छत्तीसगढ़ में बिजली बकाया को लेकर सियासी घमासान, कांग्रेस ने उठाए सरकार पर सवाल

रायपुर (छ.ग.)

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कांग्रेस का आरोप—सत्ता से जुड़े नेताओं और अफसरों पर हजारों करोड़ का बिजली बिल लंबित, आम उपभोक्ताओं पर ही क्यों सख्ती?

छत्तीसगढ़ में बिजली बिल बकाया को लेकर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि सत्ता और प्रशासन से जुड़े प्रभावशाली लोगों पर हजारों करोड़ रुपये का बिजली बिल लंबित है, जबकि आम नागरिकों से समय पर भुगतान के नाम पर सख्ती बरती जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि इस दोहरे रवैये से न सिर्फ राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि व्यवस्था पर जनता का भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राज्य में कुल बकाया बिजली बिल का आंकड़ा लगभग 6500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसमें मंत्री, सांसद, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और कई सरकारी कार्यालय शामिल बताए जा रहे हैं। पार्टी ने इस मुद्दे को सार्वजनिक करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने और जवाबदेही तय करने की मांग की है।

कांग्रेस का आरोप है कि जिन लोगों पर शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है, वही नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। पार्टी के मुताबिक, रायपुर से सांसद बृजमोहन अग्रवाल, राज्य सरकार के कुछ मंत्री, उपमुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के आवासों या कार्यालयों के बिजली बिल लंबे समय से जमा नहीं किए गए हैं। इसके अलावा विधानसभा सचिवालय और आईएएस मेस जैसे शासकीय प्रतिष्ठानों पर भी लाखों रुपये का बकाया बताया गया है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार बिजली बोर्ड के बढ़ते घाटे का हवाला देकर आम उपभोक्ताओं पर दरें बढ़ाने का दबाव बनाती है, लेकिन बड़े बकायेदारों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती। पार्टी ने सवाल उठाया है कि क्या सत्ता में बैठे लोगों के लिए नियम अलग हैं, या फिर उनके लिए विशेष छूट का प्रावधान किया गया है।

पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में लिखा है कि सार्वजनिक मंचों से ईमानदारी और जिम्मेदारी की बातें करने वाले नेता जब खुद भुगतान नहीं करते, तो आम जनता से नैतिकता की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की स्थिति से शासन की विश्वसनीयता पर सीधा असर पड़ता है।

पार्टी ने यह भी दावा किया है कि उसने पहले भी इस विषय में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को शिकायत दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। कांग्रेस का आरोप है कि यदि समय रहते बड़े बकायेदारों से वसूली की जाती, तो बिजली बोर्ड की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती थी और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ता।

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सभी बकाया मामलों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, संबंधित लोगों से तत्काल वसूली सुनिश्चित की जाए और पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए। पार्टी का कहना है कि पारदर्शिता और समान नियमों के बिना किसी भी तरह का राजस्व सुधार टिकाऊ नहीं हो सकता।

फिलहाल, इस मुद्दे पर सरकार की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह मामला विधानसभा और सियासी मंचों पर और तेज होने के संकेत दे रहा है।

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