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दिल्ली पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी गिरोह के दो आरोपी गुजरात से गिरफ्तार किए
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एनआरआई डॉक्टर दंपती से 14.85 करोड़ रुपये की ठगी का पर्दाफाश, आरोपी ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाए गए
दिल्ली पुलिस ने ग्रेटर कैलाश में रहने वाले एनआरआई डॉक्टर दंपती से 14.85 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले हाई-प्रोफाइल साइबर अपराध मामले में अहम सफलता हासिल की है। पुलिस ने गुजरात के वडोदरा से दो आरोपियों — 28 वर्षीय दिव्यांग पटेल और 26 वर्षीय कृतिक शितोले — को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को गुरुवार को हिरासत में लेकर ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया, जहां उनकी दो दिन की पुलिस रिमांड पर पूछताछ जारी है।
पुलिस के मुताबिक, यह मामला ‘डिजिटल अरेस्ट’ का है। आरोपियों ने एनआरआई डॉक्टर दंपती को कथित तौर पर डिजिटल तरीके से डराकर और नियंत्रण में रखकर बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। जांच में सामने आया कि 29 दिसंबर 2025 को 14.85 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी, जिसमें से लगभग 4 करोड़ रुपये दिव्यांग पटेल के नाम पर पंजीकृत एक फर्जी एनजीओ के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे।
कई बैंक खातों में ट्रांसफर
पुलिस ने बताया कि आरोपी ठगी की रकम को कई अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर चोरी के पैसों का स्रोत छुपाने की कोशिश कर रहे थे। दिव्यांग पटेल ने कमीशन के बदले अपने नाम पर पंजीकृत फर्जी एनजीओ के खाते का उपयोग करने की अनुमति दी। जबकि कृतिक शितोले ने गिरोह के अन्य सदस्यों और दिव्यांग पटेल के बीच संपर्क बनाने और लेन-देन की प्रक्रिया सुचारू करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जांच के दौरान यह पता चला कि गिरोह ने ठगी की रकम को विभिन्न राज्यों में अलग-अलग खातों में भेजा, जिससे मनी ट्रेल और स्रोत को छुपाने का प्रयास किया गया। मनी ट्रेल के आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
पृष्ठभूमि और प्रतिक्रिया
यह मामला साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी की नई तकनीकियों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी तकनीकें वृद्ध या कम जागरूक लोगों को आसानी से निशाना बना सकती हैं। दिल्ली पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन कॉल या संदेश पर भरोसा न करें।
एनआरआई डॉक्टर दंपती ने पुलिस कार्रवाई की सराहना की और कहा कि आरोपी को जल्द न्यायालय में सजा मिले। पुलिस ने भी भरोसा दिलाया कि पूरे गिरोह की पहचान और ठगी की शेष राशि की वापसी के लिए जांच तेज़ी से जारी है।
आगे की स्थिति
पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान और फंसे हुए पैसों को ट्रैक करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बैंक और साइबर लेन-देन की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल ठगी के मामलों में सक्रिय रिमांड और मनी ट्रेल आधारित जांच से भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
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