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क्या दोबारा लग सकता है लॉकडाउन? PM मोदी की अपील के बाद तेल मंत्री ने कही बड़ी बात
नेशनल डेस्क
PM मोदी की ईंधन बचाने की अपील के बाद लॉकडाउन की चर्चाओं पर तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति साफ की। जानिए पूरा मामला।
पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध की स्थिति को देखते हुए, भारत में अचानक लॉकडाउन की चर्चा काफी बढ़ गई थी। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे कि केंद्र सरकार जल्द बड़ा फैसला ले सकती है। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह अपील सामने आई, जिसमें उन्होंने लोगों से ईंधन बचाने, विदेश यात्रा टालने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी थी। इसी बीच, मंगलवार को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट कर दिया कि देश में लॉकडाउन लगाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं है, बल्कि उन्हें आने वाले वैश्विक आर्थिक दबावों के लिए तैयार करना है।
दिल्ली में आयोजित CII वार्षिक बिजनेस समिट 2026 के दौरान हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में हालात बदल रहे हैं और इसका असर दुनिया भर के तेल बाजार पर पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भारत ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है ताकि कोई भी ईंधन संकट पैदा न हो। मंत्री ने बताया कि LPG का उत्पादन बढ़ाकर प्रतिदिन लगभग 54 हजार टन कर दिया गया है, जबकि पहले यह आंकड़ा लगभग 35 हजार टन था। सरकार लगातार तेल की आपूर्ति, डॉलर के खर्च और आयात बिल पर नजर बनाए हुए है। पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर 'भारत में फिर लॉकडाउन' जैसे शब्द तेजी से ट्रेंड कर रहे थे, लेकिन मंत्री के बयान के बाद अब स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से बचत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए मेट्रो, कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक इस्तेमाल किया जाए। कंपनियों को भी यह सलाह दी गई है कि जहां संभव हो वहां कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाए ताकि ईंधन की बचत हो सके। इसके साथ ही, सोने की खरीददारी और विदेशी यात्राओं को कुछ समय के लिए टालने की भी सलाह दी गई थी। सरकार का मानना है कि भारत बड़े पैमाने पर कच्चा तेल और सोना आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका आर्थिक असर सीधे देश पर पड़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार अब आत्मनिर्भरता पर ज्यादा जोर दे रही है। इसमें प्राकृतिक खेती, स्वदेशी उत्पादों और खाने के तेल की खपत कम करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि यह समय घबराने का नहीं, बल्कि समझदारी से संसाधनों का उपयोग करने का है। उन्होंने दोहराया कि लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं है और सरकार केवल एहतियाती कदम उठा रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारत पर कम से कम पड़े। फिलहाल, केंद्र की कोशिश यही है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और डॉलर की मांग बढ़ने के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था स्थिर बनी रहे।
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क्या दोबारा लग सकता है लॉकडाउन? PM मोदी की अपील के बाद तेल मंत्री ने कही बड़ी बात
नेशनल डेस्क
पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध की स्थिति को देखते हुए, भारत में अचानक लॉकडाउन की चर्चा काफी बढ़ गई थी। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे कि केंद्र सरकार जल्द बड़ा फैसला ले सकती है। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह अपील सामने आई, जिसमें उन्होंने लोगों से ईंधन बचाने, विदेश यात्रा टालने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी थी। इसी बीच, मंगलवार को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट कर दिया कि देश में लॉकडाउन लगाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं है, बल्कि उन्हें आने वाले वैश्विक आर्थिक दबावों के लिए तैयार करना है।
दिल्ली में आयोजित CII वार्षिक बिजनेस समिट 2026 के दौरान हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में हालात बदल रहे हैं और इसका असर दुनिया भर के तेल बाजार पर पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भारत ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है ताकि कोई भी ईंधन संकट पैदा न हो। मंत्री ने बताया कि LPG का उत्पादन बढ़ाकर प्रतिदिन लगभग 54 हजार टन कर दिया गया है, जबकि पहले यह आंकड़ा लगभग 35 हजार टन था। सरकार लगातार तेल की आपूर्ति, डॉलर के खर्च और आयात बिल पर नजर बनाए हुए है। पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर 'भारत में फिर लॉकडाउन' जैसे शब्द तेजी से ट्रेंड कर रहे थे, लेकिन मंत्री के बयान के बाद अब स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से बचत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए मेट्रो, कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक इस्तेमाल किया जाए। कंपनियों को भी यह सलाह दी गई है कि जहां संभव हो वहां कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाए ताकि ईंधन की बचत हो सके। इसके साथ ही, सोने की खरीददारी और विदेशी यात्राओं को कुछ समय के लिए टालने की भी सलाह दी गई थी। सरकार का मानना है कि भारत बड़े पैमाने पर कच्चा तेल और सोना आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका आर्थिक असर सीधे देश पर पड़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार अब आत्मनिर्भरता पर ज्यादा जोर दे रही है। इसमें प्राकृतिक खेती, स्वदेशी उत्पादों और खाने के तेल की खपत कम करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि यह समय घबराने का नहीं, बल्कि समझदारी से संसाधनों का उपयोग करने का है। उन्होंने दोहराया कि लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं है और सरकार केवल एहतियाती कदम उठा रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारत पर कम से कम पड़े। फिलहाल, केंद्र की कोशिश यही है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और डॉलर की मांग बढ़ने के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था स्थिर बनी रहे।
