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केंद्र के सामने CJP ने रखीं तीन मांगें, दो पर विचार का भरोसा; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर नहीं बनी सहमति
Digital Desk
NEET पेपर लीक विवाद के बीच सरकार और CJP प्रतिनिधिमंडल की बातचीत; संगठन का दावा—तीन प्रमुख मुद्दों में से दो पर आगे बढ़ने को तैयार केंद्र, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन जारी
NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत हुई। बैठक के बाद CJP ने कहा कि उसने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं। संगठन के मुताबिक, इनमें से दो मांगों पर सरकार ने विचार करने और आगे की प्रक्रिया पर काम करने की बात कही है, जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी।
CJP का प्रतिनिधिमंडल जंतर-मंतर से केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत के लिए पहुंचा था। संगठन की ओर से इस बैठक में NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही, छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का विषय प्रमुखता से उठाया गया। बैठक के बाद प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार के साथ कई बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई और कुछ मुद्दों पर सकारात्मक संकेत मिले हैं।
संगठन का कहना है कि उसकी पहली प्रमुख मांग पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों के खिलाफ ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है, जिससे दोषियों पर तेजी से कार्रवाई हो और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। CJP परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय करने और जांच से लेकर कार्रवाई तक की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग कर रही है।
दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा आंदोलन से जुड़े छात्रों और उनके हितों का है। CJP का कहना है कि पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों को कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही परीक्षा में गड़बड़ी से प्रभावित विद्यार्थियों की समस्याओं को दूर करने और उनकी पढ़ाई तथा भविष्य पर पड़े असर को देखते हुए उचित कदम उठाए जाने चाहिए। संगठन के अनुसार, सरकार ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग पर विचार करने का भरोसा दिया है।
तीसरी और सबसे विवादित मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। CJP इस मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है। संगठन का तर्क है कि इतने बड़े परीक्षा विवाद में केवल आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। हालांकि बैठक में सरकार की तरफ से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई सकारात्मक आश्वासन मिलने की बात सामने नहीं आई।
CJP नेताओं ने बैठक के बाद कहा कि सरकार के साथ संवाद जारी रखना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संगठन ने अपनी सभी मांगें वापस ले ली हैं। दो मुद्दों पर सरकार की ओर से विचार करने का भरोसा मिलने को संगठन ने बातचीत में प्रगति के रूप में देखा है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा अभी भी दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ा मतभेद बना हुआ है।
NEET विवाद को लेकर पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन चल रहा है। इसमें छात्र, अभिभावक और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा पेपर लीक के मामलों में कठोर कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही का सवाल भी लगातार उठाया गया है।
इसी विवाद के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लंबी भूख हड़ताल भी की थी। सरकार के साथ बातचीत और कुछ मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया। हालांकि उनके अनशन खत्म करने के बाद भी CJP ने स्पष्ट किया कि उसका आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा और संगठन अपनी बाकी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखेगा।
पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार भी लगातार सख्त कार्रवाई का भरोसा दे रही है। सरकार की ओर से परीक्षा संबंधी अपराधों में कठोर दंड, मामलों की तेज सुनवाई और परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा मजबूत करने जैसे कदमों की बात कही गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी छात्रों को दिए संदेश में पेपर लीक को गंभीर समस्या बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कह चुके हैं।
दूसरी ओर विपक्ष ने भी इस मामले को संसद में जोर-शोर से उठाया है। NEET विवाद को लेकर लोकसभा में हंगामा हुआ और विपक्षी सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ प्रधानमंत्री से सदन में बयान देने की मांग की। सरकार ने कहा कि वह इस विषय पर संसदीय चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष राजनीतिक जवाबदेही तय करने की अपनी मांग पर कायम है।
CJP की ओर से कहा गया है कि सरकार के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रहेंगे। संगठन अब यह देखेगा कि जिन दो मांगों पर विचार करने की बात कही गई है, उन पर सरकार किस तरह और कितनी जल्दी आगे बढ़ती है। साथ ही जंतर-मंतर पर आंदोलन की आगे की रणनीति भी सरकारी कदमों और बातचीत के अगले दौर के आधार पर तय की जाएगी।
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केंद्र के सामने CJP ने रखीं तीन मांगें, दो पर विचार का भरोसा; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर नहीं बनी सहमति
Digital Desk
NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत हुई। बैठक के बाद CJP ने कहा कि उसने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं। संगठन के मुताबिक, इनमें से दो मांगों पर सरकार ने विचार करने और आगे की प्रक्रिया पर काम करने की बात कही है, जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी।
CJP का प्रतिनिधिमंडल जंतर-मंतर से केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत के लिए पहुंचा था। संगठन की ओर से इस बैठक में NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही, छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का विषय प्रमुखता से उठाया गया। बैठक के बाद प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार के साथ कई बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई और कुछ मुद्दों पर सकारात्मक संकेत मिले हैं।
संगठन का कहना है कि उसकी पहली प्रमुख मांग पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों के खिलाफ ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है, जिससे दोषियों पर तेजी से कार्रवाई हो और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। CJP परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय करने और जांच से लेकर कार्रवाई तक की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग कर रही है।
दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा आंदोलन से जुड़े छात्रों और उनके हितों का है। CJP का कहना है कि पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों को कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही परीक्षा में गड़बड़ी से प्रभावित विद्यार्थियों की समस्याओं को दूर करने और उनकी पढ़ाई तथा भविष्य पर पड़े असर को देखते हुए उचित कदम उठाए जाने चाहिए। संगठन के अनुसार, सरकार ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग पर विचार करने का भरोसा दिया है।
तीसरी और सबसे विवादित मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। CJP इस मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है। संगठन का तर्क है कि इतने बड़े परीक्षा विवाद में केवल आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। हालांकि बैठक में सरकार की तरफ से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई सकारात्मक आश्वासन मिलने की बात सामने नहीं आई।
CJP नेताओं ने बैठक के बाद कहा कि सरकार के साथ संवाद जारी रखना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संगठन ने अपनी सभी मांगें वापस ले ली हैं। दो मुद्दों पर सरकार की ओर से विचार करने का भरोसा मिलने को संगठन ने बातचीत में प्रगति के रूप में देखा है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा अभी भी दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ा मतभेद बना हुआ है।
NEET विवाद को लेकर पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन चल रहा है। इसमें छात्र, अभिभावक और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा पेपर लीक के मामलों में कठोर कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही का सवाल भी लगातार उठाया गया है।
इसी विवाद के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लंबी भूख हड़ताल भी की थी। सरकार के साथ बातचीत और कुछ मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया। हालांकि उनके अनशन खत्म करने के बाद भी CJP ने स्पष्ट किया कि उसका आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा और संगठन अपनी बाकी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखेगा।
पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार भी लगातार सख्त कार्रवाई का भरोसा दे रही है। सरकार की ओर से परीक्षा संबंधी अपराधों में कठोर दंड, मामलों की तेज सुनवाई और परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा मजबूत करने जैसे कदमों की बात कही गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी छात्रों को दिए संदेश में पेपर लीक को गंभीर समस्या बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कह चुके हैं।
दूसरी ओर विपक्ष ने भी इस मामले को संसद में जोर-शोर से उठाया है। NEET विवाद को लेकर लोकसभा में हंगामा हुआ और विपक्षी सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ प्रधानमंत्री से सदन में बयान देने की मांग की। सरकार ने कहा कि वह इस विषय पर संसदीय चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष राजनीतिक जवाबदेही तय करने की अपनी मांग पर कायम है।
CJP की ओर से कहा गया है कि सरकार के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रहेंगे। संगठन अब यह देखेगा कि जिन दो मांगों पर विचार करने की बात कही गई है, उन पर सरकार किस तरह और कितनी जल्दी आगे बढ़ती है। साथ ही जंतर-मंतर पर आंदोलन की आगे की रणनीति भी सरकारी कदमों और बातचीत के अगले दौर के आधार पर तय की जाएगी।
