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- Truecaller का एक अलर्ट… और 90 लाख बच गए! ‘डिजिटल अरेस्ट’ गैंग का खेल कानपुर में फेल
Truecaller का एक अलर्ट… और 90 लाख बच गए! ‘डिजिटल अरेस्ट’ गैंग का खेल कानपुर में फेल
Digital Desk
कानपुर के किदवई नगर में रहने वाले 67 साल के एक रिटायर्ड शिक्षक के लिए मंगलवार की दोपहर किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। फोन की एक घंटी ने उन्हें ऐसे जाल में फंसा दिया, जहां डर, दबाव और धोखे का खेल इतनी सफाई से खेला गया कि वे अपनी पूरी जिंदगी की कमाई—करीब 90 लाख रुपये—खोने ही वाले थे। लेकिन आखिरी वक्त पर एक चीज काम आ गई—उनके फोन में मौजूद Truecaller।
वर्दी में ‘अफसर’, स्क्रीन पर ‘CBI ऑफिस’
व्हाट्सएप पर आई वीडियो कॉल उठाते ही सामने एक शख्स नजर आया—पुलिस की वर्दी, पीछे कंट्रोल रूम जैसा सेटअप। आवाज सख्त थी और आरोप सीधा: “आपका आधार कार्ड ड्रग्स केस में पकड़ा गया है… आप डिजिटल अरेस्ट में हैं। कॉल काटी तो तुरंत गिरफ्तारी होगी।” अकेले बैठे बुजुर्ग पर इसका गहरा असर पड़ा। डर ऐसा कि उन्होंने सवाल करना भी छोड़ दिया।
पैसे ट्रांसफर करने ही वाले थे…
स्कैमर्स लगातार दबाव बना रहे थे—“अभी क्लियर करो वरना केस दर्ज होगा। दयाल जी (बदला हुआ नाम) बैंक डिटेल्स तक पहुंच चुके थे। बस कुछ क्लिक और 90 लाख रुपये उनके हाथ से निकल जाते।
तभी चमका Truecaller का ‘रेड सिग्नल’
इसी बीच उनकी नजर फोन स्क्रीन पर गई—Truecaller ने बड़े साफ शब्दों में चेतावनी दी: “Scammer – Digital Arrest Fraud” यही वह पल था जिसने सब कुछ बदल दिया। दयाल जी बताते हैं, “वीडियो देखकर लग रहा था सब सच है… लेकिन ऐप ने बताया कि ये नंबर पहले से रिपोर्टेड है। बस वहीं हिम्मत आई और मैंने कॉल काट दी।”
अब छोटे शहर बन रहे नया निशाना
ऐसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम अब मेट्रो शहरों से निकलकर कानपुर, लखनऊ, इंदौर जैसे शहरों तक पहुंच चुके हैं। ठग जानते हैं कि बुजुर्गों के मन में पुलिस और सरकारी एजेंसियों का डर ज्यादा होता है—और वही उनका सबसे बड़ा हथियार है।
याद रखने वाली जरूरी बातें
- कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी WhatsApp कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती
- डराने वाली भाषा = खतरे की घंटी
- अनजान कॉल पर पैसे या जानकारी देना = सीधा नुकसान
- फंसें तो तुरंत करें ये काम
- साइबर हेल्पलाइन: 1930
- Chakshu पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें
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Truecaller का एक अलर्ट… और 90 लाख बच गए! ‘डिजिटल अरेस्ट’ गैंग का खेल कानपुर में फेल
Digital Desk
कानपुर के किदवई नगर में रहने वाले 67 साल के एक रिटायर्ड शिक्षक के लिए मंगलवार की दोपहर किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। फोन की एक घंटी ने उन्हें ऐसे जाल में फंसा दिया, जहां डर, दबाव और धोखे का खेल इतनी सफाई से खेला गया कि वे अपनी पूरी जिंदगी की कमाई—करीब 90 लाख रुपये—खोने ही वाले थे। लेकिन आखिरी वक्त पर एक चीज काम आ गई—उनके फोन में मौजूद Truecaller।
वर्दी में ‘अफसर’, स्क्रीन पर ‘CBI ऑफिस’
व्हाट्सएप पर आई वीडियो कॉल उठाते ही सामने एक शख्स नजर आया—पुलिस की वर्दी, पीछे कंट्रोल रूम जैसा सेटअप। आवाज सख्त थी और आरोप सीधा: “आपका आधार कार्ड ड्रग्स केस में पकड़ा गया है… आप डिजिटल अरेस्ट में हैं। कॉल काटी तो तुरंत गिरफ्तारी होगी।” अकेले बैठे बुजुर्ग पर इसका गहरा असर पड़ा। डर ऐसा कि उन्होंने सवाल करना भी छोड़ दिया।
पैसे ट्रांसफर करने ही वाले थे…
स्कैमर्स लगातार दबाव बना रहे थे—“अभी क्लियर करो वरना केस दर्ज होगा। दयाल जी (बदला हुआ नाम) बैंक डिटेल्स तक पहुंच चुके थे। बस कुछ क्लिक और 90 लाख रुपये उनके हाथ से निकल जाते।
तभी चमका Truecaller का ‘रेड सिग्नल’
इसी बीच उनकी नजर फोन स्क्रीन पर गई—Truecaller ने बड़े साफ शब्दों में चेतावनी दी: “Scammer – Digital Arrest Fraud” यही वह पल था जिसने सब कुछ बदल दिया। दयाल जी बताते हैं, “वीडियो देखकर लग रहा था सब सच है… लेकिन ऐप ने बताया कि ये नंबर पहले से रिपोर्टेड है। बस वहीं हिम्मत आई और मैंने कॉल काट दी।”
अब छोटे शहर बन रहे नया निशाना
ऐसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम अब मेट्रो शहरों से निकलकर कानपुर, लखनऊ, इंदौर जैसे शहरों तक पहुंच चुके हैं। ठग जानते हैं कि बुजुर्गों के मन में पुलिस और सरकारी एजेंसियों का डर ज्यादा होता है—और वही उनका सबसे बड़ा हथियार है।
याद रखने वाली जरूरी बातें
- कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी WhatsApp कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती
- डराने वाली भाषा = खतरे की घंटी
- अनजान कॉल पर पैसे या जानकारी देना = सीधा नुकसान
- फंसें तो तुरंत करें ये काम
- साइबर हेल्पलाइन: 1930
- Chakshu पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें
