नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NMIA) का उद्घाटन 25 दिसंबर 2025 को हुआ, लेकिन यह कार्यक्रम पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर लॉन्च से बिल्कुल अलग नजर आया। न लाल कालीन, न सेलिब्रिटी शो और न ही भव्य मंचीय भाषण। इसके बजाय, यह दिन उन लोगों को समर्पित रहा जिन्होंने इस परियोजना को जमीन से आसमान तक पहुंचाया—मजदूर, इंजीनियर, स्टाफ और आम यात्री।
उद्घाटन समारोह का संदेश स्पष्ट था: यह एयरपोर्ट किसी एक व्यक्ति या चेहरे का नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास और साझा गर्व का परिणाम है। रात के समय आयोजित ड्रोन शो ने इस सोच को और मजबूती दी। यह प्रदर्शन तकनीकी वैभव दिखाने के लिए नहीं, बल्कि उन हजारों कामगारों को सम्मान देने के लिए था, जिनकी मेहनत से यह महत्वाकांक्षी परियोजना साकार हो सकी।
टर्मिनल परिसर के भीतर भी यही भावना दिखाई दी। पहली उड़ान के यात्रियों, एयरपोर्ट कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों और खेल जगत की जानी-मानी हस्तियों—जैसे सूर्यकुमार यादव, सुनील छेत्री और मिताली राज—को एक ही स्थान पर, बिना किसी विशेष प्रोटोकॉल या वीआईपी अलगाव के देखा गया। सभी एक ही मार्ग से चले, एक-दूसरे का अभिवादन किया और उस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बने।
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया, जब मौजूद सभी लोगों ने एक साथ राष्ट्रगान गाया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। कई यूजर्स ने इसे “मानवीय”, “समावेशी” और “दिल को छू लेने वाला” बताया। लोगों का कहना था कि यह उद्घाटन दिखावे से ज्यादा मूल्यों की बात करता है।
यात्रियों के स्वागत में भी भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को प्रमुखता दी गई। फूलों की माला, तिलक, आरती, गुलाब जल की फुहार और मुस्कुराहट के साथ यात्रियों का अभिनंदन किया गया। इससे एयरपोर्ट का पहला अनुभव औपचारिक कम और आत्मीय ज्यादा महसूस हुआ।
अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके परिवार के सदस्य भी पूरे कार्यक्रम के दौरान टर्मिनल में मौजूद रहे। उन्होंने यात्रियों और कर्मचारियों से सीधे संवाद किया। इससे नेतृत्व की एक ऐसी छवि उभरी, जो दूर से निर्देश देने के बजाय जमीन पर मौजूद रहकर लोगों से जुड़ने पर भरोसा करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि NMIA का यह उद्घाटन भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एक नया दृष्टिकोण पेश करता है। यह दिखाता है कि विकास केवल आकार, निवेश या गति का नाम नहीं है, बल्कि उसमें शामिल लोगों को सम्मान देना भी उतना ही जरूरी है।
नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पहली उड़ान केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं थी। यह इस बात का संकेत भी थी कि भारत का आधुनिक बुनियादी ढांचा किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है—जहां समुदाय, सम्मान और साझा उत्सव विकास की बुनियाद बनते हैं।
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