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नेगेटिव लोगों से दूरी क्यों जरूरी? मानसिक स्वास्थ्य और जीवन संतुलन पर बढ़ती चिंता
लाइफस्टाइल डेस्क
नेगेटिव लोगों से दूरी बनाना स्वार्थ नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य की जरूरत है। सकारात्मक माहौल न केवल जीवन की गुणवत्ता सुधारता है, बल्कि आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को भी मजबूत करता है।
तेज़ रफ्तार जिंदगी, बढ़ता काम का दबाव और सामाजिक प्रतिस्पर्धा के बीच मानसिक स्वास्थ्य एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है। इसी बीच मनोवैज्ञानिक और व्यवहार विशेषज्ञ लगातार इस ओर ध्यान दिला रहे हैं कि नकारात्मक सोच रखने वाले लोगों की संगत व्यक्ति के मानसिक, भावनात्मक और पेशेवर जीवन पर गहरा असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते ऐसे लोगों से दूरी बनाना आत्म-संरक्षण की एक ज़रूरी प्रक्रिया है।
क्या है नेगेटिविटी का असर
नकारात्मक सोच वाले लोग अक्सर शिकायत, आलोचना और निराशा के इर्द-गिर्द अपनी बातचीत सीमित रखते हैं। लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने से व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर पड़ने लगता है। मनोचिकित्सकों के अनुसार, लगातार नकारात्मक बातें सुनने से दिमाग तनाव की स्थिति में रहता है, जिससे चिड़चिड़ापन, थकान और चिंता बढ़ती है।
क्यों जरूरी हो जाती है दूरी
विशेषज्ञ बताते हैं कि इंसान अनजाने में अपने आसपास के लोगों की भावनाओं और सोच को अपनाने लगता है। ऐसे में नकारात्मक लोगों की संगत धीरे-धीरे जीवन के प्रति नजरिए को भी प्रभावित करती है। करियर काउंसलर्स का कहना है कि कई बार व्यक्ति आगे बढ़ने से सिर्फ इसलिए रुक जाता है क्योंकि आसपास मौजूद लोग हर फैसले में डर और असफलता की बात करते हैं।
रिश्तों पर भी पड़ता है प्रभाव
नकारात्मकता सिर्फ व्यक्तिगत सोच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि रिश्तों में भी तनाव पैदा करती है। परिवार या दोस्तों के बीच लगातार आलोचना और शक का माहौल आपसी भरोसे को कमजोर कर देता है। सामाजिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे रिश्ते भावनात्मक थकावट का कारण बनते हैं, जिसे अक्सर लोग समय रहते पहचान नहीं पाते।
कार्यस्थल पर बढ़ती चुनौती
ऑफिस में नकारात्मक सहकर्मी टीम के माहौल को बिगाड़ सकते हैं। HR विशेषज्ञों के मुताबिक, नेगेटिव व्यवहार से उत्पादकता घटती है और कार्यस्थल पर असंतोष बढ़ता है। कई मामलों में यह तनाव नौकरी बदलने या बर्नआउट की वजह भी बनता है।
दूरी का मतलब रिश्ते तोड़ना नहीं
मनोवैज्ञानिक स्पष्ट करते हैं कि दूरी बनाने का अर्थ दुश्मनी या संबंध खत्म करना नहीं है। इसका मतलब है अपनी मानसिक सीमाएं तय करना। जहां जरूरी हो, वहां संवाद सीमित रखना और खुद को सकारात्मक माहौल में रखना एक स्वस्थ विकल्प माना जाता है।
सकारात्मक संगत के फायदे
अध्ययनों के अनुसार, सकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ समय बिताने से आत्मविश्वास बढ़ता है और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता बेहतर होती है। ऐसे लोग मुश्किल हालात में भी समाधान पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे मानसिक मजबूती आती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि व्यक्ति को अपने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। अगर कोई संगत लगातार तनाव और नकारात्मक भावनाएं पैदा कर रही है, तो उससे संतुलित दूरी बनाना जरूरी है। यह कदम आत्म-विकास और मानसिक शांति की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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