बकरीद पर देशभर में अमन और भाईचारे का संदेश, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

नेशनल डेस्क

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ईदगाहों में अदा हुई नमाज, कई राज्यों में ड्रोन से निगरानी; नमाजियों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की उठाई मांग

देशभर में आज ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार धार्मिक श्रद्धा, भाईचारे और शांति के माहौल में मनाया जा रहा है। सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई, जबकि कई स्थानों पर ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को ईद-उल-अजहा की शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह पर्व समाज में भाईचारे और खुशी की भावना को और मजबूत करे। उन्होंने सभी नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य और सफलता की कामना की। वहीं राष्ट्रपति ने भी देशवासियों से आपसी सद्भाव और एकता बनाए रखने की अपील की। दिल्ली और उत्तर प्रदेश में प्रशासन विशेष रूप से सतर्क नजर आया। दिल्ली के जहांगीरपुरी, सीलमपुर और जामा मस्जिद क्षेत्रों में पुलिस बल लगातार गश्त करता रहा। मस्जिदों और ईदगाहों के आसपास ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी रखी गई ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। उत्तर प्रदेश के मेरठ, लखनऊ, कानपुर और अलीगढ़ में भी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर रहीं। कई जिलों में फ्लैग मार्च निकाला गया और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग भी की गई।

पश्चिम बंगाल में भी पुलिस प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरती। कोलकाता और हावड़ा सहित कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस और RAF ने फ्लैग मार्च किया। इस बार बंगाल सरकार ने सार्वजनिक सड़कों पर नमाज अदा करने पर रोक लगाई थी, जिसके चलते कोलकाता के रेड रोड की जगह ब्रिगेड परेड ग्राउंड में बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की। प्रशासन ने पूरे आयोजन की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई।

उत्तराखंड और चंडीगढ़ में इस बार एक अलग तस्वीर देखने को मिली। कई नमाजी हाथों में पोस्टर लेकर पहुंचे, जिन पर “गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करें” जैसे संदेश लिखे थे। नमाजियों का कहना था कि गाय को सम्मान और संरक्षण मिलना चाहिए तथा समाज में सद्भाव बनाए रखने के लिए सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान आवश्यक है। इस पहल को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज रही। राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह में भी बकरीद के मौके पर विशेष धार्मिक आयोजन हुए। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में जन्नती दरवाजा खोला गया, जहां जायरीन ने बड़ी संख्या में पहुंचकर दुआ मांगी। दरगाह परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पुलिस प्रशासन लगातार निगरानी करता रहा।

इस्लामिक परंपरा के अनुसार ईद-उल-अजहा त्याग और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया था, लेकिन उनकी निष्ठा से प्रसन्न होकर अल्लाह ने बेटे की जगह एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार की। तभी से इस पर्व को कुर्बानी और त्याग के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। बकरीद का त्योहार मक्का में होने वाली सालाना हज यात्रा के समापन के साथ भी जुड़ा हुआ है। हिजरी कैलेंडर के अनुसार यह धू-अल-हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाया जाता है। चूंकि इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है, इसलिए हर साल इसकी तारीख ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार बदलती रहती है।

देश के अलग-अलग हिस्सों से सामाजिक सौहार्द की कई सकारात्मक खबरें भी सामने आईं। महाराष्ट्र के पंढरपुर में मुस्लिम समुदाय ने एकादशी और बकरीद एक ही दिन पड़ने के कारण आपसी सम्मान दिखाते हुए बकरे की कुर्बानी टाल दी। वहीं केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित पलयाम जुमा मस्जिद के इमाम ने नमाज के बाद लोगों से अपील की कि वे किसी भी धर्म या आस्था का अपमान न करें और समाज में शांति बनाए रखें। मुंबई के गोरेगांव इलाके में एक हाउसिंग सोसाइटी में दो समुदायों के बीच तनाव की स्थिति बनने पर पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए कुर्बानी की रस्म को रद्द कराया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी को भी माहौल बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस बीच सोशल मीडिया पर भी बकरीद से जुड़े संदेश, तस्वीरें और वीडियो वायरल होते रहे। लोग एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते नजर आए। कई सामाजिक संगठनों ने गरीबों और जरूरतमंदों के बीच भोजन और कपड़े वितरित किए। देशभर में प्रशासन की सतर्कता और लोगों के सहयोग के कारण अधिकांश स्थानों पर त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। बकरीद के इस अवसर पर एक बार फिर भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की झलक देखने को मिली, जहां अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग मिलकर भाईचारे और प्रेम का संदेश देते नजर आए।

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28 May 2026 By Vaishnavi.J

बकरीद पर देशभर में अमन और भाईचारे का संदेश, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

नेशनल डेस्क

देशभर में आज ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार धार्मिक श्रद्धा, भाईचारे और शांति के माहौल में मनाया जा रहा है। सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई, जबकि कई स्थानों पर ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को ईद-उल-अजहा की शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह पर्व समाज में भाईचारे और खुशी की भावना को और मजबूत करे। उन्होंने सभी नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य और सफलता की कामना की। वहीं राष्ट्रपति ने भी देशवासियों से आपसी सद्भाव और एकता बनाए रखने की अपील की। दिल्ली और उत्तर प्रदेश में प्रशासन विशेष रूप से सतर्क नजर आया। दिल्ली के जहांगीरपुरी, सीलमपुर और जामा मस्जिद क्षेत्रों में पुलिस बल लगातार गश्त करता रहा। मस्जिदों और ईदगाहों के आसपास ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी रखी गई ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। उत्तर प्रदेश के मेरठ, लखनऊ, कानपुर और अलीगढ़ में भी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर रहीं। कई जिलों में फ्लैग मार्च निकाला गया और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग भी की गई।

पश्चिम बंगाल में भी पुलिस प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरती। कोलकाता और हावड़ा सहित कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस और RAF ने फ्लैग मार्च किया। इस बार बंगाल सरकार ने सार्वजनिक सड़कों पर नमाज अदा करने पर रोक लगाई थी, जिसके चलते कोलकाता के रेड रोड की जगह ब्रिगेड परेड ग्राउंड में बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की। प्रशासन ने पूरे आयोजन की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई।

उत्तराखंड और चंडीगढ़ में इस बार एक अलग तस्वीर देखने को मिली। कई नमाजी हाथों में पोस्टर लेकर पहुंचे, जिन पर “गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करें” जैसे संदेश लिखे थे। नमाजियों का कहना था कि गाय को सम्मान और संरक्षण मिलना चाहिए तथा समाज में सद्भाव बनाए रखने के लिए सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान आवश्यक है। इस पहल को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज रही। राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह में भी बकरीद के मौके पर विशेष धार्मिक आयोजन हुए। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में जन्नती दरवाजा खोला गया, जहां जायरीन ने बड़ी संख्या में पहुंचकर दुआ मांगी। दरगाह परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पुलिस प्रशासन लगातार निगरानी करता रहा।

इस्लामिक परंपरा के अनुसार ईद-उल-अजहा त्याग और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया था, लेकिन उनकी निष्ठा से प्रसन्न होकर अल्लाह ने बेटे की जगह एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार की। तभी से इस पर्व को कुर्बानी और त्याग के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। बकरीद का त्योहार मक्का में होने वाली सालाना हज यात्रा के समापन के साथ भी जुड़ा हुआ है। हिजरी कैलेंडर के अनुसार यह धू-अल-हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाया जाता है। चूंकि इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है, इसलिए हर साल इसकी तारीख ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार बदलती रहती है।

देश के अलग-अलग हिस्सों से सामाजिक सौहार्द की कई सकारात्मक खबरें भी सामने आईं। महाराष्ट्र के पंढरपुर में मुस्लिम समुदाय ने एकादशी और बकरीद एक ही दिन पड़ने के कारण आपसी सम्मान दिखाते हुए बकरे की कुर्बानी टाल दी। वहीं केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित पलयाम जुमा मस्जिद के इमाम ने नमाज के बाद लोगों से अपील की कि वे किसी भी धर्म या आस्था का अपमान न करें और समाज में शांति बनाए रखें। मुंबई के गोरेगांव इलाके में एक हाउसिंग सोसाइटी में दो समुदायों के बीच तनाव की स्थिति बनने पर पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए कुर्बानी की रस्म को रद्द कराया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी को भी माहौल बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस बीच सोशल मीडिया पर भी बकरीद से जुड़े संदेश, तस्वीरें और वीडियो वायरल होते रहे। लोग एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते नजर आए। कई सामाजिक संगठनों ने गरीबों और जरूरतमंदों के बीच भोजन और कपड़े वितरित किए। देशभर में प्रशासन की सतर्कता और लोगों के सहयोग के कारण अधिकांश स्थानों पर त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। बकरीद के इस अवसर पर एक बार फिर भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की झलक देखने को मिली, जहां अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग मिलकर भाईचारे और प्रेम का संदेश देते नजर आए।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a17f6d08f112/article-54429

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