ईरान के खुजेस्तान में 5.0 तीव्रता के भूकंप से हड़कंप, इमरजेंसी टीमें अलर्ट; अमेरिकी हमलों का आठवां दौर जारी

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दक्षिण-पश्चिम ईरान में जमीन के करीब 12 किमी नीचे दर्ज हुए भूकंप के झटके, प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में भेजीं राहत टीमें; जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद ट्रम्प ने ईरान पर जवाबी कार्रवाई को मंजूरी देने की बात कही

ईरान पहले से जारी सैन्य तनाव के बीच अब प्राकृतिक आपदा की चुनौती का भी सामना कर रहा है। देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित खुजेस्तान प्रांत में रविवार सुबह 5.0 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन एजेंसियों को सतर्क कर दिया और प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव टीमों को भेजा गया। अधिकारियों की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है। यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार गंभीर होता जा रहा है और अमेरिकी सेना ने लगातार आठवीं रात ईरान में हमले किए हैं।

ईरानी मीडिया IRIB की रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 12 किलोमीटर की गहराई में था। कम गहराई पर आने वाले भूकंप के झटके सतह पर अपेक्षाकृत अधिक महसूस किए जा सकते हैं, इसलिए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत निगरानी बढ़ा दी। शुरुआती स्तर पर बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय एजेंसियां अलग-अलग इलाकों से रिपोर्ट जुटाने में लगी हैं।

खुजेस्तान के गवर्नर सैयद मोहम्मद रजा मौलाइजादेह ने बताया कि भूकंप के बाद संबंधित विभागों और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया गया है। संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों में टीमें भेजी गई हैं और वहां इमारतों, सड़कों तथा अन्य बुनियादी ढांचे की स्थिति की जांच की जा रही है। प्रशासन ने राहत एजेंसियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है।

खुजेस्तान ईरान के रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण प्रांतों में शामिल है। यह इलाका देश के तेल और ऊर्जा उद्योग का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां कई तेल क्षेत्र, ऊर्जा प्रतिष्ठान और औद्योगिक सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में भूकंप के बाद केवल रिहायशी क्षेत्रों ही नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों की प्राथमिकता यह पता लगाना है कि भूकंप से किसी महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठान या परिवहन नेटवर्क को नुकसान तो नहीं पहुंचा।

भूकंप के कारण पैदा हुई चिंता के बीच ईरान पहले से ही अमेरिका के साथ सैन्य संघर्ष का सामना कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सेना ने लगातार आठवीं रात ईरान के अलग-अलग ठिकानों पर हमले किए। इस सैन्य कार्रवाई के दायरे और इससे हुए नुकसान को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई को उन्होंने स्वयं मंजूरी दी। उन्होंने इसे जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद की गई जवाबी कार्रवाई से जोड़ा। अमेरिका का कहना है कि उसके सैन्यकर्मियों को निशाना बनाए जाने के बाद जवाब देना जरूरी था। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच हमलों तथा जवाबी हमलों का सिलसिला बढ़ने से क्षेत्रीय स्तर पर संघर्ष और फैलने का खतरा बना हुआ है।

इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी प्रसारित हो रहा है, जिसे जॉर्डन स्थित मुवाफ्फक सल्ती एयरबेस से जुड़ी घटना का बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई। हालांकि संघर्ष के दौरान सामने आने वाले वीडियो, तस्वीरों और अलग-अलग पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई बार पुराने या दूसरे स्थानों के वीडियो भी मौजूदा घटनाओं से जोड़कर प्रसारित किए जाते हैं।

जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पश्चिम एशिया में अमेरिका की रणनीतिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां स्थित सैन्य ठिकाने क्षेत्रीय अभियानों, निगरानी और सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा समन्वय में भूमिका निभाते हैं। अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया ने पहले से तनावपूर्ण स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

ईरान पर लगातार आठ रातों तक हमले किए जाने की खबरों से संकेत मिलता है कि सैन्य टकराव अब सीमित कार्रवाई से आगे बढ़ रहा है। इससे पहले भी ईरान के सैन्य प्रतिष्ठानों, हथियार भंडार, मिसाइल क्षमताओं और अन्य रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई थीं। ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनियां दी गई हैं।

ईरानी नेतृत्व पहले ही संकेत दे चुका है कि उसके खिलाफ सैन्य अभियान का विस्तार होने पर जवाबी कार्रवाई का दायरा भी बढ़ सकता है। खास तौर पर पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर लगातार चेतावनियां सामने आती रही हैं। कुवैत, बहरीन, कतर, इराक, जॉर्डन और क्षेत्र के दूसरे देशों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के कारण संघर्ष के क्षेत्रीय विस्तार को लेकर चिंता बढ़ गई है।

खुजेस्तान में आया भूकंप ईरानी प्रशासन के लिए ऐसे समय अतिरिक्त चुनौती लेकर आया है, जब देश की सुरक्षा और आपातकालीन एजेंसियां सैन्य तनाव के कारण पहले से हाई अलर्ट पर हैं। भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान चलाने के साथ प्रशासन को संभावित आफ्टरशॉक्स और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर भी ध्यान देना पड़ रहा है।

5.0 तीव्रता का भूकंप सामान्य तौर पर मध्यम श्रेणी में माना जाता है, लेकिन वास्तविक नुकसान कई कारकों पर निर्भर करता है। भूकंप की गहराई, आबादी से केंद्र की दूरी, स्थानीय इमारतों की मजबूती और भूगर्भीय परिस्थितियां नुकसान का स्तर तय करती हैं। लगभग 12 किलोमीटर की गहराई होने के कारण झटके आसपास के क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से महसूस किए जाने की संभावना रहती है।

ईरान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां भूकंपीय गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक होती हैं। देश कई सक्रिय टेक्टोनिक फॉल्ट लाइनों के आसपास स्थित है और अतीत में यहां विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं। इसी वजह से मध्यम तीव्रता का भूकंप आने पर भी स्थानीय प्रशासन आमतौर पर आपातकालीन एजेंसियों को तेजी से सक्रिय करता है।

खुजेस्तान में राहत एवं बचाव एजेंसियों को संभावित रूप से क्षतिग्रस्त इमारतों की जांच, घायलों तक पहुंचने और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। दूरदराज के क्षेत्रों से सूचनाएं मिलने में समय लग सकता है, इसलिए प्रशासन लगातार स्थानीय अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए है।

मौजूदा परिस्थितियों में ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा भी अहम मुद्दा है। खुजेस्तान ईरान के तेल उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है और यहां किसी बड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान होने की स्थिति में उसका असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। सैन्य तनाव के कारण वैश्विक बाजार पहले ही पश्चिम एशिया से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर संवेदनशील बना हुआ है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौत से जुड़े घटनाक्रम के बाद क्षेत्र के अन्य देशों में स्थित सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाए जाने की संभावना है। अमेरिकी प्रशासन अपने सैनिकों और सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कह रहा है, जबकि ईरान किसी भी नए हमले का जवाब देने की चेतावनी देता रहा है।

पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद भू-राजनीतिक तनाव के बीच लगातार सैन्य हमले समुद्री व्यापार के लिए भी चिंता बढ़ा रहे हैं। फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल हैं। संघर्ष बढ़ने की स्थिति में तेल टैंकरों की आवाजाही, बीमा लागत और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।इसी बीच ईरान के भीतर भूकंप आने से स्थानीय प्रशासन को दोहरे स्तर पर काम करना पड़ रहा है। एक तरफ सैन्य हमलों से जुड़े सुरक्षा इंतजाम और दूसरी तरफ प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में राहत व्यवस्था संभालनी पड़ रही है।

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19 Jul 2026 By Priyanka

ईरान के खुजेस्तान में 5.0 तीव्रता के भूकंप से हड़कंप, इमरजेंसी टीमें अलर्ट; अमेरिकी हमलों का आठवां दौर जारी

अंतराष्ट्रीय न्यूज

ईरान पहले से जारी सैन्य तनाव के बीच अब प्राकृतिक आपदा की चुनौती का भी सामना कर रहा है। देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित खुजेस्तान प्रांत में रविवार सुबह 5.0 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन एजेंसियों को सतर्क कर दिया और प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव टीमों को भेजा गया। अधिकारियों की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है। यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार गंभीर होता जा रहा है और अमेरिकी सेना ने लगातार आठवीं रात ईरान में हमले किए हैं।

ईरानी मीडिया IRIB की रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 12 किलोमीटर की गहराई में था। कम गहराई पर आने वाले भूकंप के झटके सतह पर अपेक्षाकृत अधिक महसूस किए जा सकते हैं, इसलिए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत निगरानी बढ़ा दी। शुरुआती स्तर पर बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय एजेंसियां अलग-अलग इलाकों से रिपोर्ट जुटाने में लगी हैं।

खुजेस्तान के गवर्नर सैयद मोहम्मद रजा मौलाइजादेह ने बताया कि भूकंप के बाद संबंधित विभागों और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया गया है। संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों में टीमें भेजी गई हैं और वहां इमारतों, सड़कों तथा अन्य बुनियादी ढांचे की स्थिति की जांच की जा रही है। प्रशासन ने राहत एजेंसियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है।

खुजेस्तान ईरान के रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण प्रांतों में शामिल है। यह इलाका देश के तेल और ऊर्जा उद्योग का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां कई तेल क्षेत्र, ऊर्जा प्रतिष्ठान और औद्योगिक सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में भूकंप के बाद केवल रिहायशी क्षेत्रों ही नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों की प्राथमिकता यह पता लगाना है कि भूकंप से किसी महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठान या परिवहन नेटवर्क को नुकसान तो नहीं पहुंचा।

भूकंप के कारण पैदा हुई चिंता के बीच ईरान पहले से ही अमेरिका के साथ सैन्य संघर्ष का सामना कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सेना ने लगातार आठवीं रात ईरान के अलग-अलग ठिकानों पर हमले किए। इस सैन्य कार्रवाई के दायरे और इससे हुए नुकसान को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई को उन्होंने स्वयं मंजूरी दी। उन्होंने इसे जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद की गई जवाबी कार्रवाई से जोड़ा। अमेरिका का कहना है कि उसके सैन्यकर्मियों को निशाना बनाए जाने के बाद जवाब देना जरूरी था। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच हमलों तथा जवाबी हमलों का सिलसिला बढ़ने से क्षेत्रीय स्तर पर संघर्ष और फैलने का खतरा बना हुआ है।

इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी प्रसारित हो रहा है, जिसे जॉर्डन स्थित मुवाफ्फक सल्ती एयरबेस से जुड़ी घटना का बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई। हालांकि संघर्ष के दौरान सामने आने वाले वीडियो, तस्वीरों और अलग-अलग पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई बार पुराने या दूसरे स्थानों के वीडियो भी मौजूदा घटनाओं से जोड़कर प्रसारित किए जाते हैं।

जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पश्चिम एशिया में अमेरिका की रणनीतिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां स्थित सैन्य ठिकाने क्षेत्रीय अभियानों, निगरानी और सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा समन्वय में भूमिका निभाते हैं। अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया ने पहले से तनावपूर्ण स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

ईरान पर लगातार आठ रातों तक हमले किए जाने की खबरों से संकेत मिलता है कि सैन्य टकराव अब सीमित कार्रवाई से आगे बढ़ रहा है। इससे पहले भी ईरान के सैन्य प्रतिष्ठानों, हथियार भंडार, मिसाइल क्षमताओं और अन्य रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई थीं। ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनियां दी गई हैं।

ईरानी नेतृत्व पहले ही संकेत दे चुका है कि उसके खिलाफ सैन्य अभियान का विस्तार होने पर जवाबी कार्रवाई का दायरा भी बढ़ सकता है। खास तौर पर पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर लगातार चेतावनियां सामने आती रही हैं। कुवैत, बहरीन, कतर, इराक, जॉर्डन और क्षेत्र के दूसरे देशों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के कारण संघर्ष के क्षेत्रीय विस्तार को लेकर चिंता बढ़ गई है।

खुजेस्तान में आया भूकंप ईरानी प्रशासन के लिए ऐसे समय अतिरिक्त चुनौती लेकर आया है, जब देश की सुरक्षा और आपातकालीन एजेंसियां सैन्य तनाव के कारण पहले से हाई अलर्ट पर हैं। भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान चलाने के साथ प्रशासन को संभावित आफ्टरशॉक्स और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर भी ध्यान देना पड़ रहा है।

5.0 तीव्रता का भूकंप सामान्य तौर पर मध्यम श्रेणी में माना जाता है, लेकिन वास्तविक नुकसान कई कारकों पर निर्भर करता है। भूकंप की गहराई, आबादी से केंद्र की दूरी, स्थानीय इमारतों की मजबूती और भूगर्भीय परिस्थितियां नुकसान का स्तर तय करती हैं। लगभग 12 किलोमीटर की गहराई होने के कारण झटके आसपास के क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से महसूस किए जाने की संभावना रहती है।

ईरान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां भूकंपीय गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक होती हैं। देश कई सक्रिय टेक्टोनिक फॉल्ट लाइनों के आसपास स्थित है और अतीत में यहां विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं। इसी वजह से मध्यम तीव्रता का भूकंप आने पर भी स्थानीय प्रशासन आमतौर पर आपातकालीन एजेंसियों को तेजी से सक्रिय करता है।

खुजेस्तान में राहत एवं बचाव एजेंसियों को संभावित रूप से क्षतिग्रस्त इमारतों की जांच, घायलों तक पहुंचने और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। दूरदराज के क्षेत्रों से सूचनाएं मिलने में समय लग सकता है, इसलिए प्रशासन लगातार स्थानीय अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए है।

मौजूदा परिस्थितियों में ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा भी अहम मुद्दा है। खुजेस्तान ईरान के तेल उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है और यहां किसी बड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान होने की स्थिति में उसका असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। सैन्य तनाव के कारण वैश्विक बाजार पहले ही पश्चिम एशिया से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर संवेदनशील बना हुआ है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौत से जुड़े घटनाक्रम के बाद क्षेत्र के अन्य देशों में स्थित सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाए जाने की संभावना है। अमेरिकी प्रशासन अपने सैनिकों और सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कह रहा है, जबकि ईरान किसी भी नए हमले का जवाब देने की चेतावनी देता रहा है।

पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद भू-राजनीतिक तनाव के बीच लगातार सैन्य हमले समुद्री व्यापार के लिए भी चिंता बढ़ा रहे हैं। फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल हैं। संघर्ष बढ़ने की स्थिति में तेल टैंकरों की आवाजाही, बीमा लागत और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।इसी बीच ईरान के भीतर भूकंप आने से स्थानीय प्रशासन को दोहरे स्तर पर काम करना पड़ रहा है। एक तरफ सैन्य हमलों से जुड़े सुरक्षा इंतजाम और दूसरी तरफ प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में राहत व्यवस्था संभालनी पड़ रही है।

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