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ओवरथिंकिंग से परेशान हैं? इन 5 आसान तरीकों से पा सकते हैं मानसिक सुकून
लाइफस्टाइल न्यूज
लगातार सोचते रहना कैसे बन रहा है मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती, जानिए विशेषज्ञों की सलाह और आसान समाधान
तेज़ रफ्तार ज़िंदगी, काम का दबाव, सोशल मीडिया और भविष्य की अनिश्चितता—इन सबके बीच ओवरथिंकिंग आज एक आम लेकिन गंभीर मानसिक समस्या बनती जा रही है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा सोचना न सिर्फ तनाव बढ़ाता है, बल्कि नींद, कामकाज और रिश्तों पर भी सीधा असर डालता है। भारत समेत दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि कुछ आसान आदतें अपनाकर ओवरथिंकिंग को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
क्या है ओवरथिंकिंग और क्यों बढ़ रही है?
ओवरथिंकिंग का मतलब है किसी बात पर जरूरत से ज्यादा और बार-बार सोचना, खासकर नकारात्मक अंदाज़ में। मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि यह समस्या तब बढ़ती है जब व्यक्ति बीती बातों पर पछतावा करता है या भविष्य को लेकर लगातार चिंता करता रहता है। डिजिटल युग में तुलना की प्रवृत्ति और 24x7 कनेक्टेड रहने की आदत ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
ओवरथिंकिंग को कंट्रोल करने के 5 आसान तरीके
1. विचारों को लिखने की आदत डालें
जब दिमाग में विचारों का बोझ बढ़ जाए, तो उन्हें कागज पर उतार दें। इससे मन हल्का होता है और समस्या को स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिलती है। विशेषज्ञ इसे ‘ब्रेन डंप’ तकनीक कहते हैं, जो मानसिक तनाव कम करने में असरदार मानी जाती है।
2. ‘अभी और यहीं’ पर ध्यान केंद्रित करें
ओवरथिंकिंग अक्सर अतीत या भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में माइंडफुलनेस और गहरी सांस लेने की तकनीक वर्तमान क्षण में लौटने में मदद करती है। दिन में सिर्फ 5 मिनट की सांस पर ध्यान देने की आदत भी बड़ा फर्क ला सकती है।
3. हर विचार सच नहीं होता, यह समझें
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि दिमाग में आने वाला हर नकारात्मक ख्याल हकीकत नहीं होता। खुद से सवाल पूछें—क्या इसका कोई ठोस सबूत है? अक्सर जवाब ‘नहीं’ होता है, और यहीं से ओवरथिंकिंग कमजोर पड़ने लगती है।
4. स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया सीमित करें
लगातार नोटिफिकेशन और दूसरों की जिंदगी से तुलना मानसिक बेचैनी बढ़ाती है। सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन से दूरी बनाना और सोशल मीडिया का समय तय करना ओवरथिंकिंग कम करने में मददगार साबित होता है।
5. शरीर को सक्रिय रखें
नियमित वॉक, योग या हल्का व्यायाम न सिर्फ शरीर बल्कि दिमाग के लिए भी फायदेमंद है। एक्सरसाइज से निकलने वाले ‘फील गुड हार्मोन’ तनाव कम करते हैं और सोच को सकारात्मक दिशा देते हैं।
अगर ओवरथिंकिंग लंबे समय तक बनी रहे, नींद न आए या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। समय पर मदद लेने से यह समस्या गंभीर मानसिक रोग में बदलने से रोकी जा सकती है।मानसिक शांति कोई लग्ज़री नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की बुनियाद है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर ओवरथिंकिंग पर काबू पाया जा सकता है—बस शुरुआत आज से करनी होगी।
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