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पटना में गंगा नदी में नाव हादसा, 15 लोगों से भरी नाव डूबी
Digital Desk
बाढ़ क्षेत्र में बड़ा हादसा, तीन लोगों की मौत; चार अब भी लापता, SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
बिहार की राजधानी पटना के बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक नाव हादसा हो गया। गंगा नदी में 15 लोगों से भरी नाव अचानक पलट गई, जिससे तीन लोगों की डूबने से मौत हो गई, जबकि चार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और मातम का माहौल बन गया। स्थानीय गोताखोरों और मल्लाहों की मदद से सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि SDRF की टीम लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई है।
यह हादसा बाढ़ थाना क्षेत्र के उमानाथ इलाके के पास गंगा नदी में हुआ। जानकारी के मुताबिक नाव पर सवार सभी लोग मासूमगंज बिंद टोली के रहने वाले थे और रोज की तरह समस्तीपुर जिले के सुल्तानपुर दियारा इलाके में खेती और सब्जी तोड़ने के काम से गए थे। सुबह लगभग 5:45 बजे नाव गंगा नदी पार कर रही थी, लेकिन लौटते समय तेज हवा और नदी की तेज धार के कारण नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में जिन तीन लोगों की मौत हुई है, उनकी पहचान 30 वर्षीय नीलम कुमारी, 36 वर्षीय श्रवण महतो और उनके 15 वर्षीय बेटे काशी कुमार के रूप में हुई है। पिता और बेटे की एक साथ मौत से गांव में गहरा शोक छा गया है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं चार अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक नाव पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे। इसके अलावा नाव पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। न लाइफ जैकेट थी और न ही कोई अन्य बचाव उपकरण मौजूद था। जैसे ही नाव नदी के बीचोंबीच पहुंची, तेज हवा चलने लगी और नाव डगमगाने लगी। कुछ ही सेकंड में नाव पानी में समा गई। नाव पर मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और कई लोग तेज धारा में बह गए। घटना के बाद आसपास मौजूद मल्लाहों और स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए नदी में छलांग लगा दी। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को बाहर निकाला। स्थानीय लोगों की मदद से सात लोगों की जान बचाई जा सकी। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
घायलों में राहुल कुमार, ममता देवी, कबूतरी कुमारी और एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की शामिल हैं। अन्य घायलों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें बेहतर इलाज दिया जा रहा है। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस और SDRF की टीम ने तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। SDRF की मोटरबोट और गोताखोर नदी में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। प्रशासन ने बताया कि नदी की तेज धार और गहराई के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में कठिनाई आ रही है, लेकिन हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में नाव हादसे पहले भी हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नावों की क्षमता की जांच नहीं होती और अधिक संख्या में लोगों को बैठाकर नदी पार कराई जाती है। कई नावों में सुरक्षा उपकरण भी नहीं होते, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना रहता है। गांव के लोगों ने बताया कि बाढ़ और दियारा क्षेत्र के लोगों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा है। खेती, मजदूरी और सब्जी के काम के लिए उन्हें रोज नदी पार करनी पड़ती है। बारिश और बाढ़ के मौसम में खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है, लेकिन मजबूरी में लोग जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं।
हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। मृतकों के घरों में चीख-पुकार मची हुई है। गांव की महिलाएं और बच्चे रोते-बिलखते नजर आए। कई लोग नदी किनारे बैठकर अपने परिजनों की सलामती की दुआ करते दिखाई दिए। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिवारों को सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नाव चालक से पूछताछ की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि नाव पर निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को क्यों बैठाया गया। साथ ही सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई भी की जाएगी। बिहार के दियारा और बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव परिवहन के लिए सख्त नियम लागू करने की जरूरत है। नियमित जांच, लाइफ जैकेट की अनिवार्यता और क्षमता से अधिक यात्रियों पर रोक जैसी व्यवस्थाएं ऐसे हादसों को रोक सकती हैं। SDRF और प्रशासन की टीम लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई है। ग्रामीण लगातार नदी किनारे खड़े होकर अपने परिजनों के मिलने का इंतजार कर रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर नदी परिवहन में लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी को उजागर करता है।
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पटना में गंगा नदी में नाव हादसा, 15 लोगों से भरी नाव डूबी
Digital Desk
बिहार की राजधानी पटना के बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक नाव हादसा हो गया। गंगा नदी में 15 लोगों से भरी नाव अचानक पलट गई, जिससे तीन लोगों की डूबने से मौत हो गई, जबकि चार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और मातम का माहौल बन गया। स्थानीय गोताखोरों और मल्लाहों की मदद से सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि SDRF की टीम लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई है।
यह हादसा बाढ़ थाना क्षेत्र के उमानाथ इलाके के पास गंगा नदी में हुआ। जानकारी के मुताबिक नाव पर सवार सभी लोग मासूमगंज बिंद टोली के रहने वाले थे और रोज की तरह समस्तीपुर जिले के सुल्तानपुर दियारा इलाके में खेती और सब्जी तोड़ने के काम से गए थे। सुबह लगभग 5:45 बजे नाव गंगा नदी पार कर रही थी, लेकिन लौटते समय तेज हवा और नदी की तेज धार के कारण नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में जिन तीन लोगों की मौत हुई है, उनकी पहचान 30 वर्षीय नीलम कुमारी, 36 वर्षीय श्रवण महतो और उनके 15 वर्षीय बेटे काशी कुमार के रूप में हुई है। पिता और बेटे की एक साथ मौत से गांव में गहरा शोक छा गया है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं चार अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक नाव पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे। इसके अलावा नाव पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। न लाइफ जैकेट थी और न ही कोई अन्य बचाव उपकरण मौजूद था। जैसे ही नाव नदी के बीचोंबीच पहुंची, तेज हवा चलने लगी और नाव डगमगाने लगी। कुछ ही सेकंड में नाव पानी में समा गई। नाव पर मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और कई लोग तेज धारा में बह गए। घटना के बाद आसपास मौजूद मल्लाहों और स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए नदी में छलांग लगा दी। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को बाहर निकाला। स्थानीय लोगों की मदद से सात लोगों की जान बचाई जा सकी। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
घायलों में राहुल कुमार, ममता देवी, कबूतरी कुमारी और एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की शामिल हैं। अन्य घायलों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें बेहतर इलाज दिया जा रहा है। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस और SDRF की टीम ने तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। SDRF की मोटरबोट और गोताखोर नदी में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। प्रशासन ने बताया कि नदी की तेज धार और गहराई के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में कठिनाई आ रही है, लेकिन हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में नाव हादसे पहले भी हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नावों की क्षमता की जांच नहीं होती और अधिक संख्या में लोगों को बैठाकर नदी पार कराई जाती है। कई नावों में सुरक्षा उपकरण भी नहीं होते, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना रहता है। गांव के लोगों ने बताया कि बाढ़ और दियारा क्षेत्र के लोगों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा है। खेती, मजदूरी और सब्जी के काम के लिए उन्हें रोज नदी पार करनी पड़ती है। बारिश और बाढ़ के मौसम में खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है, लेकिन मजबूरी में लोग जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं।
हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। मृतकों के घरों में चीख-पुकार मची हुई है। गांव की महिलाएं और बच्चे रोते-बिलखते नजर आए। कई लोग नदी किनारे बैठकर अपने परिजनों की सलामती की दुआ करते दिखाई दिए। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिवारों को सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नाव चालक से पूछताछ की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि नाव पर निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को क्यों बैठाया गया। साथ ही सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई भी की जाएगी। बिहार के दियारा और बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव परिवहन के लिए सख्त नियम लागू करने की जरूरत है। नियमित जांच, लाइफ जैकेट की अनिवार्यता और क्षमता से अधिक यात्रियों पर रोक जैसी व्यवस्थाएं ऐसे हादसों को रोक सकती हैं। SDRF और प्रशासन की टीम लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई है। ग्रामीण लगातार नदी किनारे खड़े होकर अपने परिजनों के मिलने का इंतजार कर रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर नदी परिवहन में लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी को उजागर करता है।
