UN सुरक्षा परिषद में अमेरिका की ईरान को खुली चेतावनी: ‘ट्रम्प बातें नहीं, सीधे कार्रवाई करते हैं’

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ईरान बोला— टकराव नहीं चाहते, लेकिन हमला हुआ तो जवाब तय; विरोध प्रदर्शनों और इंटरनेट ब्लैकआउट पर बढ़ा वैश्विक दबाव

ईरान में जारी व्यापक जनआंदोलन और उस पर हो रही सख्त कार्रवाई को लेकर अमेरिका और ईरान आमने-सामने आ गए हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में गुरुवार को अमेरिका ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों पर दमन नहीं रुका तो वह सभी विकल्पों पर विचार करेगा। जवाब में ईरान ने कहा कि वह टकराव नहीं चाहता, लेकिन किसी भी सैन्य या आक्रामक कार्रवाई का निर्णायक जवाब दिया जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने बैठक में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी नेतृत्व को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा, “ट्रम्प भाषण देने में नहीं, कार्रवाई करने में विश्वास रखते हैं।” वाल्ट्ज ने आरोप लगाया कि ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया जा रहा है और दुनिया को इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

अमेरिकी राजदूत ने ईरान में लगाए गए लंबे इंटरनेट ब्लैकआउट पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि डिजिटल पाबंदियों के कारण यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि जमीनी स्तर पर कितनी हिंसा हुई है। उन्होंने ईरानी सरकार पर आरोप लगाया कि वह विदेशी साजिश का हवाला देकर अपने ही नागरिकों की आवाज दबा रही है।

इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उप-राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने अमेरिकी आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि ईरान न तो युद्ध चाहता है और न ही तनाव बढ़ाना चाहता है, लेकिन किसी भी आक्रामक कदम का “कानूनी और अनुपातिक जवाब” दिया जाएगा। दर्जी ने अमेरिका पर मानवाधिकारों के मुद्दे को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।

बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी सैन्य टकराव का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा पश्चिम एशिया इसकी चपेट में आ सकता है।

इस बीच, व्हाइट हाउस ने दावा किया कि ट्रम्प प्रशासन के दबाव के बाद ईरान ने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की कथित योजना पर रोक लगाई है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि हाल के दिनों में हिंसा की घटनाओं में कुछ कमी आई है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अमेरिका ने बैठक के साथ ही ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सुरक्षा तंत्र से जुड़े 18 व्यक्तियों व संस्थाओं पर नए प्रतिबंधों का ऐलान किया। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, ये प्रतिबंध उन लोगों पर लगाए गए हैं जो प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की योजना और क्रियान्वयन में शामिल रहे हैं।

गौरतलब है कि ईरान में 28 दिसंबर से महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। रियाल की ऐतिहासिक गिरावट और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों ने जनता के गुस्से को और भड़काया है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात अमेरिका-ईरान संबंधों को एक बार फिर गंभीर और अस्थिर दौर में ले जा सकते हैं।

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