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मालदा के BSF कैंप में जवान ने की फायरिंग, दो सुरक्षाकर्मियों की मौत; आरोपी कॉन्स्टेबल हिरासत में
Digital Desk
कोर्ट मार्शल की कार्रवाई का सामना कर रहे जवान पर संतरी से सर्विस राइफल छीनकर गोलियां चलाने का आरोप; एक हेड कॉन्स्टेबल घायल, हथियार तक पहुंचने में हुई सुरक्षा चूक की भी जांच
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक कैंप के भीतर हुई गोलीबारी में दो जवानों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य सुरक्षाकर्मी घायल हो गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, फायरिंग का आरोप BSF के ही एक कॉन्स्टेबल पर है, जो पहले से अनुशासनात्मक कार्रवाई और कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया का सामना कर रहा था। घटना के तुरंत बाद कैंप में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी को काबू कर हिरासत में ले लिया। BSF और स्थानीय पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
घटना मालदा जिले के बैष्णबनगर इलाके में स्थित BSF कैंप में बुधवार दोपहर करीब 3:50 बजे हुई। यहां 119वीं और 71वीं बटालियन का मुख्यालय बताया जा रहा है। अचानक हुई गोलीबारी से कैंप परिसर में अफरा-तफरी मच गई। गोलियों की आवाज सुनते ही वहां मौजूद जवान सक्रिय हुए और स्थिति को नियंत्रण में लिया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी की पहचान 119वीं बटालियन के कॉन्स्टेबल शिवम कुमार मिश्रा के रूप में हुई है। उसके खिलाफ पहले से कोर्ट मार्शल से जुड़ी कार्रवाई चल रही थी और वह BSF की निगरानी में था। अब जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि निगरानी में रखे जाने के बावजूद आरोपी हथियार तक कैसे पहुंचा और उसे फायरिंग का मौका कैसे मिला।
बताया जा रहा है कि आरोपी ने ड्यूटी पर तैनात एक संतरी को कथित तौर पर काबू में कर उसकी सर्विस राइफल अपने कब्जे में ले ली। इसके बाद उसने पास की बैरक की तरफ गोलियां चला दीं। फायरिंग की चपेट में तीन BSF कर्मी आ गए। घटना इतनी तेजी से हुई कि कैंप में मौजूद जवानों को संभलने का बहुत कम समय मिला। हालांकि अन्य सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को काबू कर लिया और हथियार अपने कब्जे में ले लिया।
गोली लगने से घायल तीनों जवानों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल हेड कॉन्स्टेबल अजय कुमार और कॉन्स्टेबल अंबादार सुरेश को बचाया नहीं जा सका। दोनों 71वीं बटालियन से जुड़े बताए गए हैं। डॉक्टरों ने उपचार के दौरान दोनों को मृत घोषित कर दिया।
इस घटना में हेड कॉन्स्टेबल बिकास ब्रह्मा भी घायल हुए हैं। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है और डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद BSF के वरिष्ठ अधिकारी भी सक्रिय हुए और कैंप के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया।
फायरिंग करने के आरोपी कॉन्स्टेबल को घटना के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया। स्थानीय पुलिस ने भी मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां कैंप में मौजूद जवानों और घटना के प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी जुटाकर पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार करने की कोशिश कर रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया का सामना कर रहा और निगरानी में मौजूद जवान संतरी की सर्विस राइफल तक कैसे पहुंच गया। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि घटना के समय आरोपी की सुरक्षा और निगरानी के लिए क्या व्यवस्था थी, संतरी से हथियार छीने जाने की परिस्थितियां क्या थीं और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सही तरीके से किया गया था या नहीं।
फायरिंग के पीछे की असली वजह भी अभी स्पष्ट नहीं हुई है। शुरुआती स्तर पर आरोपी की मानसिक स्थिति से जुड़े पहलू की जांच किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। जांच पूरी होने से पहले किसी एक कारण को घटना के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा रहा है।
जांच टीम आरोपी के खिलाफ चल रही कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड भी देख सकती है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई किस मामले में चल रही थी और क्या उसका इस गोलीबारी से कोई संबंध था। घटना से पहले आरोपी के व्यवहार और अन्य जवानों के साथ उसके संबंधों की जानकारी भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
BSF कैंप जैसे अत्यधिक सुरक्षित परिसर के अंदर हुई इस घटना के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी सवाल खड़े हुए हैं। खास तौर पर अनुशासनात्मक हिरासत या निगरानी में रखे गए जवानों के आसपास हथियारों की सुरक्षा को लेकर मौजूदा नियमों की समीक्षा किए जाने की संभावना है। अधिकारी यह जांच रहे हैं कि क्या सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर ऐसी चूक हुई, जिससे आरोपी को हथियार हासिल करने का अवसर मिला।
पुलिस और BSF की जांच में घटनास्थल से मिले साक्ष्य, इस्तेमाल किए गए हथियार, गोलियों और अन्य तकनीकी सबूतों को भी शामिल किया जा रहा है। कैंप परिसर में उपलब्ध निगरानी कैमरों की फुटेज की जांच से भी घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। आरोपी से पूछताछ के जरिए फायरिंग के पीछे का कारण जानने की कोशिश की जा रही है।
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मालदा के BSF कैंप में जवान ने की फायरिंग, दो सुरक्षाकर्मियों की मौत; आरोपी कॉन्स्टेबल हिरासत में
Digital Desk
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक कैंप के भीतर हुई गोलीबारी में दो जवानों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य सुरक्षाकर्मी घायल हो गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, फायरिंग का आरोप BSF के ही एक कॉन्स्टेबल पर है, जो पहले से अनुशासनात्मक कार्रवाई और कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया का सामना कर रहा था। घटना के तुरंत बाद कैंप में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी को काबू कर हिरासत में ले लिया। BSF और स्थानीय पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
घटना मालदा जिले के बैष्णबनगर इलाके में स्थित BSF कैंप में बुधवार दोपहर करीब 3:50 बजे हुई। यहां 119वीं और 71वीं बटालियन का मुख्यालय बताया जा रहा है। अचानक हुई गोलीबारी से कैंप परिसर में अफरा-तफरी मच गई। गोलियों की आवाज सुनते ही वहां मौजूद जवान सक्रिय हुए और स्थिति को नियंत्रण में लिया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी की पहचान 119वीं बटालियन के कॉन्स्टेबल शिवम कुमार मिश्रा के रूप में हुई है। उसके खिलाफ पहले से कोर्ट मार्शल से जुड़ी कार्रवाई चल रही थी और वह BSF की निगरानी में था। अब जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि निगरानी में रखे जाने के बावजूद आरोपी हथियार तक कैसे पहुंचा और उसे फायरिंग का मौका कैसे मिला।
बताया जा रहा है कि आरोपी ने ड्यूटी पर तैनात एक संतरी को कथित तौर पर काबू में कर उसकी सर्विस राइफल अपने कब्जे में ले ली। इसके बाद उसने पास की बैरक की तरफ गोलियां चला दीं। फायरिंग की चपेट में तीन BSF कर्मी आ गए। घटना इतनी तेजी से हुई कि कैंप में मौजूद जवानों को संभलने का बहुत कम समय मिला। हालांकि अन्य सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को काबू कर लिया और हथियार अपने कब्जे में ले लिया।
गोली लगने से घायल तीनों जवानों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल हेड कॉन्स्टेबल अजय कुमार और कॉन्स्टेबल अंबादार सुरेश को बचाया नहीं जा सका। दोनों 71वीं बटालियन से जुड़े बताए गए हैं। डॉक्टरों ने उपचार के दौरान दोनों को मृत घोषित कर दिया।
इस घटना में हेड कॉन्स्टेबल बिकास ब्रह्मा भी घायल हुए हैं। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है और डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद BSF के वरिष्ठ अधिकारी भी सक्रिय हुए और कैंप के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया।
फायरिंग करने के आरोपी कॉन्स्टेबल को घटना के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया। स्थानीय पुलिस ने भी मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां कैंप में मौजूद जवानों और घटना के प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी जुटाकर पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार करने की कोशिश कर रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया का सामना कर रहा और निगरानी में मौजूद जवान संतरी की सर्विस राइफल तक कैसे पहुंच गया। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि घटना के समय आरोपी की सुरक्षा और निगरानी के लिए क्या व्यवस्था थी, संतरी से हथियार छीने जाने की परिस्थितियां क्या थीं और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सही तरीके से किया गया था या नहीं।
फायरिंग के पीछे की असली वजह भी अभी स्पष्ट नहीं हुई है। शुरुआती स्तर पर आरोपी की मानसिक स्थिति से जुड़े पहलू की जांच किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। जांच पूरी होने से पहले किसी एक कारण को घटना के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा रहा है।
जांच टीम आरोपी के खिलाफ चल रही कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड भी देख सकती है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई किस मामले में चल रही थी और क्या उसका इस गोलीबारी से कोई संबंध था। घटना से पहले आरोपी के व्यवहार और अन्य जवानों के साथ उसके संबंधों की जानकारी भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
BSF कैंप जैसे अत्यधिक सुरक्षित परिसर के अंदर हुई इस घटना के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी सवाल खड़े हुए हैं। खास तौर पर अनुशासनात्मक हिरासत या निगरानी में रखे गए जवानों के आसपास हथियारों की सुरक्षा को लेकर मौजूदा नियमों की समीक्षा किए जाने की संभावना है। अधिकारी यह जांच रहे हैं कि क्या सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर ऐसी चूक हुई, जिससे आरोपी को हथियार हासिल करने का अवसर मिला।
पुलिस और BSF की जांच में घटनास्थल से मिले साक्ष्य, इस्तेमाल किए गए हथियार, गोलियों और अन्य तकनीकी सबूतों को भी शामिल किया जा रहा है। कैंप परिसर में उपलब्ध निगरानी कैमरों की फुटेज की जांच से भी घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। आरोपी से पूछताछ के जरिए फायरिंग के पीछे का कारण जानने की कोशिश की जा रही है।
