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अमेरिका में फ्लाइट ट्रेनिंग के बाद भी नहीं मिला रोजगार: भोपाल में मानसिक तनाव से जूझ रहे व्यक्ति ने की आत्महत्या
भोपाल, (म.प्र.)
पायलट बनने का सपना अधूरा रह गया, लंबे समय से बेरोजगारी और पारिवारिक दबाव के बीच 46 वर्षीय व्यक्ति ने उठाया आत्मघाती कदम
भोपाल में बेरोजगारी और मानसिक तनाव से जुड़ा एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां अमेरिका से पायलट प्रशिक्षण लेकर लौटे एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अवसाद के चलते आत्महत्या कर ली। घटना बैरागढ़ थाना क्षेत्र की है, जहां 46 वर्षीय दिलीप कुमार फुलवानी का शव उनके ही घर में फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दिलीप फुलवानी ने कई वर्ष पहले अमेरिका में पायलट ट्रेनिंग पूरी की थी और इसके बाद भारत लौट आए थे। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें किसी एयरलाइन या एविएशन सेक्टर में स्थायी नौकरी नहीं मिल सकी। इसी कारण वे लंबे समय से मानसिक दबाव में थे। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आर्थिक अस्थिरता और करियर को लेकर निराशा ने उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित किया था।
घटना के समय घर में कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं था। पुलिस के मुताबिक, दिलीप के पिता गंभीर रूप से बीमार हैं और उनका इलाज एम्स अस्पताल में चल रहा है। माता-पिता अस्पताल गए हुए थे, जबकि पत्नी और बेटा रोज़मर्रा की तरह घर से बाहर थे। इसी दौरान दिलीप घर में अकेले थे और उन्होंने यह कदम उठाया। आसपास के लोगों को जब काफी देर तक कोई हलचल नहीं दिखी, तो मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।
सूचना मिलते ही बैरागढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि परिजनों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों ने पुलिस को बताया कि दिलीप शांत स्वभाव के थे, लेकिन बीते कुछ समय से वे बेहद चिंतित रहने लगे थे। पायलट बनने के लिए उन्होंने काफी निवेश किया था और विदेश में प्रशिक्षण के बाद उन्हें उम्मीद थी कि भारत लौटने पर बेहतर अवसर मिलेंगे। जब अपेक्षा के अनुरूप नौकरी नहीं मिली, तो निराशा गहराती चली गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि एविएशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा, लाइसेंस नवीनीकरण की जटिल प्रक्रिया और सीमित अवसर कई प्रशिक्षित पायलटों के लिए तनाव का कारण बन रहे हैं। यह घटना न केवल एक व्यक्ति की त्रासदी है, बल्कि रोजगार और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े बड़े सामाजिक सवाल भी खड़े करती है।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि मानसिक तनाव या अवसाद की स्थिति में परिवार, मित्रों या विशेषज्ञों से बात करें और अकेलेपन में कोई बड़ा फैसला न लें। प्रशासन का कहना है कि जरूरतमंद लोगों को काउंसलिंग और सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर यह रेखांकित करती है कि करियर से जुड़ी अनिश्चितता और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को समय रहते गंभीरता से लेना कितना जरूरी है।
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