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बाराबंकी टोल प्लाज़ा विवाद: शुल्क नियमों के उल्लंघन और टोल-मुक्त मांग पर उठा सवाल
Digital Desk
बाराबंकी जिले के गोटोना बारा टोल प्लाज़ा पर हाल ही में सामने आए विवाद को लेकर टोल प्रबंधन की ओर से विस्तृत पक्ष सामने आया है। प्रबंधन का कहना है कि यह मामला किसी अचानक हुई घटना का नहीं, बल्कि टोल शुल्क नियमों के बार-बार उल्लंघन और जानबूझकर उत्पन्न किए गए विवादों की श्रृंखला का हिस्सा है।
जानकारी के अनुसार, 30 दिसंबर 2025 को एक अधिवक्ता अपने निजी वाहन से टोल प्लाज़ा पहुंचे और राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के तहत देय टोल शुल्क का भुगतान करने से इनकार कर दिया। नियमों के अनुसार अधिवक्ताओं को निजी वाहन से यात्रा करने पर किसी प्रकार की टोल-मुक्ति का प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद संबंधित व्यक्ति द्वारा टोल-फ्री आवागमन की मांग की गई, जिससे टोल प्लाज़ा की सामान्य संचालन व्यवस्था प्रभावित हुई।
टोल कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संयम बरतते हुए उन्हें आगे बढ़ने दिया, ताकि किसी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या न उत्पन्न हो। हालांकि, इसके बाद उसी अधिवक्ता द्वारा पुनः टोल प्लाज़ा पर आकर टोल-मुक्त संचालन की मांग की गई। प्रबंधन के अनुसार यह न केवल नियमों के विरुद्ध था, बल्कि टोल एजेंसी पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास भी प्रतीत होता है।
टोल प्रबंधन का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों में टोल भुगतान से इनकार करने वालों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। ऐसे में नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी टोल कर्मियों पर ही होती है। नियमों का पालन न कराने की स्थिति में कर्मचारियों और एजेंसी दोनों के खिलाफ अनुबंधीय दंड, ऑडिट आपत्तियां और प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।
इस बीच, घटना से जुड़े कुछ चयनित वीडियो क्लिप और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल की गईं, जिनमें 30 दिसंबर को हुई पूर्व घटनाओं का उल्लेख नहीं किया गया। प्रबंधन का आरोप है कि इससे एकतरफा नैरेटिव तैयार किया गया और बिना निष्पक्ष जांच के सार्वजनिक धारणा बनाई गई।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार के शारीरिक टकराव या अनुचित भाषा का समर्थन नहीं करती। उच्च पेशेवर मानकों को बनाए रखने के उद्देश्य से संबंधित कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, हालांकि इसे एकतरफा दोष स्वीकार करना नहीं माना जाना चाहिए।
टोल एजेंसी ने यह भी चिंता जताई कि कुछ प्रभावशाली व्यक्ति या कानूनी पेशेवर ऐसे मामलों का उपयोग व्यक्तिगत या प्रचारात्मक लाभ के लिए करते हैं, जिससे कर्मचारियों और एजेंसियों की छवि प्रभावित होती है। अंत में, NHAI से ऐसे मामलों के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा अथवा मध्यस्थ तंत्र स्थापित करने की अनुशंसा की गई है, ताकि दोनों पक्षों के साक्ष्यों के आधार पर संतुलित निर्णय लिया जा सके।
