंगलवार शाम 5 बजे थम गया। Election Commission of India ने ‘साइलेंस पीरियड’ लागू करते हुए सभी प्रकार के चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है। इन राज्यों में 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत लागू इस अवधि में किसी भी प्रकार की जनसभा, रैली, रोड शो या जनसंपर्क अभियान की अनुमति नहीं होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि टीवी, सोशल मीडिया, बल्क SMS और फोन कॉल के जरिए भी वोट मांगना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
इस बीच M. K. Stalin ने पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस मांग को लेकर गंभीर नहीं है, जबकि पुडुचेरी विधानसभा अब तक 14 बार राज्य का दर्जा देने के प्रस्ताव पारित कर चुकी है।
स्टालिन ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण पुडुचेरी को प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में कई सीमाओं का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, राज्य का दर्जा मिलने से यहां की शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकेगी और स्थानीय जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
चुनाव आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि बाहरी राजनीतिक कार्यकर्ता, जो संबंधित राज्यों के मतदाता नहीं हैं, उन्हें प्रचार समाप्त होते ही क्षेत्र छोड़ना होगा। इसका उद्देश्य निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना है।
इधर, विभिन्न राजनीतिक दलों ने अंतिम दिन प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी। केरल में मतदाता जागरूकता के लिए अधिकारियों द्वारा किए गए नवाचार भी चर्चा में रहे, जबकि असम और पुडुचेरी में स्थानीय मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहे।
चुनावी माहौल के बीच अब ध्यान मतदान की तैयारियों पर केंद्रित हो गया है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया जा रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
