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महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत, 29 में से 25 निगमों पर कब्जा
महाराष्ट्र
2869 सीटों के नतीजे घोषित, भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी; बीएमसी में तीन दशक पुराना सत्ता संतुलन बदला
महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने निर्णायक जीत दर्ज की है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा शुक्रवार को घोषित अंतिम परिणामों के अनुसार, राज्य के 29 नगर निगमों की कुल 2,869 सीटों में से 25 निगमों पर महायुति का स्पष्ट बहुमत हो गया है। इन नतीजों को शहरी राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, खासतौर पर मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में सत्ता संतुलन के लिहाज से।
चुनाव परिणामों के मुताबिक भाजपा ने अकेले 1,425 सीटों पर जीत हासिल की और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पार्टी ने नागपुर, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, पिंपरी-चिंचवाड़ और नासिक जैसे प्रमुख शहरी निकायों में बढ़त दर्ज की। महायुति में शामिल एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 399 सीटें, जबकि उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 167 सीटें जीतीं।
सबसे ज्यादा चर्चा मुंबई नगर निगम के नतीजों को लेकर रही। 227 वार्डों वाली बीएमसी में भाजपा ने 89 सीटें जीतकर अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। शिवसेना (शिंदे गुट) को 29 सीटें मिलीं, जबकि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) 65 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस ने 24, AIMIM ने 8, MNS ने 6 और अन्य दलों को सीमित सफलता मिली। बीएमसी में करीब 30 वर्षों तक अविभाजित शिवसेना का वर्चस्व रहा था, जिसे इस चुनाव में निर्णायक झटका लगा है।
राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में थोड़ा कम रहा, लेकिन शहरी मतदाताओं ने विकास, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक स्थिरता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी। भाजपा और उसके सहयोगियों ने प्रचार के दौरान मेट्रो नेटवर्क, कोस्टल रोड, शहरी परिवहन और आवास योजनाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया था।
नतीजों के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे “विकास की राजनीति पर जनता की मुहर” बताया। उन्होंने कहा कि यह जनादेश शहरी महाराष्ट्र में स्थिर सरकार और तेज विकास की अपेक्षा को दर्शाता है। वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसे गठबंधन की नीतियों और जमीनी काम का परिणाम बताया।
दूसरी ओर विपक्षी दलों ने परिणामों पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। शिवसेना (UBT) और कांग्रेस नेताओं ने कुछ सीटों पर कड़ी टक्कर का दावा किया, लेकिन कुल मिलाकर परिणामों को स्वीकार किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नतीजे आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए महायुति को मनोवैज्ञानिक बढ़त देंगे।
अब सभी की नजरें महापौर पद के चयन पर हैं। बीएमसी सहित कई निगमों में मेयर का फैसला आरक्षण और लॉटरी प्रणाली के जरिए होगा। आने वाले दिनों में नई नगर सरकारों के गठन और नीतिगत प्राथमिकताओं पर तस्वीर और स्पष्ट होगी।
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