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आंतरिक मतभेदों में फंसी भारत-अमेरिका ट्रेड डील: अमेरिकी संसद सदस्य की लीक ऑडियो से खुलासा
अंतराष्ट्रीय न्यूज
व्हाइट हाउस के भीतर असहमति और टैरिफ नीति को ठहराया गया जिम्मेदार, 2025 में अटकी रही व्यापार वार्ता
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता 2025 में अंतिम चरण तक पहुंचने के बावजूद साकार नहीं हो सका। अब इस देरी को लेकर अमेरिका की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर मतभेद सामने आए हैं। अमेरिकी मीडिया को प्राप्त एक लीक ऑडियो रिकॉर्डिंग में एक वरिष्ठ सांसद ने दावा किया है कि व्हाइट हाउस के आंतरिक विरोध और शीर्ष नेतृत्व के बीच असहमति के कारण यह समझौता आगे नहीं बढ़ पाया।
रिकॉर्डिंग के अनुसार, सांसद ने निजी बैठक के दौरान दानदाताओं से बातचीत में कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर प्रशासन के भीतर एकराय नहीं थी। बातचीत में यह संकेत दिया गया कि उपराष्ट्रपति कार्यालय, व्यापार नीति से जुड़े सलाहकार और राष्ट्रपति स्तर पर अलग-अलग दृष्टिकोण के चलते निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हुई।
ऑडियो में यह भी कहा गया कि 2025 के मध्य में लागू की गई टैरिफ नीति ने न केवल अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संबंधों को जटिल बनाया, बल्कि घरेलू स्तर पर भी आर्थिक दबाव बढ़ाया। सांसद ने चेतावनी दी थी कि यदि टैरिफ का असर आम उपभोक्ताओं की बचत और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर पड़ा, तो इसका राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
रिकॉर्डिंग में यह भी सामने आया कि टैरिफ लागू होने के बाद कुछ सांसदों ने राष्ट्रपति से देर रात बातचीत कर नीति पर पुनर्विचार की मांग की थी। हालांकि, यह संवाद तनावपूर्ण रहा और किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सका। सांसद के अनुसार, उस समय नेतृत्व ने राजनीतिक जोखिमों की तुलना में सख्त व्यापार नीति को प्राथमिकता दी।
इस ऑडियो लीक से अमेरिकी सत्ता पक्ष के भीतर दो स्पष्ट धाराएं उजागर होती हैं—एक ओर पारंपरिक मुक्त व्यापार समर्थक, तो दूसरी ओर सख्त “अमेरिका फर्स्ट” नीति के समर्थक। मतभेद केवल व्यापार तक सीमित नहीं बताए गए, बल्कि विदेश नीति और रणनीतिक नियुक्तियों तक फैले होने की बात भी रिकॉर्डिंग में कही गई है।
हालांकि, सार्वजनिक मंचों पर पार्टी नेतृत्व ने एकता बनाए रखने का संदेश दिया है। प्रवक्ताओं के माध्यम से यह कहा गया कि प्रशासन और सांसद साझा राष्ट्रीय हितों पर मिलकर काम कर रहे हैं और व्यापार वार्ता भविष्य में फिर गति पकड़ सकती है।
इस बीच, भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर टैरिफ का मुद्दा अब भी प्रमुख बना हुआ है। अमेरिका की ओर से भारत पर कुल 50 प्रतिशत तक शुल्क लागू है, जिसमें एक हिस्सा पारस्परिक टैरिफ और दूसरा हिस्सा भू-राजनीतिक कारणों से जुड़ा बताया गया है। भारत लगातार इन शुल्कों को अनुचित बताते हुए हटाने की मांग करता रहा है।
हाल के बयानों में अमेरिकी वित्तीय प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो अतिरिक्त टैरिफ में राहत पर विचार किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भले ही 2025 में व्यापार समझौता अंतिम रूप नहीं ले सका, लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
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