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दावोस जाते वक्त एयरफोर्स वन में तकनीकी गड़बड़ी, ट्रम्प को बीच उड़ान से लौटना पड़ा
अंतराष्ट्रीय न्यूज
इलेक्ट्रिकल खराबी के बाद वॉशिंगटन वापस लौटा राष्ट्रपति का विमान, दूसरे प्लेन से रवाना हुए ट्रम्प; WEF में भाषण अब भी तय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में शामिल होने के लिए जाते समय बीच उड़ान से लौटना पड़ा। राष्ट्रपति का विशेष विमान एयरफोर्स वन टेकऑफ के कुछ समय बाद ही तकनीकी खराबी के कारण वॉशिंगटन डीसी वापस आ गया। व्हाइट हाउस ने इसे पूरी तरह एहतियाती कदम बताया है और कहा है कि राष्ट्रपति सुरक्षित हैं।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लीविट के अनुसार, उड़ान के दौरान विमान के क्रू को इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़ी एक तकनीकी समस्या का संकेत मिला। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत पायलट ने आगे यात्रा जारी रखने के बजाय विमान को वापस लौटाने का निर्णय लिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि खराबी गंभीर नहीं थी, लेकिन राष्ट्रपति की सुरक्षा सर्वोपरि होने के कारण कोई जोखिम नहीं लिया गया।
इस घटनाक्रम के कुछ ही समय बाद राष्ट्रपति ट्रम्प वैकल्पिक विमान से रवाना हो गए। उनके दावोस कार्यक्रम में किसी तरह के बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। तय कार्यक्रम के अनुसार, ट्रम्प वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से वैश्विक नेताओं और उद्योग जगत को संबोधित करेंगे।
पुराने एयरफोर्स वन पर फिर उठे सवाल
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा के लिए इस्तेमाल हो रहे एयरफोर्स वन विमानों की उम्र को लेकर पहले से ही चर्चा चल रही है। वर्तमान में बोइंग 747-200B विमानों को एयरफोर्स वन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्हें करीब चार दशक पहले सेवा में शामिल किया गया था। नए विमानों के निर्माण की जिम्मेदारी बोइंग के पास है, लेकिन यह परियोजना लंबे समय से देरी का शिकार बनी हुई है।
पिछले वर्ष कतर के शाही परिवार से प्राप्त एक बोइंग 747-8 जंबो जेट को भविष्य में एयरफोर्स वन बेड़े में शामिल किया जाना प्रस्तावित है। हालांकि, उस विमान को अभी अमेरिकी सुरक्षा मानकों और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इस फैसले को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बहस भी हो चुकी है।
दावोस में ट्रम्प का एजेंडा क्यों अहम
डोनाल्ड ट्रम्प करीब छह साल बाद दावोस इकोनॉमिक समिट में हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे समय में उनका भाषण महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब वैश्विक राजनीति व्यापार युद्ध, टैरिफ नीतियों, सुरक्षा तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं से गुजर रही है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रम्प अपने संबोधन में ग्रीनलैंड, NATO, चीन और रूस से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका की रणनीति को साफ तौर पर रख सकते हैं।
ट्रम्प का दावोस दौरा भारत के लिहाज से भी खास माना जा रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान वह एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम की मेजबानी करेंगे, जिसमें भारत के प्रमुख कारोबारी नेताओं को आमंत्रित किया गया है। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत के बीच इस मुलाकात को अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
WEF 2026 की पृष्ठभूमि
19 से 23 जनवरी तक स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में 130 से अधिक देशों के करीब 3,000 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें 60 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, सैकड़ों वैश्विक कंपनियों के CEO और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख शामिल हैं। युद्ध, वैश्विक मंदी की आशंका, जलवायु संकट और तकनीकी बदलावों के बीच दावोस की चर्चाओं को आने वाले वर्षों की वैश्विक नीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
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