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ईरान में महंगाई विरोधी प्रदर्शन: 100 शहरों में हिंसा, 45 की मौत, इंटरनेट और एयरपोर्ट बंद
अंतराष्ट्रीय न्यूज
तेहरान और मशहद समेत देशभर में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर सरकारी नीतियों का विरोध किया, युवा और Gen Z सक्रिय
ईरान में महंगाई और आर्थिक कठिनाइयों के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन 13वें दिन भी जारी रहे। गुरुवार को देश के 100 से अधिक शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे, जिनमें तेहरान, मशहद और अन्य प्रमुख शहर शामिल थे। विरोध के दौरान हिंसा और संघर्ष बढ़ गया, जिसके चलते अब तक कम से कम 45 लोग मारे गए हैं, जिनमें 8 बच्चे शामिल हैं।
प्रदर्शनकारी सरकार की महंगाई और आर्थिक नीतियों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। कुछ शहरों में उन्होंने "खामेनेई को मौत" और "इस्लामिक रिपब्लिक का अंत हुआ" जैसे नारे लगाए। कुछ स्थानों पर लोग क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के समर्थन में भी नजर आए और उनके लौटने की मांग करते हुए "यह आखिरी लड़ाई है, शाह पहलवी लौटेंगे" के नारे लगाए।
विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर से चल रहे हैं और गुरुवार को देशभर में हिंसक रूप धारण कर लिया। सड़कों पर ब्लॉकेज, आगजनी और पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। एक पुलिस अधिकारी को चाकू मारकर हत्या कर दी गई।
इंटरनेट और फोन सेवाओं को पूरे देश में बंद कर दिया गया है। तेहरान एयरपोर्ट को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया, और सेना को अलर्ट पर रखा गया। डिजिटल ब्लैकआउट के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट के माध्यम से वीडियो साझा कर रहे हैं।
महंगाई चरम पर है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं में 50% तक वृद्धि हुई। 2026 के बजट में प्रस्तावित 62% टैक्स वृद्धि ने आम लोगों में नाराजगी बढ़ा दी।
निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका से लोगों से प्रदर्शन में भाग लेने की अपील की। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई तो ईरान पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्वीडन और बेल्जियम के प्रधानमंत्री प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खड़े हुए। उन्होंने ईरान सरकार द्वारा हिंसक दमन की निंदा की और स्वतंत्रता और बेहतर भविष्य की मांगों का समर्थन किया।
ईरान की अर्थव्यवस्था तेल और पेट्रोकैमिकल्स पर निर्भर है। 2025 में निर्यात और प्रतिबंधों के कारण व्यापार घाटा बढ़कर 15 बिलियन डॉलर हो गया। देश की जीडीपी वृद्धि केवल 0.3% रहने का अनुमान है।
ईरान अब 47 साल के बाद आर्थिक संकट, बेरोजगारी और राजनीतिक असंतोष से जूझ रहा है। बढ़ती महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और सख्त धार्मिक शासन के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर रही है, जिससे देश में व्यापक अस्थिरता पैदा हो गई है।
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