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बांदा में धीरेंद्र शास्त्री का बयान, धार्मिक विमर्श और सामाजिक संयम पर जोर
नेशनल न्यूज
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर ने कहा—उकसावे से नहीं, आत्मसंयम और सुधार से मजबूत होगा समाज
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दिया गया बयान चर्चा में है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आज कहा कि सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए बोलने में संयम जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई विषय ऐसे हैं, जिन पर खुलकर बोलना सामाजिक तनाव को जन्म दे सकता है।
बांदा में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान शास्त्री ने कहा कि भारत को मजबूत बनाने की प्रक्रिया केवल भावनात्मक नारों या आक्रामक वक्तव्यों से पूरी नहीं होती। उनके अनुसार, किसी भी समाज को आगे बढ़ने के लिए पहले अपनी आंतरिक कमजोरियों और कुरीतियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे समुदायों पर टिप्पणी करने से सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच सकता है।
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में यह बात दोहराई कि भारत को एकजुट रखने के लिए जिम्मेदार भाषा और व्यवहार जरूरी है। उन्होंने कहा कि धर्म का उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, न कि विभाजन को बढ़ावा देना। उनका कहना था कि संवेदनशील मुद्दों पर बयानबाजी से अक्सर स्थिति बिगड़ती है और इसका असर आम लोगों पर पड़ता है।
बागेश्वर धाम प्रमुख बांदा सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के आमंत्रण पर जिले में पहुंचे थे। उनके आगमन पर वे सीधे विधायक के खुरहंड स्थित आवास गए, जहां से उन्होंने भगवान शंकर कैलाशेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे मंदिर परिसर में आयोजित सुंदरकांड पाठ में शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या देखने को मिली। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, धीरेंद्र शास्त्री के दौरे की सूचना मिलने के बाद आठ हजार से अधिक लोग मंदिर पहुंचे। भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन ने अतिरिक्त इंतजाम किए थे।
मंच पर शास्त्री के साथ अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास सहित कई संत और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस बल तैनात रहा। आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
यह धीरेंद्र शास्त्री का जनवरी महीने में बांदा का दूसरा दौरा था। इससे पहले 16 से 20 जनवरी तक उन्होंने जिले में हनुमंत कथा का आयोजन किया था, जिसमें प्रदेश सरकार के मंत्री, पूर्व सांसद और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए थे। उस आयोजन को बुंदेलखंड क्षेत्र के बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना गया था।
अपने संबोधन के अंत में शास्त्री ने युवाओं से अपील की कि वे धर्म को केवल भावनाओं तक सीमित न रखें, बल्कि शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी को भी जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ेगा, जब विचारों में संतुलन और व्यवहार में संयम होगा।
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